रांची, जेएनएन। बॉलीवुड व हॉलीवुड के जाने-माने अभिनेता आदिल हुसैन ने झारखंड की तर्ज पर असम में भी उम्दा फिल्म नीति की वकालत की है। हॉलीवुड फिल्म लाइफ ऑफ पाइ और बॉलीवुड की मुक्तिभवन, इंग्लिश-विंग्लिश, इश्किया व एजेंट विनोद सरीखी फिल्मों में यादगार अभिनय करने वाले मंजे हुए एक्टर आदिल हुसैन मंगलवार को दैनिक जागरण कार्यालय पहुंचे। बेहद सरल अंदाज में बातचीत के क्रम में उन्होंने कहा कि झारखंड की खूबसूरत वादियां और घाटी-पहाड़ी से भरे-पूरे लोकेशन फिल्म निर्माण के लिए बेहद उम्दा हैं। राज्य सरकार की फिल्म नीति अच्छी है। यहां से भी अब अच्छे कलाकार उभर कर सामने आएंगे। असम के मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल से मिलकर उन्होंने फिल्म निर्माण के लिए आकर्षक प्रस्ताव उनके समक्ष रखने की इच्छा भी जाहिर की।

हिंसा से नहीं, कला-संगीत से होगा नक्सली समस्या का समाधान : थियेटर से करियर शुरू करने वाले आदिल ने कहा कि पूर्व, पश्चिम, उत्तर और दक्षिण का भेद कला के जरिये ही मिट सकता है। समृद्ध हिन्दुस्तानी संस्कृति लोगों को करीब लाने में प्रभावी साबित होगी। नक्सल प्रभावित झारखंड के बारे में इस बेहतरीन कलाकार ने कहा कि हिंसा से इसका समाधान नहीं निकलेगा। ऐसे भूले-भटके लोगों को हम कला-संगीत की विविध विधाओं से जीत सकते हैं। कहा कि बजट की कमी और कम प्रचार के कारण कई बेहतरीन फिल्में लोगों तक पहुंच नहीं पाती हैं। ऐसी फिल्मों के प्रदर्शन के लिए सरकार को आगे आना चाहिए। उन्होंने सर्व समाज को शिक्षित करने पर भी जोर दिया।

हर ब्लॉक में बने थियेटर : बेहतर फिल्मों को लोगों तक पहुंचाने के लिए देश के हर ब्लॉक में थियेटर बनने चाहिए। प्रोमोशन पर जोर देते हुए आदिल ने कहा कि महीने या छह महीने में होने वाले फिल्म फेस्टिवल जब हर रोज होंगे तो लोगों की पसंद भी बदलेगी।

एनआरसी को बताया सही, कहा हम विदेशियों को क्यों रखें वर्तमान में देश के सर्वाधिक ज्वलंत मसले एनआरसी पर बेबाकी से जवाब देते हुए असम के गोलपाड़ा के मूल निवासी आदिल हुसैन ने कहा कि केंद्र सरकार का यह फैसला सही है। एक सच्चे हिन्दुस्तानी के तौर पर राष्ट्रवाद की ओज दर्शाते हुए बोले-कोई देश विदेशियों को नहीं रखता, हम क्यों रखें? उन्होंने राष्ट्रवाद की भावना से अभिभूत दैनिक जागरण के सामाजिक सरोकार और अभियानों को भी सराहा।

थियेटर-फिल्म से गहरा लगाव वर्ष 1999 में रुपहले पर्दे पर पदार्पण करनेवाले आदिल हुसैन दर्जनों हंिदूी व इंग्लिश फिल्मों में काम कर चुके हैं। देश-विदेश की कई संस्थाओं से सम्मानित आदिल को नॉर्वे की एक फिल्म के लिए बेस्ट एक्टर का खिताब भी मिल चुका है।

थियेटर में मिलती है आत्मसंतुष्टि थियेटर और फिल्मों में अंतर के सवाल पर आदिल ने कहा कि थियेटर में अनुभव के आधार पर कलाकार समझता और अभिनय करता है। ग्लैमर और पैसे कमाने के लिए फिल्में सही है। आत्मसंतुष्टि थियेटर में ही मिलती है। आदिल ने नेशनल फिल्म डेवलपमेंट कारपोरेशन के 30 करोड़ के बजट पर चिंता व्यक्त की।

आदिल ने लाइफ ऑफ पाइ, इंगलिश विंगलिश, इश्किया, मुक्तिभवन आदि फिल्मों में अभिनय किया है। आदिल ने कहा कि कलाकार के तौर पर थियेटर में ज्यादा मजा आता है। फिल्मी दुनिया की चकाचौंध से अब तक दूर रहा। 

इस मौके पर उन्होंने दैनिक जागरण के सामाजिक सरोकारों और अभियान की सराहना की।

उन्होंने कहा कि अब भी स्टेज परफॉरमेंस और नाटक करने की कोशिश में जुटा रहता हूं। अभिनय के जरिये विविध चरित्र को जीवंत बनाना आत्मसंतुष्टि देता है।