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झारखंड से अन्नपूर्णा देवी और संजय सेठ को मिली मोदी मंत्रिमंडल में जगह, ताकते रह गए कई दिग्गज; नहीं मिला मौका

नरेंद्र मोदी ने लगातार तीसरी बार प्रधानमंत्री पद की शपथ ग्रहण किया है। उनके साथ कैबिनेट राज्य व स्वतंत्र प्रभार मंत्रियों ने भी शपथ ग्रहण किया है। झारखंड से अन्नपूर्णा देवी और संजय सेठ को मंत्री बनाया गया है। अन्नपूर्णा देवी तथा संजय सेठ को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह देकर राज्य में ओबीसी आबादी को साधने का प्रयास किया है।

By Neeraj Ambastha Edited By: Mohit Tripathi Published: Sun, 09 Jun 2024 10:13 PM (IST)Updated: Sun, 09 Jun 2024 10:13 PM (IST)
झारखंड से अन्नपूर्णा देवी और संजय सेठ मोदी मंत्रिमंडल में मिली जगह।

राज्य ब्यूरो, रांची। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने झारखंड से अन्नपूर्णा देवी तथा संजय सेठ को केंद्रीय मंत्रिमंडल में जगह देकर राज्य में ओबीसी आबादी को साधने का प्रयास किया है। झारखंड की बात करें तो यहां भी 55 प्रतिशत आबादी ओबीसी की है तथा सभी दलों के एजेंडे में यह समाज अनिवार्य रूप से होता है।

अन्नपूर्णा देवी और संजय सेठ को मोदी कैबिनेट में स्थान देकर ओबीसी आबादी में ज्यादा हिस्सेदारी वाले यादवों और वैश्यों को साधने का प्रयास किया गया है। झारखंड में यादवों की आबादी 14 प्रतिशत है, जबकि वैश्यों की आबादी 40 प्रतिशत है। लगभग छह माह में झारखंड में विधानसभा चुनाव होना है। इसे ध्यान में रखते हुए यह रणनीति कारगर होगी।

कोडरमा संसदीय क्षेत्र से निर्वाचित अन्नपूर्णा देवी यादव हैं। पिछली मोदी सरकार में इन्हें केंद्रीय राज्यमंत्री बनाया गया था। ये दूसरी बार मंत्री बनी हैं। इस बार इन्हें प्रमोशन देकर केंद्रीय मंत्री बनाया गया है।

पिछली मोदी सरकार में इन्हें केंद्रीय शिक्षा राज्य मंत्री की जिम्मेदारी मिली थी। वहीं, रांची संसदीय क्षेत्र से लगातार दूसरी बार निर्वाचित संजय सेठ को मंत्री बनाकर यहां के वैश्यों को साधने का प्रयास किया गया है। उन्हें केंद्रीय राज्यमंत्री की जिम्मेदारी मिली है। संजय सेठ पहली बार मंत्री बने हैं।

ओबीसी का आरक्षण बढ़ाना बड़ा मुद्दा

झारखंड में ओबीसी के आरक्षण बढ़ाने का मुद्दा हर चुनाव में रहता था। वर्ष 2019 के विधानसभा चुनाव के दौरान झामुमो ने तो अपने घोषणापत्र में कहा था कि राज्य में पिछड़ा वर्ग के लोगों को सरकारी नौकरी में 27 प्रतिशत आरक्षण दिया जाएगा। सरकार बनने के बाद विधानसभा में इसे लेकर विधेयक भी पारित कराया गया। हालांकि इसे संविधान सम्मत नहीं बताते हुए राजभवन ने इसे वापस लौटा दिया।

इन नेताओं को लेकर लगती रहीं अटकलें, नहीं मिला मौका

आजसू के सांसद चंद्रप्रकाश चौधरी को भी मोदी कैबिनेट में सम्मिलित किए जाने की दिनभर अटकलें लगती रहीं, लेकिन चंद्रप्रकाश को मंत्री नहीं बनाया गया।

जानकारी के मुताबिक, चंद्रप्रकाश मंत्री बनाए जाने के मार्ग में जमशेदपुर के सांसद बिद्युत वरण महतो बाधक बने, क्योंकि उनकी उपेक्षा कर कुर्मी जाति से चंद्रप्रकाश को मंत्री बनाना मुश्किल था। बिद्युत वरण लगातार तीसरी बाद चुनाव जीते हैं। हालांकि उन्हें भी इस बार मंत्री नहीं बनाया गया है।

इसी तरह, लगातार चौथी बार गोड्डा से चुनाव जीतनेवाले निशिकांत दूबे को इस बार मंत्री बनाए जाने की संभावना व्यक्त की जा रही थी, लेकिन उन्हें भी मौका नहीं मिला।

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