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    झारखंड के लाल का कमाल, कर्नाटक में 1464 करोड़ के बड़े फर्जीवाड़े का किया खुलासा

    Updated: Mon, 05 Jan 2026 04:02 PM (IST)

    झारखंड के लाल, आईएएस कनिष्क ने कर्नाटक में ₹1464 करोड़ के अंतरराज्यीय फर्जी बिलिंग रैकेट का पर्दाफाश किया है। उनकी निगरानी में वाणिज्यिक कर विभाग ने उ ...और पढ़ें

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    आईएएस कनिष्क। (फाइल फोटो)

    प्रदीप सिंह, रांची। झारखंड के लिए यह गर्व का विषय है कि प्रदेश के लाल कर्नाटक कैडर के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी कनिष्क ने कर्नाटक में एक बड़े आर्थिक फर्जीवाड़े का पर्दाफाश कर अपनी कार्यकुशलता और ईमानदारी की मजबूत मिसाल पेश की है।

    उनकी निगरानी और नेतृत्व में कर्नाटक वाणिज्यिक कर विभाग के प्रवर्तन विंग (दक्षिण क्षेत्र) ने करीब 1464 करोड़ रुपये के अंतरराज्यीय फर्जी बिलिंग रैकेट का भंडाफोड़ किया है।

    यह संगठित गिरोह कर्नाटक और तमिलनाडु में सीमेंट, लोहा, इस्पात और अन्य निर्माण सामग्री के नाम पर फर्जी व्यापार दिखाकर बड़े पैमाने पर जीएसटी चोरी को अंजाम दे रहा था।

    जांच एजेंसियों के अनुसार, अब तक इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) के गलत इस्तेमाल से लगभग 355 करोड़ रुपये की कर चोरी सामने आ चुकी है।

    इस फर्जीवाड़े का खुलासा पारंपरिक जांच नहीं, बल्कि उन्नत जीएसटी डेटा विश्लेषण तकनीक के जरिए हुआ। विभाग की आंतरिक गैर वास्तविक करदाता (एनजीटीपी) प्रणाली के माध्यम से संदिग्ध कंपनियों के लेनदेन, आईटीसी दावों के चक्रीय पैटर्न और असामान्य बिलिंग व्यवहार को चिह्नित किया गया।

    इसके साथ ही कंपनियों के आईपी एड्रेस और डिजिटल फुटप्रिंट का विश्लेषण कर पूरे नेटवर्क की परतें खोली गईं।
    इन संकेतों के आधार पर कर्नाटक और तमिलनाडु के कई ठिकानों पर एक साथ तलाशी और जब्ती अभियान चलाया गया, जिससे पूरे रैकेट की संरचना सामने आई।

    आईएएस कनिष्क के पिता देश की प्रतिष्ठित औद्योगिक कंपनी टाटा स्टील में एक वरिष्ठ अधिकारी रह चुके हैं। कनिष्क की आरंभिक शिक्षा जमशेदपुर में हुई है।

    फर्जी कंपनियों का जाल और जाली दस्तावेज

    जांच में यह तथ्य सामने आया कि आरोपियों ने ऑनलाइन खरीदे गए स्टांप पेपर, फर्जी किरायानामा, मकान मालिकों और किरायेदारों के जाली हस्ताक्षर, मनगढ़ंत कर रसीदें और फर्जी नोटरी सत्यापन जैसे दस्तावेजों का इस्तेमाल कर दर्जनों फर्जी कंपनियों के नाम पर जीएसटी पंजीकरण हासिल किए।

    इन कंपनियों के माध्यम से नकली चालान तैयार कर सर्कुलर लेनदेन दिखाए जाते थे ताकि वास्तविक व्यापार किए बिना ही आइटीसी का दावा किया जा सके। पर्याप्त कर लाभ उठाने के बाद जांच और ऑडिट से बचने के लिए कंपनियों के जीएसटी पंजीकरण रद कर दिए जाते थे।

    प्रवर्तन एजेंसियों ने इस मामले में चार मुख्य आरोपियों को गिरफ्तार किया है। तमिलनाडु के दो भाई इरबाज अहमद और नफीज अहमद ने ट्राइऑन ट्रेडर्स, वंडर ट्रेडर्स, रॉयल ट्रेडर्स और गैलेक्सी एंटरप्राइजेज जैसी फर्जी कंपनियां बनाईं।

    वहीं, बेंगलुरु के निवासी एड्डाला प्रताप और रेवती ने पावर स्टील एंड सीमेंट, पीआर कंस्ट्रक्शन, एसवी ट्रेडर्स और एसआरएस सीमेंट स्टील ट्रेडर्स के नाम से फर्जी कारोबार खड़ा किया। चारों को बेंगलुरु स्थित आर्थिक अपराध विशेष न्यायालय ने 14 दिनों की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है।