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CUJ में पूर्व वीसी पर गंभीर आरोप, CBI जांच में 5.5 करोड़ का फर्नीचर घोटाला और नियुक्ति फर्जीवाड़ा उजागर

Published: Fri, 27 Feb 2026 12:10 PM (IST)

केंद्रीय विश्वविद्यालय झारखंड (सीयूजे) में सीबीआई की तीन दिवसीय छापेमारी समाप्त हो गई है। सीबीआई ने 2009-2014 के दौरान तत्कालीन ...और पढ़ें

केंद्रीय विश्वविद्यालय में सीबीआई की छापेमारी पूरी, 100 से अधिक फाइलें जब्त।

केंद्रीय विश्वविद्यालय में सीबीआई की छापेमारी पूरी, 100 से अधिक फाइलें जब्त।

HighLights

  1. सीबीआई ने सीयूजे कांके कैंपस में तीन दिवसीय छापेमारी पूरी की।

  2. नियुक्तियों में फर्जीवाड़ा और अयोग्य अभ्यर्थियों की नियुक्ति।

राज्य ब्यूरो, रांची। कांके के मनातू स्थित केंद्रीय विश्वविद्यालय (सीयूजे) में मंगलवार से चल रही सीबीआई की भ्रष्टाचार निरोधक शाखा की छापेमारी तीसरे दिन यानी गुरुवार को समाप्त हो गई। सीबीआई की टीम वर्ष 2009 से 2014 के बीच सीयूजे में हुई अनियमितता मामले की जांच करने गई थी।

अब तक की छापेमारी में सीबीआई ने पाया है कि सीयूजे के तत्कालीन कुलपति ने अपने विशेषाधिकार का गलत व विवेकहीन प्रयोग किया। उन्होंने विश्वविद्यालय की लैब सामग्री, फर्नीचर खरीददारी में भी गलत किया और विश्वविद्यालय में हुई नियुक्तियों में भी गड़बड़ी की।

सीबीआई ने तीन दिनों की छापेमारी के दौरान सभी योजनाओं से संबंधित 100 से अधिक फाइलें जब्त की है। इन फाइलों में विश्वविद्यालय के उन निम्न गुणवत्ता वाले फर्नीचर की खरीद से संबंधित फाइलें भी हैं, जिन्हें निर्धारित कीमत से कई गुना अधिक कीमत पर खरीदी गईं।

करीब साढ़े पांच करोड़ रुपये के फर्नीचर की खरीददारी में अनियमितता का मामला सामने आया है, जिससे संबंधित जब्त फाइलों की अब सीबीआइ जांच करेगी। इस साढ़े पांच करोड़ रुपये के फर्नीचर का ठेका मेसर्स डूरियन इंडस्ट्रीज को दिया गया था।

सेंट्रल यूनिवर्सिटी में विभिन्न सामग्री की खरीदारी के लिए जिस टेंडर प्रक्रिया को अपनाया गया था, उसमें भी गड़बड़ी की गई है। बिना ठोस कारणों के टेंडर को रद कर फिर से निविदा जारी कर सामग्री की खरीद में अनियमितता बरती गई।

सीबीआई ने छानबीन में पाया कि विश्वविद्यालय में सह प्राध्यापक, सुरक्षा अधिकारी आदि के पदों पर नियुक्तियों में तत्कालीन वीसी ने अपने विशेषाधिकार का दुरुपयोग किया।

अयोग्य अभ्यर्थियों को योग्य करार दिया गया। जाली दस्तावेज के आधार पर भी नियुक्ति की गई। इन सभी बिंदुओं से संबंधित दस्तावेज सीबीआइ को मिले हैं, जिसका सत्यापन होगा।

बता दें कि 2009 में स्थापित झारखंड केंद्रीय विश्वविद्यालय (CUJ), रांची के पहले कुलपति डॉ. डारलैंडो टी. खथिंग थे। वह पूर्वोत्तर (North East) के पहले व्यक्ति थे,जिन्हें पूर्वोत्तर के बाहर किसी केंद्रीय विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया गया था।

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