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    धनबाद रेलमंडल की ट्रेनों में लगेंगे सीसीटीवी कैमरे, इंजन में वॉयस रिकॉर्डर से बढ़ेगी सुरक्षा

    Updated: Thu, 01 Jan 2026 05:30 AM (IST)

    भारतीय रेलवे ने नववर्ष पर यात्रियों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए धनबाद रेलमंडल की ट्रेनों में सीसीटीवी कैमरे लगाने का फैसला किया है। लगभग 400 बोगियों में ...और पढ़ें

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    धनबाद रेलमंडल की ट्रेनों में लगेंगे सीसीटीवी कैमरे

    संवाद सहयोगी, झुमरीतिलैया (कोडरमा)। नववर्ष के अवसर पर यात्रियों की सुरक्षा को लेकर भारतीय रेलवे ने बड़ा फैसला लिया है। धनबाद रेलमंडल के अंतर्गत नेताजी सुभाषचंद्र बोस गोमो जंक्शन, पारसनाथ, हजारीबाग रोड, कोडरमा व गया जंक्शन होकर चलने वाली ट्रेनों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इससे ट्रेनों में होने वाली चोरी व अन्य आपराधिक घटनाओं पर प्रभावी अंकुश लगेगा और यात्रियों को सुरक्षित यात्रा का अनुभव मिलेगा।

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    उत्तर रेलवे में इस व्यवस्था के सफल परीक्षण के बाद अब इसे धनबाद रेलमंडल में भी लागू किया जा रहा है। धनबाद रेलमंडल के वरीय वाणिज्य प्रबंधक सह पीआरओ इबकाल ने बताया कि मंडल से खुलने वाली ट्रेनों की लगभग 400 बोगियों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे।

    कैमरे कोच के दोनों दरवाजों के पास लगाए जाएंगे, जिससे यात्रियों की आवाजाही पर नजर रखी जा सके। एसी कोचों में चार और नन-एसी कोचों में छह कैमरे लगाए जाएंगे। इन कैमरों की रिकार्डिंग क्षमता 30 दिनों तक की होगी।

    उन्होंने बताया कि योजना के प्रथम चरण में एक से दो माह के भीतर एक्सप्रेस ट्रेनों में यह सुविधा बहाल की जाएगी, इसके बाद अन्य ट्रेनों में इसे चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। इसके अलावा ट्रेनों के इंजनों में भी छह-छह कैमरे लगाए जाएंगे, जो 100 किमी प्रति घंटा या उससे अधिक गति पर भी स्पष्ट रिकॉर्डिंग करने में सक्षम होंगे। कम रोशनी में भी कैमरे बेहतर परिणाम देंगे।

    इधर, पूर्व मध्य रेलवे के अंतर्गत ट्रेनों के इंजनों में जल्द ही वायस रिकार्डर सिस्टम लगाने की तैयारी है। इसके लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और फरवरी से यह सुविधा बहाल होने की संभावना है।

    यह सिस्टम हवाई जहाज में लगे ब्लैक बॉक्स की तरह काम करेगा, जिससे लोको पायलट व सहायक लोको पायलट की बातचीत और इंजन की आवाजें रिकार्ड होंगी। वायस रिकार्डर लगने के बाद इंजन में मोबाइल फोन का उपयोग प्रतिबंधित रहेगा और संवाद केवल वाकी-टाकी से गार्ड व स्टेशन मास्टर से किया जाएगा। रेल प्रशासन का मानना है कि इससे सिग्नल ओवरशूट जैसी घटनाओं को रोकने में मदद मिलेगी।