पहले बाबा का साथ छूटा, अब मां भी चली गईं; CM हेमंत सोरेन के दर्द में फिर दिखा अपनों को खोने का गम
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने अपनी मां रूपी सोरेन के निधन पर भावुक पोस्ट साझा किया, जिसमें उन्होंने उन्हें अपनी सबसे ...और पढ़ें

मां रूपी सोरेन के साथ सीएम हेमंत सोरेन। जागरण
HighLights
मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने मां रूपी सोरेन के निधन पर दुख व्यक्त किया।
उन्होंने अपनी मां को सबसे बड़ी छांव बताया, पिता को भी याद किया।
रूपी सोरेन का 20 दिनों से अस्पताल में चल रहा था इलाज।
डिजिटल डेस्क, रांची। रूपी सोरेन के निधन के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने भावुक पोस्ट साझा कर अपनी मां को याद किया। उन्होंने लिखा, “बाबा के जाने के बाद मां ही मेरी सबसे बड़ी छांव थीं। आज वह छांव भी प्रकृति की गोद में समा गयीं।” इसके बाद हेमंत सोरेन ने सिर्फ “मां....” लिखकर अपनी भावनाएं व्यक्त कीं।

बाबा के जाने के बाद माँ ही मेरी सबसे बड़ी छाँव थीं। आज वह छाँव भी प्रकृति की गोद में समा गयीं। माँ....
— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) October 7, 2026
दिवंगत शिबू सोरेन को याद करते हुए हेमंत का वो भावुक पोस्ट
मां के निधन के बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का वह भावुक पोस्ट भी याद किया जा रहा है, जो उन्होंने अपने पिता और दिशोम गुरु शिबू सोरेन के निधन के बाद लिखा था। उस समय उन्होंने कहा था, “आदरणीय दिशोम गुरुजी हम सभी को छोड़कर चले गए हैं। आज मैं शून्य हो गया हूं...”
आदरणीय दिशोम गुरुजी हम सभी को छोड़कर चले गए हैं। आज मैं शून्य हो गया हूँ...
— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) August 4, 2025
शिबू सोरेन के निधन पर हेमंत सोरेन की पत्नी और गांडेय विधायक कल्पना सोरेन ने भी भावुक संदेश साझा किया था। उन्होंने शिबू सोरेन को सिर्फ अपना ससुर नहीं, बल्कि “झारखंड के बाबा” और पिता समान बताया था।

अब रूपी सोरेन के निधन के बाद हेमंत सोरेन के शब्दों में एक बेटे का अपनी मां को खोने का दर्द नजर आ रहा है। पिता के निधन के बाद जिस मां को उन्होंने अपनी सबसे बड़ी छांव बताया था, आज उसी मां के जाने पर उन्होंने अपने दर्द को सिर्फ एक शब्द में समेट दिया- “मां...”
प्रिय बाबा, जब पूरा देश आपको अश्रुपूरित नेत्रों से विदा कर रहा है, मैंने एक कोना पकड़ लिया है, अपनी आधी जिंदगी जिस वटवृक्ष के साये में महफ़ूज़ हो कर काटी - आज आपके जाने से वह बेटी-सी बहू अपनी टूटी हुई हिम्मत बटोरने का साहस नहीं कर पा रही है। मैं जानती हूं, आप सिर्फ मेरे ससुर नहीं थे, आप झारखंड के बाबा थे हर उस बच्चे के, जिसने जंगलों की गोद में जन्म लिया, और संघर्ष को पहली सांस में महसूस किया। जब मैं पहली बार इस परिवार में आई, तो आपके व्यक्तित्व पर गौरव हुआ। आपकी सादगी, आपकी आवाज़ में ठहराव, और सबसे ज़रूरी आपका सुनना। आप सुनते थे हर किसान की चिंता, हर औरत का दर्द, हर मां की खामोशी हर झारखंडी के अरमान। आपने राजनीति को घर की तरह जिया जहाँ सत्ता नहीं, संबंधों का सम्मान होता है। आपके पास बड़ी डिग्रियाँ से भी बड़ी - दृष्टि दूरदर्शी थी। आपने केवल झारखंड को खड़ा नहीं किया हम सबको आत्मनिर्भर होने का हौसला दिया। जब आप “झारखंड” कहते थे, तो वो शब्द भूगोल नहीं, संवेदना बन जाता था। बाबा, मैंने आपको कभी पिता की तरह देखा, कभी एक संत की तरह, और कभी एक तपस्वी की तरह जो न सत्ता चाहता था, न वाहवाही बस अपनी माटी की, अपने लोगों की इज्जत चाहता था। आज आप नहीं हैं, पर आपकी चाल की गूंज हर गांव के रास्ते पर है। आपकी चप्पलों की खामोशी हर विधानसभा में गूंज रही है। बाबा, आपने झारखंड को छोड़ा नहीं है आप तो हर उस बेटी की आँख में हैं, जो अपने जंगल, अपने खेत, अपने सपनों को बचाना चाहती है। आप हर उस मां की सांस में हैं, जो चाहती है कि उसके बेटे भी एक दिन आपकी तरह “गुरु” एवं सच्चे इंसान बने। आपका सपना, अब हमारी जिम्मेदारी है। मैं, एक बहू नहीं आपकी बेटी, आपसे वादा करती हूं: “आपका नाम सिर्फ इतिहास में नहीं रहेगा वो हर लड़की के साहस में, हर गांव के संघर्ष में, और झारखंड की हर सांस में जिंदा रहेगा।” आपको झारखंड की हर बेटी का नम्र प्रणाम। आप हमारे संस्कार बन गए हैं। आपके बिना जीना मुश्किल है, पर आपके सपनों को जीना अब हमारा धर्म है।
— Kalpana Murmu Soren (@JMMKalpanaSoren) August 8, 2025
20 दिनों से चल रहा था इलाज
बता दें कि, रूपी सोरेन का बुधवार रात करीब आठ बजे निधन हो गया। वह लंबे समय से अस्वस्थ थीं और रांची के बरियातू स्थित हिल व्यू अस्पताल में उनका इलाज चल रहा था। तबीयत बिगड़ने के बाद उन्हें चिकित्सकों की विशेष निगरानी में रखा गया था। उनके निधन की खबर से झामुमो परिवार और समर्थकों में शोक की लहर है। उन्हें सांस लेने में परेशानी के बाद 18 सितंबर को हिल व्यू हास्पिटल में भर्ती कराया गया था।
फिलहाल रूपी सोरेन का पार्थिव शरीर अस्पताल से उनके आवास ले जाया जा रहा है। गुरुवार को पार्थिव शरीर पैतृक गांव नेमरा (रामगढ़) ले जाया जाएगा, जहां अंतिम संस्कार किया जाएगा।
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