संक्रमित कचरे पर झारखंड HC सख्त: 30 दिन में नोडल अफसर, बायो-मेडिकल वेस्ट की बारकोडिंग और डिजिटल ट्रैकिंग अब अनिवार्य
झारखंड हाई कोर्ट ने बायो मेडिकल वेस्ट के उचित निस्तारण के लिए महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अदालत ने राज्य ...और पढ़ें

बायो मेडिकल वेस्ट निस्तारण पर ह्यूमन राइट्स काॅन्फ्रेंस की ओर से दाखिल की गई थी जनहित याचिका।
HighLights
राज्य सरकार 30 दिन में नोडल अधिकारी नियुक्त करे।
बायो मेडिकल वेस्ट निस्तारण के लिए हाई कोर्ट ने दिया दिशा निर्देश।
30 से अधिक बेड वाले अस्पतालों में कमेटी अनिवार्य।
राज्य ब्यूरो, रांची। राज्य में बायो-मेडिकल कचरे के निस्तारण पर सख्त रुख अपनाते हुए Jharkhand High Court ने सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया है कि कचरे के उत्पादन से अंतिम निपटान तक बार कोडिंग और डिजिटल ट्रैकिंग सिस्टम लागू किया जाए।
अदालत ने कहा कि संक्रमित कचरा हवा, पानी और मिट्टी को प्रदूषित कर आमजन के जीवन पर सीधा खतरा पैदा करता है। मुख्य न्यायाधीश एमएस सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की खंडपीठ ने जनहित याचिका का निपटारा करते हुए कहा कि अब राज्य में Bio-Medical Waste Management Rules, 2016 लागू हैं, जो कचरे के हर चरण में जवाबदेही तय करते हैं।
इसलिए प्राथमिक जिम्मेदारी संबंधित प्राधिकरणों की है।
कोर्ट के प्रमुख निर्देश
- 30 दिनों में सचिव स्तर के अधिकारी को स्टेट नोडल ऑफिसर नियुक्त किया जाए
- सभी अस्पतालों और अधिकृत ट्रीटमेंट सुविधाओं की जिलावार सूची तैयार हो
- हर अस्पताल के पास वैध प्राधिकरण और अधिकृत ट्रीटमेंट सुविधा से जुड़ाव अनिवार्य
- बायो-मेडिकल कचरे की बार कोडिंग और डिजिटल ट्रैकिंग व्यवस्था लागू की जाए
- 60 दिनों में जिला स्तरीय निगरानी समितियां सक्रिय हों
- नियम तोड़ने पर पर्यावरण संरक्षण कानून के तहत जुर्माना या अभियोजन
- 30 से अधिक बेड वाले अस्पतालों में बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट कमेटी अनिवार्य
पहले क्या थी स्थिति?
सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याद दिलाया कि 2012 में जब मामला शुरू हुआ था, तब रांची, धनबाद और जमशेदपुर में हालात चिंताजनक थे। संक्रमित सुइयां और मेडिकल कचरा खुले में सड़कों और नालियों में पड़ा मिलता था।
लगातार न्यायिक निगरानी के बाद अब रामगढ़, लोहरदगा, धनबाद, पाकुड़ और देवघर में कॉमन बायो-मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट फैसिलिटी संचालित हो रही हैं, जबकि गिरिडीह में नई यूनिट निर्माणाधीन है। कोर्ट ने इसे सकारात्मक प्रगति माना।
क्यों जरूरी हुई सख्ती?
यह जनहित याचिका Jharkhand Human Rights Conference की ओर से दायर की गई थी। याचिका में आरोप लगाया गया था कि अस्पतालों से निकलने वाला संक्रमित और खतरनाक कचरा खुले में फेंका जा रहा है, जिससे आमजन के स्वास्थ्य और पर्यावरण को गंभीर खतरा है।
खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि स्वच्छ हवा, पानी और प्रदूषण मुक्त पर्यावरण का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन के अधिकार का हिस्सा है।
अब हर मेडिकल कचरे की थैली पर बारकोड होगा, हर मूवमेंट डिजिटल सिस्टम में दर्ज होगी और जिम्मेदारी तय होगी। यानी अगर कहीं भी लापरवाही हुई, तो दोषी को चिन्हित करना आसान होगा।
यह भी पढ़ें- सेवानिवृत मानी जाएंगी झारखंड डीजीपी तदाशा मिश्रा, यूपीएससी ने भेजा सरकार को पत्र; नियुक्ति पर बड़ा टकराव
यह भी पढ़ें- CUJ में पूर्व वीसी पर गंभीर आरोप, CBI जांच में 5.5 करोड़ का फर्नीचर घोटाला और नियुक्ति फर्जीवाड़ा उजागर
यह भी पढ़ें- प्रिंस खान को आतंकवादी घोषित करने के लिए धनबाद पुलिस ने की अनुशंसा, दुबई के बाद पाकिस्तान से चला रहा गैंग
यह भी पढ़ें- झारखंड निकाय चुनाव मतगणना: हजारीबाग में सबसे पहले, धनबाद में सबसे बाद आएंगे नतीजे
