Jharkhand नेतराहाट और पतरातू में बनेगा ग्लास ब्रिज, आइआइटी कानपुर से होगी शीशे की गुणवत्ता की जांच
झारखंड सरकार ने नेतरहाट और पतरातू घाटी में ग्लास ब्रिज बनाने की महत्वाकांक्षी योजना पर काम तेज कर दिया है। नेतरहाट के मैग्नोलिया और कोयल व्यू प्वाइंट ...और पढ़ें

नेतरहाट और पतरातू घाटी में ग्लास ब्रिज निर्माण की महत्वाकांक्षी योजना पर काम तेज कर गया है।
शक्ति सिंह, रांची। झारखंड में पर्यटन को नई ऊंचाई देने के लिए राज्य सरकार ने नेतरहाट और पतरातू घाटी में ग्लास ब्रिज निर्माण की महत्वाकांक्षी योजना पर काम तेज कर गया है। पर्यटन विभाग की ओर से नेतरहाट के मैग्नोलिया प्वाइंट और कोयल व्यू प्वाइंट पर दो ग्लास ब्रिज, जबकि पतरातू घाटी में एक ग्लास ब्रिज बनाने का प्रस्ताव है।
इन परियोजनाओं के पूरा होने से राज्य के प्रमुख पर्यटन स्थलों को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान मिलने की उम्मीद है। ग्लास ब्रिज में उपयोग होने वाले कांच की मजबूती और सुरक्षा को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है।
कांच की तकनीकी गुणवत्ता, टिकाऊपन और भार सहन क्षमता की जांच के लिए प्रस्ताव आइआइटी कानपुर भेजा गया है। विशेषज्ञ संस्थान द्वारा परीक्षण के बाद ही अंतिम सामग्री का चयन किया जाएगा, ताकि पर्यटकों की सुरक्षा से किसी भी तरह का समझौता न हो और ब्रिज लंबे समय तक सुरक्षित रहें।
तीन अलग-अलग डिजाइन में होंगे ग्लास ब्रिज
परियोजना के तहत बनने वाले तीनों ग्लास ब्रिज को अलग-अलग डिजाइन में तैयार किया जाएगा। प्रस्ताव के अनुसार एक ब्रिज को गोल (राउंड शेप) डिजाइन में बनाया जाएगा, दूसरा ब्रिज लंबा और सीधा होगा।
जबकि तीसरा ब्रिज दो हथैली के स्वरूप में निर्मित किया जाएगा। यह अनूठा और आकर्षक डिजाइन पर्यटकों के लिए रोमांच का नया अनुभव प्रदान करेगा और झारखंड को एडवेंचर टूरिज्म के नक्शे पर मजबूती से स्थापित करेगा।
22 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत
तीनों ग्लास ब्रिज परियोजनाओं पर लगभग 22 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है। परियोजना से संबंधित डीपीआर सड़क निर्माण विभाग को भेजी जा चुकी है। विभाग से तकनीकी अनुमति मिलते ही योजना को स्वीकृति दी जाएगी। सरकार की मंशा है कि स्वीकृति मिलते ही इसी वित्तीय वर्ष में निर्माण कार्य शुरू कर दिया जाए।
राजगीर माडल पर होगा निर्माण
ग्लास ब्रिज का निर्माण बिहार के राजगीर में बने ग्लास ब्रिज की तर्ज पर किया जाएगा। राजगीर में बने ग्लास ब्रिज को पर्यटकों से काफी अच्छी प्रतिक्रिया मिली है। उसी अनुभव को ध्यान में रखते हुए झारखंड में भी इसी तरह का सुरक्षित और आकर्षक माडल अपनाया जा रहा है। इससे पर्यटकों को रोमांचक स्काई वॉक का अनुभव मिलेगा और राज्य के पर्यटन राजस्व में बढ़ोतरी होगी।
नेतरहाट में पर्यटन सुविधाओं का विस्तार
‘छोटानागपुर की रानी’ के नाम से मशहूर नेतरहाट पहले से ही अपने प्राकृतिक सौंदर्य, सनराइज और सनसेट के लिए प्रसिद्ध है। यहां कोयल व्यू प्वाइंट को सनराइज प्वाइंट के रूप में विकसित किया जा रहा है, जहां पार्क का निर्माण किया गया है और सनराइज वॉच टावर भी तैयार किया गया है। ग्लास ब्रिज बनने के बाद नेतरहाट में पर्यटकों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि होने की संभावना है।
पतरातू घाटी को मिलेगा नया पहचान
पतरातू घाटी पहले से ही अपनी घुमावदार सड़कों, झील और पहाड़ियों के लिए जानी जाती है। यहां ग्लास ब्रिज बनने से पर्यटक कांच के ऊपर से घाटी और प्राकृतिक दृश्यों का रोमांचक नजारा देख सकेंगे। इससे पतरातू घाटी एडवेंचर और नेचर टूरिज्म का प्रमुख केंद्र बन सकती है। पर्यटक इसे सेल्फी प्वाइंट के रूप में देखते हैं।
पर्यटन से बढ़ेगा स्थानीय रोजगार
ग्लास ब्रिज परियोजनाओं के पूरा होने से न केवल पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे। होटल, गाइड, परिवहन और अन्य पर्यटन सेवाओं से जुड़े लोगों को इसका सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है। सरकार का मानना है कि यह परियोजना झारखंड को राष्ट्रीय पर्यटन मानचित्र पर मजबूत स्थान दिलाने में अहम भूमिका निभाएगी।
नेतरहाट और पतरातू में ग्लास ब्रिज बनाने की योजना है। आइआइटी कानपुर शीशे की गुणवत्ता और सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखते हुए इसकी जांच करेगी। सब कुछ ठीक रहा तो आगामी वित्तीय वर्ष में काम शुरू हो जाएगा।
-मनोज कुमार, सचिव
पर्यटन विभाग

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