Jharkhand: टीएसी नियमावली पर सरकार ने राजभवन को नहीं दिया जवाब, अब एक बार फिर रिमाइंडर भेजने की तैयारी
Jharkhand News राज्य सरकार ने जनजातीय परामर्शदातृ परिषद (टीएसी) की नियमावली और उसके गठन पर राजभवन की आपत्ति का जवाब अभी तक नहीं दिया है। इसे लेकर राजभवन शीघ्र ही राज्य सरकार को एक बार फिर रिमाइंडर भेजने की तैयारी कर रहा है।

रांची, राज्य ब्यूरो: राज्य सरकार ने जनजातीय परामर्शदातृ परिषद (टीएसी) की नियमावली और उसके गठन पर राजभवन की आपत्ति का जवाब अभी तक नहीं दिया है।
राजभवन द्वारा इसे लेकर दो बार कल्याण विभाग को रिमाइंडर भेजा गया, लेकिन जवाब नहीं मिला। अब वर्तमान राज्यपाल सीपी राधाकृष्णन इस मामले को देख रहे हैं। बताया जाता है कि राजभवन शीघ्र ही राज्य सरकार को एक बार फिर रिमाइंडर भेजने की तैयारी कर रहा है।
दो तत्कालीन राज्यपाल भी जता चुके आपत्ति
टीएसी की नई नियमावली के गठन पर तत्कालीन राज्यपाल द्रौपदी मुर्मु तथा रमेश बैस दोनों आपत्ति जता चुके हैं।तत्कालीन राज्यपाल रमेश बैस ने दो बार जवाब मांगे जाने के बाद भी नहीं मिलने पर इसी साल पांच जनवरी को कल्याण विभाग के पदाधिकारियों को राजभवन तलब किया था।
इसमें जब उन्होंने टीएसी के गठन को अवैध बताते हुए उसकी हो रही बैठकों पर सवाल उठाया तो पदाधिकारी इसका कोई जवाब नहीं दे सके। इससे पहले उन्होंने टीएसी की नियमावली में पुनर्गठन संबंधी प्रस्ताव को असंवैधानिक बताते हुए वापस कर दिया था।
उनके अनुसार, पूर्व में टीएसी में दो सदस्यों को राजभवन द्वारा नामित किए जाने का प्राविधान था, जिसे इस इस नियमावली के तहत समाप्त कर दिया गया।
विभाग ने अबतक नहीं दिया कोई जवाब
राजभवन द्वारा इस संबंध में पत्र प्रेषित किया गया, लेकिन उसका जवाब भी नहीं मिला। तत्कालीन राज्यपाल ने टीएसी की हो रही बैठकों की औचित्य और कार्यवाही की वैधानिकता पर भी सवाल उठाया था।
उन्होंने अधिकारियों को टीएसी को लेकर राजभवन के पत्र का जवाब अतिशीघ्र उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए, लेकिन विभाग ने अभी तक कोई जवाब नहीं दिया।
तत्कालीन राज्यपाल द्रौपदी मुर्मु ने भी नियमावली गठन की फाइल राजभवन मंगाई थी, लेकिन इस बीच नए राज्यपाल के रूप में रमेश बैस की नियुक्ति होने पर वे उसपर कोई निर्णय नहीं ले सकी थीं। उन्होंने कहा था कि उसपर अब नए राज्यपाल ही निर्णय लेंगे।
इससे पहले, उन्होंने पुरानी नियमावली के तहत पूर्व टीएसी के गठन के प्रस्ताव को वापस लौटा दिया था, क्योंकि उसमें दो सदस्यों का मनोनयन राजभवन द्वारा नहीं किया गया था। बाद में नियमावली में ही इस प्राविधान को हटा दिया गया।

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