मनोज सिंह, जमशेदपुर। पूर्वी सिंहभूम के दलमा व घाटशिला के जंगलों में दुर्लभ सिवेट कैट मिली है। कई खूबियों से भरी दुर्लभ सिवेट कैट श्रीलंका व अफ्रीका के अलावा दक्षिण भारत के जंगलों में पाई जाती है। झारखंड में हाल में दो सिवेट कैट मिलने से वन विभाग उत्साहित है। इसके मल से दुनिया की सबसे महंगी कॉफी बनती है। इसके मल से बनाई जाने वाली एक पौंड (453 ग्राम) कॉफी की कीमत 40 से 50 हजार रुपये तक होती है यानी प्रति किलो करीब एक लाख रुपये।

सिवेट कैट को कस्तूरी बिलाव भी कहा जाता है। वजह है उससे निकलने वाली कस्तूरी जैसी महक। इसके शरीर में एक ग्रंथि होती है जिससे गाढ़ा, सुगंधित, पीला पदार्थ निकलता है, जिससे कस्तूरी जैसी महक आती है। इससे बनाया जाने वाला इत्र काफी महंगा होता है।

ऐसे बनती है महंगी कॉफी : जंगल में मिलने वाली कॉफी व चेरी के फल को सिवेट कैट निगल जाती है। इसके गुदे को तो वह पचा लेती है, लेकिन मल के साथ बीज बाहर आ जाता है। मल से बीज को अलग कर प्रॉसेस किया जाता है। धोकर भूना जाता है। फिर इसे पीसकर कॉफी बनाई जाती है। सिवेट कॉफी की सऊदी अरब, दुबई, अमेरिका, यूरोप आदि देशों में काफी मांग है।

घायल अवस्था में मिली थी सिवेट कैट : दलमा के अलावा कुछ दिनों पूर्व जमशेदपुर के घाटशिला रेंज के जंगल में एक सिवेट कैट घायल अवस्था में मिली थी। इसका इलाज घाटशिला के पशु चिकित्सक डॉ. शंकर सिंह ने किया था। गंभीर अवस्था को देखते हुए डा. शंकर ने उसे टाटा जू ले जाने की सलाह दी थी। इलाज के बाद यह फिलहाल जू में ही है। उसके स्वस्थ होने से वन विभाग ने राहत की सांस ली।

दलमा में संरक्षित है सिवेट कैट : डीएफओ इको सेंसेटिव जोन के रूप में चिह्नित व हाथियों के लिए संरक्षित दलमा वन्य प्राणी आश्रयणी के डीएफओ डॉ. अभिषेक कुमार कहते हैं कि सिवेट कैट का दलमा जंगल में मिलना उत्साहजनक है। यह संरक्षित जीव कभी-कभी नजर आता है। 

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