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    Krishna Janmashtami 2025: गृहस्थ कब रख सकते हैं जन्माष्टमी का व्रत? पंडित जी ने दूर कर दिया सारा कन्फ्यूजन

    Updated: Thu, 14 Aug 2025 09:52 AM (IST)

    हर साल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी भादो मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाई जाती है। इस साल यह पर्व 16 अगस्त को मनाया जाएगा। इस दिन सर्वार्थ सिद्धि और अ ...और पढ़ें

    पूरे देश में धूमधाम से मनाई जाएगी श्रीकृष्ण जन्माष्टमी। (जागरण)

    संवाद सहयोगी, झुमरीतिलैया(कोडरमा)। हिंदू धर्म में पंंचांग मुताबिक हर साल श्रीकृष्ण जन्माष्टमी भादो मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाए जाने का विधान है।

    इस दिन भगवान श्री कृष्ण जन्मोत्सव होता है। वहीं, भगवान का जन्म मध्य रात्रि को हुआ था। इस दिन श्रीकृष्ण के बाल स्वरूप लड्डू गोपाल के रूप में उनकी मूर्ति का पूजन करना शुभ होता है।

    पंडित कुंतलेश पाण्डेय ने बताया कि इस साल जन्माष्टमी का पर्व 16 अगस्त को मनाया जाएगा। साथ ही इस दिन सर्वार्थ सिद्धि और अमृत सिद्धि योग बन रहा है, जिससे इस दिन का महत्व और भी बढ़ गया है।

    पंचांग के मुताबिक 15 अगस्त को देर रात 11 बजकर 48 मिनट पर भाद्रपद माह के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि आरंभ होगी। वहीं, 16 अगस्त को रात 09 बजकर 35 मिनट पर अष्टमी तिथि का अंत होगा।

    पंडित कुंतलेश पाण्डेय।

    भगवान कृष्ण का जन्म मध्य रात्रि में हुआ है। इसके लिए भगवान कृष्ण का जन्मोत्सव मध्य रात्रि में मनाया जाता है। उन्होंने बताया कि जन्माष्टमी पर शुभ मुहूर्त 16 अगस्त को रात्रि 12:05 से लेकर 12:45 तक रहेगा।

    16 अगस्त को गृहस्थ रखेंगे व्रत

    इस अवसर पर गृहस्थ 16 को उपवास कर पूजा-अर्चना करेंगे। बता दें कि जन्माष्टमी की रात्रि में भगवान श्रीकृष्ण की विधि-विधानपूर्वक पूजा-अर्चना की जाती है।

    शास्त्रों के अनुसार श्री कृष्ण जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण मथुरा नगरी में राजकुमारी देवकी और उनके पति वासुदेव के आठवें पुत्र के रूप में अवतरित हुए थे।

    मान्यता है कि जो व्यक्ति कृष्ण जन्माष्टमी का व्रत रख कर पूजा- अर्चना करते हैं उनकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। साथ ही कृष्ण जन्माष्टमी पर भगवान कृष्ण की आराधना करने से सुख- समृद्धि की प्राप्ति होती है।

    साथ ही जन्माष्टमी का व्रत रखने से व्यक्ति को अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है। वहीं, इस दिन लोग भजन कीर्तन करते हैं और जन्मोत्सव मनाते हैं। इस दिन के लिए मंदिरों को विशेष तौर पर सजाया जाता है।

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