Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck

    Jharkhand जल्द नियुक्त होंगे लोकायुक्त, हाई कोर्ट से सरकार ने मांगा 4 सप्ताह का समय

    By Manoj Singh Edited By: Kanchan Singh
    Updated: Mon, 05 Jan 2026 07:26 PM (IST)

    झारखंड हाई कोर्ट ने लोकायुक्त सहित अन्य आयोगों में रिक्त पदों पर नियुक्ति मामले में राज्य सरकार को चार सप्ताह का समय दिया है। महाधिवक्ता ने अदालत को ब ...और पढ़ें

    News Article Hero Image

    महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि लोकायुक्त की नियुक्ति को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं।

    राज्य ब्यूरो, रांची। हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस तरलोक सिंह चौहान और राजेश शंकर की खंडपीठ की अदालत में मुख्य सूचना आयुक्त, लोकायुक्त सहित अन्य आयोगों में लंबे समय से रिक्त पदों पर नियुक्ति की मांग को लेकर दायर जनहित याचिका पर सोमवार को सुनवाई हुई।

    सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से महाधिवक्ता ने अदालत को बताया कि लोकायुक्त की नियुक्ति को लेकर सभी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। नियुक्ति प्रक्रिया के लिए समिति के गठन संबंधी प्रस्ताव मुख्यमंत्री के पास भेजा गया है, जो फिलहाल लंबित है।

    सीएम से स्वीकृति मिलते ही कर दी जाएगी नियुक्ति

    वहां से स्वीकृति मिलते ही लोकायुक्त की नियुक्ति कर दी जाएगी। महाधिवक्ता ने अदालत से चार सप्ताह का समय मांगा और आश्वासन दिया कि इस अवधि के भीतर नियुक्ति प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी।

    कोर्ट ने महाधिवक्ता के बयान को रिकार्ड पर लेते हुए उन्हें चार सप्ताह का समय प्रदान किया और मामले की अगली सुनवाई के लिए दो फरवरी की तिथि निर्धारित की। साथ ही अदालत ने निर्देश दिया कि इस अवधि में लोकायुक्त की नियुक्ति कर कोर्ट को इसकी जानकारी दी जाए।

    रिश्वत मामले में डीएसपी के रीडर को मिली जमानत

    झारखंड हाई कोर्ट के जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत में सोमवार को रिश्वत लेने के आरोपित रीडर सुनील कुमार पासवान की जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद अदालत ने याचिकाकर्ता की जमानत याचिका स्वीकार कर ली।

    याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अनिल सिंह महाराणा बहस की। बताया कि अदालत ने 10-10 हजार रुपये के दो निजी मुचलके पर जमानत की सुविधा प्रदान की है। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो(एसीबी) ने डीएसपी कार्यालय में तैनात रीडर सुनील कुमार पासवान 25 हजार रुपये रिश्वत लेते 16 अक्तूबर को गिरफ्तार किया था।

    यह गिरफ्तारी एक फारेस्ट गार्ड जितेंद्र कुमार का नाम प्राथमिकी से हटाने या मामले को कमजोर करने के एवज में ली जा रही थी। याचिकाकर्ता गिरफ्तारी के 81 दिनों बाद जेल से बाहर आएगा।