Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck

    जल-जंगल-जमीन पर आदिवासियों का कब्जा: हेमंत सरकार ने जारी की पेसा की अधिसूचना

    Updated: Fri, 02 Jan 2026 10:04 PM (IST)

    झारखंड सरकार ने पेसा नियमावली 2025 को अधिसूचित कर दिया है, जिससे राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को जल, जंगल और जमीन पर निर्णायक अधिकार मि ...और पढ़ें

    News Article Hero Image

    तीन प्रमुख संशोधनों के साथ पेसा नियमावली की अधिसूचना जारी।

    राज्य ब्यूरो, रांची। झारखंड सरकार के पंचायती राज विभाग ने ऐतिहासिक पेसा नियमावली को अधिसूचित कर दिया है। विगत 23 दिसंबर को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में आयोजित राज्य कैबिनेट की बैठक में ही पेसा नियमावली पर सहमति बन गई थी, लेकिन दो मंत्रियों की ओर से कुछ बिंदुओं पर असहमति के कारण उस पर सरकार के शीर्ष स्तर पर फिर से विचार किया गया।

    इसमें मंत्रियों की ओर से प्रस्तावित बदलाव को स्वीकार कर लिया गया है और मुख्यमंत्री ने इस पर अपनी सहमति भी दे दी है। मंत्रिमंडल निगरानी एवं संबंध में विभाग ने मुख्यमंत्री की सहमति मिलने के बाद इसे पंचायती राज विभाग को भेज दिया, जहां से इसकी अधिसूचना जारी कर दी गई।

    ग्राम सभाओं के माध्यम से जनता का शासन चलेगा

    अधिसूचना जारी होने के बाद राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं के माध्यम से जनता का शासन चलेगा। “पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) झारखंड नियमावली, 2025” की अधिसूचना जारी होते ही यह नियमावली राज्य के सभी पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में प्रभावी हो गई है। राज्य में ऐसे जिलों की संख्या 13 है और दो जिले ऐसे भी हैं जहां इस नियमावली का आंशिक प्रभाव पड़ेगा। माना जा रहा है कि इस निर्णय के साथ ही राज्य के आदिवासी और जनजातीय समाज को अपने गांव, संसाधन और विकास से जुड़े फैसलों में सीधा और निर्णायक अधिकार मिल गया है। 

    सबसे मजबूत और सर्वोच्च इकाई बनी ग्राम सभा 

    पंचायती राज विभाग की ओर से अधिसूचित नई नियमावली में ग्राम सभा को शासन की सबसे मजबूत और सर्वोच्च इकाई के रूप में स्थापित किया गया है। अब प्रत्येक पारंपरिक ग्राम सभा की बैठक महीने में कम से कम एक बार अनिवार्य रूप से होगी।

    बैठक की अध्यक्षता गांव की परंपरा के अनुसार मांझी, मुंडा, पाहन जैसे पारंपरिक ग्राम प्रधान या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य द्वारा की जाएगी। बैठक के लिए एक-तिहाई उपस्थित अनिवार्य है, जिसमें कम से कम एक-तिहाई महिलाएं होंगी। इससे महिलाओं की भागीदारी और नेतृत्व को भी मजबूती मिलेगी।

    ग्राम सभा की मंजूरी जरूरी, पुलिस का हस्तक्षेप भी नहीं

    पेसा नियमावली 2025 के तहत अब कोई भी सरकारी विभाग या संस्था ग्राम सभा की अनुमति के बिना गांव में किसी विकास योजना को लागू नहीं कर सकेगी। यहां तक की पुलिस को भी कई कार्यों के लिए ग्राम सभा की अनुमति लेनी होगी। इसके अलावा, पुलिस को किसी भी गिरफ्तारी की जानकारी सात दिनों के भीतर ग्राम सभा को देना अनिवार्य किया गया है।

    एमडीटी तैयार करेगी योजनाओं की रूपरेखा

    डीसी के स्तर से गठित मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम (एमडीटी) ग्राम सभा से परामर्श कर वार्षिक विकास योजना तैयार करेगी। ग्राम सभा को इन योजनाओं पर 30 दिनों के भीतर निर्णय लेने का अधिकार होगा।

    यदि तय समय में निर्णय नहीं हुआ, तो योजना को स्वतः स्वीकृत माना जाएगा। खास बात यह है कि ग्राम सभा को योजनाओं में संशोधन, शर्तें जोड़ने या बदलाव करने का भी पूरा अधिकार दिया गया है।

