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    झारखंड के 'नशेड़ी चूहे': गांजा चट कर गए, शराब गटक गए; पुलिस और दुकानदारों के अजीब बहाने

    Updated: Sun, 04 Jan 2026 03:09 PM (IST)

    झारखंड में चूहों को गांजा और शराब गायब करने का दोषी ठहराया जा रहा है। रांची में 200 किलो गांजा चूहों द्वारा खाए जाने के दावे के बाद एक आरोपी बरी हो गय ...और पढ़ें

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    घटनाएं पुलिस-उत्पाद विभाग की लापरवाही उजागर करती हैं।

    डिजिटल , रांची। झारखंड में चूहों की 'नशे की लत' अब सुर्खियां बटोर रही है। कभी पुलिस थाने में रखा गांजा चट कर जाते हैं, तो कभी शराब की बोतलों को गटक जाते हैं।

    ये कोई मजाक नहीं, बल्कि असल घटनाएं हैं, जिनमें पुलिस और शराब कारोबारियों ने गायब नशीले पदार्थों का ठीकरा चूहों के सिर फोड़ा है। नतीजा? कोर्ट में आरोपी बरी।

    पूरा मामला सिस्टम पर सवाल खड़ा करता है। बात बढ़ने से अब उच्च अधिकारियों के दबाव पर दोबारा जांच शुरू हुई है। असली कहानी जांच के बाद सामने आएगी।

    रांची: 200 किलो गांजा चूहे खा गए, तस्कर छूट गया

    झारखंड की राजधानी रांची से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है। साल 2022 में ओरमांझी पुलिस ने एक बोलेरो गाड़ी से करीब 200 किलो गांजा (कीमत लगभग 1 करोड़ रुपये) बरामद किया था। आरोपी इंद्रजीत राय उर्फ अनुरजीत राय को गिरफ्तार किया गया, जबकि उसके दो साथी फरार हो गए।

    मामला कोर्ट में चला, लेकिन जब सबूत पेश करने की बारी आई, तो पुलिस ने चौंकाने वाला दावा किया। थाने के मालखाने में रखा गांजा चूहों ने कुतर-कुतर कर खा लिया। पुलिस ने कोर्ट को लिखित रिपोर्ट दी कि अब सबूत के तौर पर गांजा उपलब्ध नहीं है।

    19 दिसंबर 2025 को रांची की स्पेशल NDPS कोर्ट ने पुलिस की इस रिपोर्ट और अन्य खामियों (जैसे गवाहों के बयानों में विरोधाभास, जब्ती प्रक्रिया में लापरवाही) को देखते हुए आरोपी को बरी कर दिया।

    कोर्ट ने कहा कि पुलिस आरोप साबित करने में पूरी तरह नाकाम रही। इस फैसले ने पुलिस की मालखाना सुरक्षा और कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

    धनबाद का शराब घोटाला: चूहों ने 802 बोतलें गटक लीं

    झारखंड के चूहे यहीं नहीं रुके। इसी साल जुलाई में धनबाद के बलियापुर और प्रधानखंता शराब दुकानों में स्टॉक चेकिंग के दौरान 802 बोतलें अंग्रेजी शराब कम पाई गईं। कुछ बोतलें पूरी खाली, कुछ आधी और ढक्कनों में छेद।

    दुकान संचालकों का दावा?

    चूहों ने ढक्कन कुतरकर शराब पी ली। उन्होंने विस्तार से बताया कि चूहे बोतलों के ढक्कन चबाते, फिर पूंछ डालकर शराब भिगोते और चाटते जाते। विभागीय जांच में यह दावा खारिज हो गया, और संचालकों से नुकसान की भरपाई मांगी गई।

    मंत्री ने जांच के आदेश दिए, तो पता चला कि चूहों का कोई दोष नहीं, मानवीय लापरवाही या घपला था। इस मामले को स्थानीय प्रशासन ने दबाने की कोशिश की।

    ध्यान दें धनबाद में पहले भी चूहे 'नशेड़ी' बन चुके हैं। 2024 में पुलिस ने कोर्ट को बताया था कि जब्त 9 किलो गांजा और 10 किलो भांग चूहों ने चट कर दिया।

     क्या कहते हैं ये मामले?

    ये घटनाएं झारखंड पुलिस और उत्पाद विभाग की लापरवाही की पोल खोल रही हैं। मालखाना और गोदामों में सुरक्षा के नाम पर क्या हो रहा है? सबूत गायब होने पर चूहों को बहाना बनाना कितना विश्वसनीय है?

    विशेषज्ञ कहते हैं कि सीसीटीवी, बेहतर स्टोरेज और सख्त ऑडिट की जरूरत है। ऐसे मामले पहले भी देश के अलग-अलग हिस्सों (जैसे उत्तर प्रदेश, बिहार) में सामने आ चुके हैं, जहां चूहों को शराब या गांजा 'खाने-पीने' का दोषी ठहराया गया।

    लेकिन हर बार सवाल वही, क्या सच में चूहे इतने शौकीन हैं, या ये सिस्टम की खामियों को छिपाने का आसान रास्ता? झारखंड के ये गंजेड़ी और शराबी चूहे अब सोशल मीडिया पर मीम्स का विषय बन गए हैं।