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    CUJ के डा. उपेंद्र बने केलानिया यूनिवर्सिटी श्रीलंका के शोध सह निर्देशक, भारत और श्रीलंका के बीच शैक्षणिक सहयोग को मिलेगा बढ़ावा

    By Kumar Gaurav Edited By: Kanchan Singh
    Updated: Fri, 02 Jan 2026 06:26 PM (IST)

    सेंट्रल यूनिवर्सिटी ऑफ झारखंड, रांची के हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. उपेंद्र कुमार सत्यार्थी को श्रीलंका की केलानिया यूनिवर्सिटी में शोध सह-निर ...और पढ़ें

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    सेंट्रल यूनिवर्सिटी आफ झारखंड रांची के हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक डा. उपेंद्र कुमार सत्यार्थी को शोध सह निर्देशक नियुक्त किया है।

    जागरण संवाददाता, रांची। श्रीलंका की केलानिया यूनिवर्सिटी के फैकल्टी आफ ग्रैजुएट स्टडीज ने सेंट्रल यूनिवर्सिटी आफ झारखंड रांची के हिंदी विभाग के सहायक प्राध्यापक डा. उपेंद्र कुमार सत्यार्थी को शोध सह निर्देशक नियुक्त किया है।

    यह नियुक्ति भारत और श्रीलंका के बीच शैक्षणिक, भाषायी और साहित्यिक सहयोग को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।

    डा. उपेंद्र कुमार सत्यार्थी केलानिया यूनिवर्सिटी के हिंदी अध्ययन विभाग की शोधार्थी आरएमपीएस रत्नायक के शोध कार्य प्रेमचंद की कहानी कला और संवेदना का सह-निर्देशन करेंगे।

    इस शोध में प्रेमचंद की कथा-शैली, सामाजिक यथार्थ, मानवीय संवेदना तथा उनकी कहानियों में निहित युगबोध का समग्र और आलोचनात्मक विश्लेषण किया जाएगा।

    इस उपलब्धि पर सीयूजे के कुलपति प्रो. क्षिति भूषण दास, कुलसचिव केके राव, प्रो. आरके डे, निदेशक, आइक्यूएससी प्रो. मनोज कुमार, डीन-अकादमिक प्रो. अरुण कुमार पाढ़ी, डीन अनुसंधान एवं विकास, परीक्षा नियंत्रक प्रो. बीबी मिश्रा समेत सीयूजे के अधिकारी एवं शिक्षकों ने हर्ष व्यक्त किया है।

    कुलपति ने कहा डा. उपेंद्र कुमार सत्यार्थी का केलानिया यूनिवर्सिटी में शोध सह-निर्देशक के रूप में जुड़ना सीयूजे के लिए गर्व का विषय है और यह हमारे शिक्षकों की अकादमिक क्षमता और अंतरराष्ट्रीय पहचान को दर्शाती है।

    भारत-श्रीलंका के बीच शैक्षणिक और सांस्कृतिक सहयोग को मिलेगी नई दिशा 

    इससे भारत-श्रीलंका के बीच शैक्षणिक और सांस्कृतिक सहयोग को नई दिशा मिलेगी। हिंदी विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो. रत्नेश विश्वकसेन ने कहा डा. उपेंद्र कुमार सत्यार्थी हिंदी और सिंघली साहित्य के तुलनात्मक अध्ययन के क्षेत्र में पिछले कई वर्ष से महत्वपूर्ण कार्य कर रहे हैं।

    उनका अंतरराष्ट्रीय अनुभव हमारे विद्यार्थियों एवं शोधार्थियों के लिए उपयोगी सिद्ध होगा और विभाग की अकादमिक प्रतिष्ठा को और सुदृढ़ करेगा।

    सीयूजे के शिक्षकों ने इस उपलब्धि को यूनिवर्सिटी तथा भारतीय हिंदी साहित्य के लिए गौरवपूर्ण बताया। यह अकादमिक सहयोग भविष्य में दोनों देशों के बीच साहित्यिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक संबंधों को और अधिक मजबूत करने में सहायक सिद्ध होगा।

    बता दें कि डा. उपेंद्र कुमार सत्यार्थी हिंदी और सिंघली भाषा के प्रमुख साहित्यकारों के तुलनात्मक अध्ययन के क्षेत्र में निरंतर कार्य करते रहे हैं। उन्होंने भारत और श्रीलंका के साहित्यिक संबंधों को अकादमिक स्तर पर मजबूत करने में उल्लेखनीय योगदान दिया है।

    इसके अतिरिक्त वे श्रीलंका की कई यूनिवर्सिटी में हिंदी भाषा, साहित्य और तुलनात्मक साहित्य विषयों पर व्याख्यान दे चुके हैं, जिससे वहां के विद्यार्थियों और शोधार्थियों के बीच हिंदी साहित्य के प्रति रुचि और समझ को व्यापक आधार मिला है।