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    कार के शीशों पर ब्लैक फिल्म लगवाने वालों की खैर नहीं, 70 फीसद से कम विजिबिलिटी होने पर होगी कड़ी कार्रवाई

    By kumar GauravEdited By: Mohit Tripathi
    Updated: Mon, 10 Apr 2023 04:09 PM (IST)

    आमतौर पर जब लोग नई गाड़ी लेते हैं तो वे चाहते हैं कि उनकी गाड़ी कुछ अलग दिखे। इसके लिए वे गाड़ी में कई तरह के मोडिफिकेशन कराते हैं। कानूनी तौर पर कार या किसी भी गाड़ी में इस तरह के अधिकतर मोडिफिकेशन गलत हैं।

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    कार में 70 प्रतिशत से कम विजिबिलिटी है तो कार्रवाई के दायरे में...।

    जागरण संवाददाता, रांची: आमतौर पर जब लोग  नई गाड़ी लेते हैं तो वे चाहते हैं कि उनकी गाड़ी कुछ अलग दिखे। इसके लिए वे गाड़ी में कई तरह के मोडिफिकेशन कराते हैं। जैसे बड़े मोटे टायर लगवाना, बम्फर लगवाना, कलर मोडिफिकेशन और शीशों पर काली फिल्म लगवाना।

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    कानूनी तौर पर कार या किसी भी गाड़ी में इस तरह के अधिकतर मोडिफिकेशन गलत हैं और ट्रैफिक पुलिस इसके लिए जुर्माना भी लगा सकती है।

    शीशों पर ब्लैक फिल्म लगी गाड़ियां दुर्घटनाओं का बड़ा कारण

    दूसरा पहलू यह भी है कि तेज धूप से बचने व कार को नया रुपरंग देने के लिए लोग शीशे पर काली फिल्म चढ़ा देते हैं। कार के शीशे ब्लैक करने को काफी लोग स्वैग मानते हैं। इसलिए वह शीशों पर ब्लैक फिल्म चढ़ा लेते हैं । लेकिन ऐसा करना गैर-कानूनी भी है। इसके अलावा चार पहिया वाहनों से होने वाली अधिकांश दुर्घटनाएं गाड़ी के शीशों पर ब्लैक फिल्म लगे होने के कारण होती हैं।

    अपराध को अंजाम देने के लिए अपराधी ऐसी ही गाड़ियों का करते हैं इस्तेमाल

    शीशों पर ब्लैक फिल्म लगवाना बेहद खतरनाक इसलिए है क्योंकि इसी तरीके की शीशों पर ब्लैक फिल्म लगी गाड़ियों का इस्तेमाल अपराधी अपराध की घटना को अंजाम देने के लिए प्रयोग करते हैं। अपराधियों के लिए शीशों पर ब्लैक फिल्म लगी गाड़ियों का इस्तेमाल करना इसलिये मददगार होता है क्योंकि ब्लैक फिल्म लगी होने के कारण गाड़ी के अंदर बैठे लोगों की पहचान कर पाना बेहद मुश्किल होता है।

    क्या कहते हैं ट्रैफिक के नियम

    यातायात नियमों के अनुसार, कार के शीशों पर जीरो विजिबिलिटी वाली ब्लैक फिल्म लगवाने पर चालान तक कट जाता है। यह यातायात नियमों के उल्लंघन के दायरे में आता है। लेकिन अगर इसके बाद भी आप कार के शीशे ब्लैक कराना चाहते हैं, तो उसके लिए भी नियम है। नियमों का पालन करते हुए शीशे ब्लैक किए जा सकते हैं।

    सुप्रीम कोर्ट ने शीशों की विजिबिलिटी को लेकर सुनाया था फैसला

    दरअसल, नियम यह कहता है कि कार के शीशों को पूरी तरह से ब्लैक नहीं करना है। हालांकि, कुछ हद तक इन्हें ब्लैक किया जा सकता है। सुप्रीम कोर्ट ने मई 2012 में कारों के टिंटेड ग्लास को लेकर निर्णय सुनाया था।

    कोर्ट के निर्णय के अनुसार कारों के आगे और पीछे के शीशे की विजिबिलिटी कम से कम 70 प्रतिशत होनी चाहिए। वहीं साइड ग्लास की विजिबिलिटी कम से कम 50 प्रतिशत होनी चाहिए। अगर ऐसा नहीं होता है तो यातायात पुलिस चालान काट सकती है।