OTT पर देसी स्वैग का बोलबाला: क्राइम, पॉलिटिक्स और गांव की मिट्टी
हाल ही में ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर बिहार और झारखंड की पृष्ठभूमि पर आधारित वेब सीरीज की संख्या में वृद्धि हुई है। 'महारानी' और 'जामताड़ा' जैसी ये सीरीज र ...और पढ़ें

बिहार-झारखंड की कहानियां OTT पर छाईं।
डिजिटल डेस्क, रांची। हाल के वर्षों में ओटीटी प्लेटफॉर्म्स पर बिहार और झारखंड की पृष्ठभूमि पर बनी वेब सीरीज की बाढ़-सी आ गई है। ये सीरीज न सिर्फ बड़ी संख्या में बन रही हैं, बल्कि दर्शकों के बीच लगातार हिट भी साबित हो रही हैं।
राजनीति की साजिशों से लेकर अपराध की दुनिया और ग्रामीण जीवन की सच्ची कहानियों तक ये शोज हिंदी पट्टी की जमीनी हकीकत को स्क्रीन पर जीवंत कर रहे हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि इनकी सफलता का राज है- सच्ची घटनाओं पर आधारित स्क्रिप्ट, मजबूत किरदार और क्षेत्रीय फ्लेवर। यह दर्शकों को अपनी ओर खींचता है।
बिहार के चेहरे से प्रेरित स्टोरी
बिहार की राजनीतिक और सामाजिक पृष्ठभूमि पर केंद्रित सीरीज सबसे ज्यादा चर्चा में हैं। 'महारानी' (सोनी लिव) इसका सबसे बड़ा उदाहरण है, जो 1990 के दशक के बिहार की अशांत राजनीति को दिखाती है।
इसमें एक गृहिणी अचानक मुख्यमंत्री बन जाती है, जब उसके पति को पद छोड़ना पड़ता है। हुमा कुरैशी स्टारर यह सीरीज दर्शकों के बीच इतनी लोकप्रिय हुई कि इसके कई सीजन आ चुके हैं।
इसी तरह, खाकी: द बिहार चैप्टर (नेटफ्लिक्स) आईपीएस अधिकारी अमित लोढ़ा की किताब 'बिहार डायरीज' पर आधारित है, जो 2000 के दशक में बिहार के संगठित अपराध और पुलिस की लड़ाई को दर्शाती है। करण टैकर और अविनाश तिवारी जैसे कलाकारों ने इसे और मजबूत बनाया।
झारखंड की क्राइम स्टोरीज भी हिट
झारखंड की ओर रुख करें तो 'जामताड़ा: सबका नंबर आएगा' (नेटफ्लिक्स) ने फिशिंग स्कैम की दुनिया को उजागर कर सनसनी मचा दी। जामताड़ा जिले की सच्ची घटनाओं पर बनी यह सीरीज छोटे शहर के युवाओं की महत्वाकांक्षा और अपराध के बीच की कहानी बयां करती है।
2020 में रिलीज हुई यह सीरीज इतनी हिट हुई कि इसका दूसरा सीजन भी आया और अब यह ओटीटी की क्लासिक बन चुकी है।
हाल ही में 'ग्राम चिकित्सालय' (प्राइम वीडियो) ने झारखंड की ग्रामीण पृष्ठभूमि पर फोकस किया, जो 'पंचायत' जैसी लगती है लेकिन स्थानीय मुद्दों को छूती है।
अन्य उल्लेखनीय सीरीज में 'दुपहिया' (प्राइम वीडियो) शामिल है, जो बिहार के पिछड़े इलाकों में दोपहिया गैंग्स, जातीय संघर्ष और लोकल पॉलिटिक्स को दिखाती है।
'रंगबाज: डर की राजनीति' (जी5) बिहार के असली राजनीतिक चेहरों से प्रेरित है, जहां एक गैंगस्टर पॉलिटिशियन बनता है। 'रक्तांचल' (एमएक्स प्लेयर) 1980 के दशक के पूर्वांचल (बिहार संदर्भ) के टेंडर माफिया और खूनी संघर्ष को बयां करती है।
इंटरनेट मीडिया पर भी इन सीरीज की चर्चा जोरों पर है, जहां यूजर्स बिहार की 'महारानी' को राजनीतिक घटनाओं से जोड़ते हैं और 'पंचायत' जैसे शोज में बिहारी कलाकारों की सराहना करते हैं।
यह ट्रेंड क्यों बढ़ रहा है?
सीनियर जर्नलिस्ट राकेश परिहार के मुताबिक ओटीटी प्लेटफॉर्म्स अब मेट्रो सेंटर्ड स्टोरीज से हटकर रीजनल कंटेंट पर फोकस कर रहे हैं। बिहार-झारखंड की कहानियां सच्ची घटनाओं से प्रेरित होती हैं, जो दर्शकों को रिलेटेबल लगती हैं।
साथ ही इनमें स्टार पावर भी जुड़ रहा है। 2024 में बिहार सरकार की फिल्म प्रमोशन पॉलिसी ने भी शूटिंग को बढ़ावा दिया, जिससे 'लाइफ लीला' जैसी नई वेब सीरीज बनीं। बिहारी अभिनेत्री संचिता बसु की 'ठुकरा के मेरा प्यार' (हॉटस्टार) भी ट्रेंड कर रही है।
ये सीरीज न सिर्फ एंटरटेनमेंट दे रही हैं, बल्कि बिहार-झारखंड की छवि को भी बदल रही हैं। जहां पहले ये राज्य अपराध और राजनीतिक अस्थिरता से जुड़े थे, अब ये क्रिएटिव हब बनते जा रहे हैं।
आने वाले सालों में और भी ऐसी सीरीज की उम्मीद है, जो क्षेत्रीय कहानियों को ग्लोबल ऑडियंस तक पहुंचाएंगी। झारखंड के क्राइम पर बेस्ड वेब सीरीज वरिष्ठ पत्रकार कुणाल वर्मा की लिखी स्टोरी, जिसमें शेखर सुमन और रविकिशन ने अभिनय किया है, बन कर तैयार है।

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