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    गढ़वा की पर्यटन सूची में शामिल हुई भवनाथपुर की शिव पहाड़ी गुफा, क्षेत्रवासियों में हर्ष का माहौल

    Updated: Sun, 04 Jan 2026 05:13 PM (IST)

    गढ़वा जिले के भवनाथपुर प्रखंड स्थित ऐतिहासिक शिव पहाड़ी गुफा को अब पर्यटन सूची में शामिल कर लिया गया है। इसे 'शिव मंदिर, भवनाथपुर' के नाम से अंकित किय ...और पढ़ें

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    गढ़वा की शिव पहाड़ी। (जागरण)

    संवाद सूत्र, भवनाथपुर (गढ़वा)। जिले के 26 चिह्नित पर्यटन स्थलों की सूची में अब भवनाथपुर प्रखंड के पंडरिया पंचायत स्थित ऐतिहासिक एवं अद्भुत शिव पहाड़ी गुफा का नाम भी शामिल कर लिया गया है।

    पर्यटन सूची में इसे शिव मंदिर, भवनाथपुर के नाम से अंकित किया गया है। इस उपलब्धि के बाद जल्द ही पर्यटन विभाग की टीम स्थल का दौरा कर भौगोलिक, धार्मिक और पर्यटन की दृष्टि से इसकी स्थिति का आकलन करेगी। इससे क्षेत्र के लोगों में उत्साह और खुशी का माहौल है।

    शिव पहाड़ी गुफा मंदिर कमेटी द्वारा पूर्व विधायक भानु प्रताप शाही, जिला परिषद सदस्य रजनी शर्मा लंबे समय से इस स्थल को पर्यटन स्थल घोषित करने की मांग की जा रही थी।

    इस दिशा में विधायक अनंत प्रताप देव की भूमिका को अहम माना जा रहा है। विधायक ने शिव पहाड़ी गुफा के महत्व को सदन में उठाया और इसे उचित पहचान दिलाने का निरंतर प्रयास किया। इसके लिए शिव पहाड़ी गुफा मंदिर विकास समिति ने विधायक अनंत प्रताप देव को बधाई देते हुए आभार व्यक्त किया है।

    समिति ने कहा कि उनके प्रयास से यह ऐतिहासिक स्थल अब राज्य और जिले के पर्यटन मानचित्र पर आने की ओर अग्रसर है।

    प्रखंड मुख्यालय से लगभग चार किलोमीटर की दूरी पर सरइया गांव स्थित भवनाथपुर चूना पत्थर खदान समूह के समीप स्थित शिव पहाड़ी गुफा एक अनोखी प्राकृतिक संरचना है।

    यहां श्रद्धालु मात्र डेढ़ फीट चौड़े प्राकृतिक सुराख से एक-एक कर प्रवेश करते हैं और करीब 150 फीट नीचे गुफा के भीतर उतरकर भगवान भोलेनाथ की पूजा-अर्चना करते हैं। बाहर से ठोस दिखाई देने वाला यह पहाड़ अंदर से पूरी तरह खोखला है, जो इसे रहस्यमयी बनाता है।

    स्थानीय मान्यताओं के अनुसार करीब 200 वर्ष पूर्व एक व्यक्ति को स्वप्न में भगवान भोलेनाथ ने दर्शन देकर बताया कि वे शिव पहाड़ी के गर्भ में विराजमान हैं। इसके बाद खोजबीन में इस गुफा का पता चला और तभी से यहां पूजा-पाठ की परंपरा चली आ रही है।

    महाशिवरात्रि पर लगता है मेला

    ग्रामीणों का कहना है कि सौ वर्षों से अधिक समय से यहां श्रद्धालु गुफा में उतरकर पूजा कर रहे हैं, लेकिन आज तक कोई बड़ी दुर्घटना नहीं हुई है। गुफा के मध्य स्वतः निर्मित भगवान शिव का शिवलिंग स्थापित है।

    महाशिवरात्रि के अवसर पर यहां दो दिवसीय मेले का आयोजन होता है, जबकि सावन महीने में कांवड़ यात्रा के माध्यम से जलाभिषेक किया जाता है। महाशिवरात्रि पर्व पर हजारों की संख्या में श्रद्धालु शिव पहाड़ी गुफा पहुंचते हैं।

    शिव पहाड़ी गुफा के भीतर काशी करवट नामक एक स्थान भी है, जहां सूर्य की सीधी रोशनी पहुंचती है। बताया जाता है कि तलहटी से आगे एक और संकरी गुफा जाती है, लेकिन अत्यधिक संकीर्ण होने के कारण आज तक कोई उसमें प्रवेश नहीं कर सका है। समय-समय पर यहां अखंड कीर्तन का भी आयोजन होता है।

    वर्तमान में शिव पहाड़ी गुफा मंदिर विकास समिति के अध्यक्ष ब्रजेश कुमार गुप्ता, उपाध्यक्ष इंद्रजीत कुमार, सचिव रामविजय साह सहित अन्य सदस्य मंदिर और गुफा की देखरेख कर रहे हैं।

    क्षेत्रवासियों का मानना है कि यदि पर्यटन विभाग द्वारा इस गुफा का समुचित विकास किया गया, तो यह भवनाथपुर ही नहीं बल्कि पूरे गढ़वा जिले के लिए एक प्रमुख पर्यटन केंद्र बन सकता है।