    जल-जंगल-जमीन पर ग्राम सभा अधिकार 

    इस नियमावली का सबसे बड़ा असर क्षेत्र के सामुदायिक संसाधनों के प्रबंधन पर पड़ेगा। जल, जंगल और जमीन जैसे प्राकृतिक संसाधनों की देखरेख और उपयोग का अधिकार अब ग्राम सभा के पास होगा।

    इसके लिए “ग्राम सभा कोष” की स्थापना की जाएगी, जिसमें चार प्रकार के कोष होंगे—अन्न कोष, श्रम कोष, वस्तु कोष और नगद कोष। इन कोषों का संचालन संचालन ग्राम सभा द्वारा चुने गए तीन सदस्यों के हाथों में होगा, जिनमें एक महिला सदस्य का होना अनिवार्य है।

    शांति व्यवस्था और परंपरागत न्याय का अधिकार भी

    पेसा नियमावली 2025 ग्राम सभा को सामाजिक न्याय और शांति व्यवस्था के क्षेत्र में भी सशक्त बनाती है। ग्राम सभा अपने क्षेत्र में परंपरागत रीति-रिवाजों के अनुसार विवादों का निपटारा कर सकेगी।

    भूमि विवाद, पारिवारिक मामले और छोटे-मोटे आपराधिक प्रकरणों की सुनवाई ग्राम सभा कर सकेगी। वह अधिकतम दो हजार रुपये तक का आर्थिक दंड लगा सकती है, हालांकि इसके खिलाफ अपील का प्रविधान भी किया गया है। 

    परंपराओं के खिलाफ नियमों पर आपत्ति का अधिकार

    नियमावली में यह भी स्पष्ट किया गया है कि यदि सरकार द्वारा बनाए गए कोई नियम या निर्णय जनजातीय परंपराओं और रीति-रिवाजों के अनुरूप नहीं हैं, तो ग्राम सभा उनके खिलाफ प्रस्ताव पारित कर सकती है। ऐसे मामलों में राज्य सरकार उच्चस्तरीय समिति का गठन कर विचार करेगी।

    इन संशोधनों के बाद मिली है सहमति

    1. पेसा नियमावली की कंडिका (3) में "ग्राम" को निम्न प्रकार से जोड़ा जाए 

    - पारम्परिक ग्राम, ग्राम सभाओं तथा उनकी सीमाओं की मान्यता और प्रकाशन की जिम्मेदारी उपायुक्त की होगी। इसके लिए उपायुक्त प्रखंड स्तर पर एक टीम का गठन करेंगे।

    2. सामान्यतः प्रत्येक पारम्परिक ग्राम सभा, राजस्व ग्राम के समान होगी। परन्तु पारम्परिक ग्राम के अंतर्गत ग्राम, ग्राम सभा एवं ग्राम की सीमाएं भिन्न हो सकती हैं। अत.. उपायुक्त द्वारा गठित टीम पारम्परिक ग्राम सभा के प्रधान और सदस्यों के साथ मिलकर पारंपरिक ग्राम सभा की सीमाओं की पहचान करेगी और उनका अभिलेखन करेगी। यह टीम पारंपरिक ग्राम सभा क्षेत्रों की सीमाओं की अधिसूचना हेतु प्रस्ताव तैयार करेगी, जिसमें निम्नलिखित शामिल होंगेः

    3. पेसा नियमावली की कंडिका (23) (vii) (ग) में ग्राम दंड की राशि अधिकतम रुपये 2000/- निर्धारित की जाए एवं निम्न प्रकार से परिभाषित की जाए-

    - ग्राम समा आर्थिक दंड अधिकतम रु० 2,000/- तक का निर्धारण, आर्थिक नुकसान एवं व्यक्ति की क्षमता को देख कर सकेगी, जिसे ग्राम सभा के कोष में जमा करना अनिवार्य होगा। ग्राम सभा दंडित व्यक्ति के अपीलीय अधिकार का पालन करेगी।

    राज्य के अनुसूचित क्षेत्रों में ग्राम सभाओं को सशक्त किया गया है, महिलाओं को निर्णय लेने का अधिकार मिला है और स्वशासन की परिकल्पना पूर्ण हुई है।

    -दीपिका पांडेय सिंह, मंत्री, पंचायती राज विभाग