Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck

    रांची में नालियों के बीच से गुजर रही पेयजल पाइपलाइन, पानी पीने से गंभीर बीमारियों का खतरा

    Updated: Mon, 05 Jan 2026 04:20 PM (IST)

    रांची में दूषित पेयजल की गंभीर समस्या है, जहाँ 60 साल पुरानी पाइपलाइनें नालियों से गुजरती हैं। इंदौर त्रासदी के बावजूद, यहाँ स्थिति बदतर हो रही है। रि ...और पढ़ें

    News Article Hero Image

    जागरण संवाददाता, रांची। इंदौर में दूषित पानी पीने से बच्चों की मौत की घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस दर्दनाक घटना ने शहरी जलापूर्ति व्यवस्था और पेयजल की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लेकिन अफसोस की बात यह है कि इस घटना से सबक लेने के बजाय रांची में हालात लगातार बद से बदतर होते जा रहे हैं।

    यहां घरों तक पहुंचने वाला पानी कई जगहों पर नालियों, जर्जर सड़कों और गंदे इलाकों से होकर गुजरता है। बावजूद इसके, जिम्मेदार विभाग आंख मूंदे बैठे हैं। रांची में पेयजल पाइपलाइन का एक बड़ा हिस्सा खुले नालों के बीच से गुजर रहा है।

    कई इलाकों में सीपेज के कारण नाली का गंदा पानी पाइपलाइन में मिल रहा है। नगर निगम और पेयजल एवं स्वच्छता विभाग की रिपोर्ट में भी यह बात सामने आ चुकी है कि कई जगहों पर सप्लाई किया जा रहा पानी पीने योग्य नहीं है। इसके बावजूद न तो स्थायी समाधान निकाला जा रहा है और न ही नियमित निगरानी की जा रही है।

    60 साल पुरानी पाइपलाइन, खत्म हो चुकी लाइफलाइन

    रांची शहर में शहरी जलापूर्ति व्यवस्था की शुरुआत वर्ष 1960-65 के आसपास हुई थी। उस समय बिछाई गई पाइपलाइन आज भी उपयोग में लाई जा रही है। इंजीनियरों के अनुसार किसी भी जलापूर्ति प्लांट और पाइपलाइन की औसत लाइफलाइन लगभग 50 वर्ष होती है। रांची का शहरी जलापूर्ति सिस्टम इस अवधि को बहुत पहले पार कर चुका है।

    हटिया और गोंदा डैम में बने जलापूर्ति प्लांट भी अपनी निर्धारित आयु पूरी कर चुके हैं। पुरानी व्यवस्था के कारण फिल्टर बेड खराब होने, मोटर जलने और बार-बार तकनीकी खराबियों की शिकायतें सामने आती रहती हैं।

    इसका सीधा असर पानी की गुणवत्ता और आपूर्ति पर पड़ता है। विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी पुरानी पाइपलाइन में जंग, दरार और लीकेज आम बात हो गई है, जिससे दूषित तत्व आसानी से पानी में मिल जाते हैं।

    बढ़ती आबादी, घटती व्यवस्था

    रांची की शहरी जलापूर्ति पर लगभग 8 लाख की आबादी निर्भर है। जब यह सिस्टम बनाया गया था, तब शहर की आबादी सीमित थी। लेकिन राजधानी बनने के बाद रांची की आबादी तेजी से बढ़ी और आज यह लगभग 22 लाख के आसपास पहुंच चुकी है। नए मोहल्ले और टोलों में पाइपलाइन तो बिछा दी गई, लेकिन वहां नियमित और स्वच्छ पानी की आपूर्ति नहीं हो पा रही है।

    आजादी कालोनी, पहाड़ी मंदिर, मधुकम, कोकर, नामकुम, चुटिया, डोरंडा, हरमू, हिनू, रातू रोड, पिस्का मोड़, पंडरा, धुर्वा, सिंह मोड़, कड़रू समेत शहर के अधिकांश इलाकों में पाइपलाइन गंदे नालों के बीच से गुजरती है। सीपेज के कारण पानी में गंदगी, बैक्टीरिया और सीवेज मिल जाने का खतरा हमेशा बना रहता है।

    जमीनी हकीकत, नालियों के ऊपर से गुजरती पाइपलाइन

    रांची की कई मुख्य और सहायक सड़कों पर नालियों के ऊपर से पानी की पाइपलाइन गुजरती है। यह शहर के लिए एक आम दृश्य बन चुका है। बहुबाजार संत पाल स्कूल गेट, कोकर डान बास्को स्कूल गेट, बरियातू चेशायर होम रोड, डोरंडा कुसई कालोनी जैसे इलाकों में सालों से खुले ड्रेनेज देखने को मिलते हैं। कई जगहों पर वाल्व खुले रहते हैं, जिससे नाली का गंदा पानी पाइपलाइन में प्रवेश कर जाता है।

