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    नए साल के पहले हफ्ते में झारखंड में हो सकती है बड़ी सियासी उथल-पुथल, विधायक के इस्तीफे के बाद 5 जनवरी का दिन अहम

    By Pradeep singh Edited By: Shashank Shekhar
    Updated: Mon, 01 Jan 2024 08:06 PM (IST)

    झारखंड में नए साल के पहले सप्ताह में बड़ी सियासी उथल-पुथल होने की संभावना है। ऐसे में पांच जनवरी का दिन अहम माना जा रहा है। बता दें कि आज गांडेय विधानसभा सीट से विधायक सरफराज अहमद ने इस्तीफा दे दिया था। ऐसे में कयास लगाया जा रहा है कि इस सीट से सीएम सोरेन अपनी पत्नी को चुनावी मैदान में उतार सकते हैं।

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    नए साल के पहले हफ्ते में झारखंड में हो सकती है बड़ी सियासी उथल-पुथल

    राज्य ब्यूरो, रांची। नववर्ष का पहला दिन झारखंड की राजनीति में उथलपुथल का संकेत दे गया। ईडी के समन के मद्देनजर सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने भितरखाने पुख्ता तैयारी की है। सहयोगी दल कांग्रेस पार्टी और राजद को भी बदलाव की इस संभावित प्रक्रिया में विश्वास में लिया जा रहा है।

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    एक महत्वपूर्ण राजनीतिक घटनाक्रम में गांडेय से झामुमो के विधायक सरफराज अहमद ने इस्तीफा दे दिया। उनका इस्तीफा विधानसभा अध्यक्ष ने स्वीकार कर लिया है।

    कयास लगाया जा रहा है कि इस सीट से मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन विधानसभा का चुनाव लड़ सकती हैं। राज्य में विधानसभा चुनाव होने में अभी एक वर्ष शेष है। बताया जा रहा है कि विपरीत परिस्थिति आने पर हेमंत सोरेन सत्ता अपनी पत्नी कल्पना सोरेन को सौंपने की तैयारी कर रहे हैं। सरफराज अहमद का इस्तीफा भी उसी प्रक्रिया का एक अहम हिस्सा है।

    5 जनवरी तक राज्य में हो सकता है सियासी उलटफेर 

    राजनीतिक गलियारे में यह भी चर्चा है कि पांच जनवरी तक राज्य के राजनीतिक परिदृश्य में काफी बदलाव देखने को मिल सकता है। हालांकि, सत्तारूढ़ झामुमो इस मामले में खुलकर कुछ कहने से बच रहा है। उल्लेखनीय है कि ईडी का शिकंजा मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन पर कसता जा रहा है।

    उन्हें सात समन दिया जा चुका है। ताजा समन में ईडी ने उनसे पूछताछ के लिए जगह, समय और तिथि तय करने को कहा है। जवाब देने की निर्धारित अवधि भी 31 दिसंबर को समाप्त हो चुकी है। ईडी की नोटिस में जिक्र है कि सीएम जानबूझकर जांच की प्रक्रिया को प्रभावित कर रहे हैं।

    गांडेय विधानसभा का राजनीतिक समीकरण अनुकूल

    गांडेय विधानसभा क्षेत्र गिरिडीह जिले के तहत आता है। यहां जीत और हार की बागडोर आदिवासी व मुस्लिम मतदाता के हाथ में है। ऐसे में इस सीट को कल्पना सोरेन के लिए अनुकूल माना जा रहा है। झामुमो का शीर्ष नेतृत्व सीट चयन को लेकर कोई जोखिम नहीं लेना चाहता, क्योंकि पूर्व में सीएम के पद पर रहते हुए शिबू सोरेन तमाड़ विधानसभा सीट से चुनाव हार चुके हैं।

    ऐसे में झामुमो के रणनीतिकारों ने काफी सोच-समझकर गांडेय सीट का चयन किया है। हालांकि वर्ष 2014 में मोदी लहर में यहां भाजपा के जेपी वर्मा ने जीत हासिल की थी। सामान्य तौर पर यह सीट झामुमो और कांग्रेस के कब्जे में रही है। इस त्याग के बदले सरफराज अहमद को राज्यसभा भेजने की चर्चा है।

    उन्हें फरवरी माह में कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य धीरज प्रसाद साहू की खाली हो रही सीट से प्रत्याशी बनाया जा सकता है। हालांकि कांग्रेस की इस सीट पर स्वाभाविक दावेदारी है। ऐसे में कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को विश्वास में लेना होगा।

    राजनीतिक गलियारे में बढ़ी सरगर्मी 

    सरफराज अहमद के इस्तीफे के साथ ही राज्य का राजनीतिक तापमान बढ़ गया है। गोड्डा सांसद निशिकांत दुबे ने कहा है कि गांडेय में विधानसभा का चुनाव नहीं कराया जा सकता है। इस संबंध में उन्होंने मुंबई हाईकोर्ट के काटोल विधानसभा के निर्णय का हवाला दिया है। एक्स पर लिखा- अब गांडेय में चुनाव नहीं हो सकता। काटोल विधानसभा जब महाराष्ट्र में खाली हुआ तब विधानसभा का कार्यकाल एक साल 50 दिन खाली था। राज्यपाल महोदय, यदि कल्पना सोरेन कहीं से विधायक नहीं बन सकती हैं तो मुख्यमंत्री कैसे बनेंगी? झारखंड को कांग्रेस चारागाह बनाने की कोशिश कर रही है।

    विधायक सरयू राय ने जताई ये आशंका 

    उधर, जमशेदपुर पूर्वी के विधायक सरयू राय ने आशंका जताई है कि राज्य में राष्ट्रपति शासन लग सकता है। उन्होंने एक्स (ट्विटर) पर लिखा है- सब ठीक रहा तो गांडेय विधानसभा का उपचुनाव लोकसभा चुनाव के साथ हो सकता है। उसके पहले संभावित गैर-विधायक मुख्यमंत्री को विधानसभा पटल पर बहुमत साबित करना होगा। यह अग्निपरीक्षा सरल नहीं होगी। फिर वैकल्पिक सरकार बनेगी या राष्ट्रपति शासन लगेगा या लोकसभा-विधानसभा के चुनाव साथ होंगे।

    राजनीतिक स्थिति पर नजर- झामुमो

    झामुमो के केंद्रीय महासचिव सह प्रवक्ता विनोद पांडेय ने कहा है कि इस्तीफे की जानकारी पार्टी को है। सरफराज अहमद ने किन परिस्थितियों में इस्तीफा दिया है, वही बेहतर बता पाएंगे। वर्तमान राजनीतिक स्थिति पर पार्टी की नजर है। हम अपनी रणनीति को लेकर आगे बढ़ेंगे।

    पार्टी से नाराजगी जैसी कोई बात नहीं है।

    आज आएंगे कांग्रेस प्रभारी, पार्टी कोटे के मंत्रियों पर भी तलवार

    प्रदेश कांग्रेस के नए प्रभारी गुलाम अहमद मीर दो फरवरी को रांची के दौरे पर आ रहे हैं। मुख्यमंत्री को बदलने की नौबत आई तो कांग्रेस के विधायक पार्टी कोटे के मंत्रियों को बदलने की मांग जोरशोर से उठाएंगे। सारे विधायकों को रांची में जुटने को कहा गया है।

    उल्लेखनीय है कि दल के विधायकों ने समय-समय पर मंत्रियों को बदलने की मांग उठाई है। ऐसे में नाराजगी को देखते हुए नए विधायकों को मौका मिल सकता है।

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