    कोकर के मदन ढाबा के पास पिछले दस वर्षों से पाइपलाइन नाली के बीच से होकर गुजर रही है। स्थानीय लोग बताते हैं कि वे इस पानी का इस्तेमाल पीने के लिए नहीं करते। लोग सप्लाई के पानी का उपयोग केवल घरेलू कामों में करते हैं और पीने के लिए बोतलबंद पानी पर निर्भर हैं।

    बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं पर सबसे बड़ा खतरा

    विशेषज्ञों के अनुसार यदि यह दूषित पानी पी लिया जाए तो इसका सबसे ज्यादा असर बच्चों, बुजुर्गों और गर्भवती महिलाओं पर पड़ता है। डायरिया, टाइफाइड, हेपेटाइटिस और अन्य जलजनित बीमारियों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। इंदौर की घटना ने यह साबित कर दिया है कि दूषित पानी कितनी बड़ी त्रासदी का कारण बन सकता है।

    नगर निगम व पेयजल एवं स्वच्छता विभाग लापरवाही के जिम्मेवार

    रांची नगर निगम और पेयजल एवं स्वच्छता विभाग के बीच तालमेल की भारी कमी है। पाइपलाइन पेट्रोलिंग के लिए कर्मचारी तो मौजूद हैं, लेकिन वे केवल शिकायतें दर्ज करने तक सीमित रह जाते हैं। समय पर मरम्मत और स्थायी समाधान नहीं हो पाता।

    राइजिंग पाइपलाइन की मरम्मत के लिए कंट्रोल रूम बनाया गया है, लेकिन स्थानीय लोगों का कहना है कि वहां फोन करने पर अक्सर कोई जवाब नहीं मिलता। विभाग दावा करता है कि कंट्रोल रूम 24 घंटे, सातों दिन सक्रिय रहता है, लेकिन हकीकत इसके बिल्कुल उलट है।

    इंदौर से सबक लेने की जरूरत

    इंदौर की घटना एक चेतावनी है। अगर समय रहते रांची की जलापूर्ति व्यवस्था में सुधार नहीं किया गया, तो यहां भी किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता। पुरानी पाइपलाइन बदलना, नालियों से गुजर रही लाइनों को हटाना, नियमित जलमीनार सफाई और सख्त निगरानी अब वक्त की मांग है। वरना रांची के बच्चे भी एक ऐसी व्यवस्था की कीमत अपनी सेहत से चुकाने को मजबूर होंगे।

    इंदौर में दूषित पानी से बीमारियां, 14-15 मौतों की पुष्टि

    मध्य प्रदेश के इंदौर शहर के भागीरथपुरा इलाके में नर्मदा नदी की पाइपलाइन में ड्रेनेज का पानी मिल जाने से सप्लाई का पानी दूषित हो गया, जिससे गंभीर स्थिति पैदा हो गई है। अब तक 14 लोगों की मौत हुई है, जबकि राज्य सरकार के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने 15 से 16 मौतों की पुष्टि की है।

    करीब 1400 से 1500 लोग प्रभावित हुए, जिनमें ढाई सौ लोग अस्पताल में भर्ती हैं। राज्य सरकार ने मामले की जांच के लिए समिति गठित की है, लेकिन दस दिन बाद भी इलाके में साफ पेयजल की नियमित आपूर्ति नहीं हो सकी है।

    रोज होती है पानी की जांच

    पेयजल विभाग और स्वछता विभाग का कहना है कि रुक्का से सप्लाई होने वाली पानी की जांच प्रतिदिन होती है। पानी की जांच दो जगहों पर होती है। संप से टावर तक पहुंचने के बाद कोई जांच नहीं होती है। शिकायत मिलने के बाद ही सर्विस पाइप लाइन की जांच कर मरम्मत की जाती है। शहर में 22 जल मिनार है जहां से शहर में पानी सप्लाई की जाती है।

    शिकायत कहां और कैसे करें

    पानी से संबंधित शिकायत करने के लिए पेयजल विभगा में 8863016796 नंबर पर फोन करें। नगर निगम में शिकायत करने के लिए 9934051832 पर करें।

    गंदा पानी मिले तो क्या करें

    • पानी को उबाल कर पानी का सेवन करें
    • वाटर फिल्टर से पानी का सेवन करें
    • पानी को छान कर रखें

    क्या कहते है अधिकारी

    शहर में शहरी जलापूर्ति की लाइफ लाइन खत्म हो चुकी है। अब मरम्मत करके काम चलाया जा रहा है। बार-बार वाहनों के प्रेशर से पाइपलाइन लीकेज की समस्या आती है। हालांकि प्लांट से पीने लाकक पानी सप्लाई होती है, जिसे आसानी से पीने में उपयोग किया जा सकता है। लेकिन घरों पहुंचने तक कई जगहों पर कंस्ट्रक्शन के कारण पाइपलाइन में पानी के साथ मिट्टी के कण पहुंच रहे है।

    -- चंद्रशेखर कुमार, कार्यपालक अभियंता, पेयजल एवं स्वच्छता विभाग, रांची, शहरी