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    319 करोड़ के बकाये और आयुक्त की कमी से अटका टाटा लीज नवीनीकरण, लीज खत्म, करार अधर में

    Updated: Thu, 01 Jan 2026 08:58 PM (IST)

    टाटा स्टील की लीज 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो चुकी है, लेकिन ₹319.40 करोड़ के बकाये और कोल्हान आयुक्त का पद रिक्त होने के कारण नवीनीकरण अधर में है। रा ...और पढ़ें

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    फाइल फोटो।

    जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। टाटा स्टील की लीज अवधि 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो चुकी है, लेकिन 319.40 करोड़ रुपये के बकाये और कोल्हान आयुक्त का पद रिक्त होने के कारण लीज नवीनीकरण की प्रक्रिया फिलहाल अधर में लटकी हुई है।

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    राज्य के राजस्व सचिव चंद्रशेखर ने स्पष्ट कर दिया है कि सभी प्रक्रियाएं पूरी होने और राज्य कैबिनेट की मंजूरी के बाद ही टाटा लीज पर अंतिम फैसला लिया जाएगा। ऐसे में फिलहाल टाटा स्टील के साथ लीज नवीनीकरण का करार संभव नहीं दिख रहा है।

    आयुक्त की स्वीकृति के बिना लीज का ड्राफ्ट आगे नहीं बढ़ सकता

    राजस्व सचिव ने बताया कि टाटा लीज नवीनीकरण की प्रक्रिया में कोल्हान आयुक्त की भूमिका बेहद अहम है। आयुक्त की स्वीकृति के बिना लीज का ड्राफ्ट आगे नहीं बढ़ सकता।

    उन्होंने कहा कि कोल्हान आयुक्त की पोस्टिंग को लेकर कार्मिक विभाग से जल्द नियुक्ति का अनुरोध किया गया है। आयुक्त की मंजूरी के बाद लीज का मसौदा विधि विभाग को भेजा जाएगा और वहां से स्वीकृति मिलने के बाद इसे राज्य कैबिनेट के समक्ष रखा जाएगा।

    कैबिनेट की मुहर लगने के बाद ही टाटा स्टील के साथ लीज डीड फाइनल कर हस्ताक्षर किए जाएंगे। राजस्व सचिव ने यह भी स्पष्ट किया कि टाटा स्टील पर बकाया 319.40 करोड़ रुपये की वसूली से जुड़ा नोटिस जिला स्तर से भेजा जाना है।

    पूरी प्रक्रिया ठप पड़ी हुई

    गौरतलब है कि कोल्हान के आयुक्त एन. बागे 30 नवंबर 2025 को सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जिसके बाद से यह महत्वपूर्ण पद पिछले एक महीने से खाली पड़ा है। इसी वजह से पूरी प्रक्रिया ठप पड़ी हुई है।

    इस बीच पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने बकाये को लेकर सख्त रुख अपनाया है। उपायुक्त ने राजस्व सचिव को पत्र लिखकर मार्गदर्शन मांगा है। जिला प्रशासन की ओर से कराई गई जांच में यह सामने आया है कि टाटा स्टील पर लीज मद में 319.40 करोड़ रुपये बकाया है।

    यह जांच अपर उपायुक्त की देखरेख में और भूमि सुधार उप समाहर्ता (डीसीएलआर) के नेतृत्व वाली टीम द्वारा की गई थी। उपायुक्त ने कंपनी को स्पष्ट निर्देश दिया है कि लीज नवीनीकरण से पहले पेंडिंग बकाया राशि सरकारी खजाने में जमा कराई जाए।

    कंपनी ने लीज डीड का ड्राफ्ट भी सौंपा था

    गौरतलब है कि टाटा स्टील के एमडी एवं सीईओ टीवी नरेंद्रन ने इस संबंध में 10 सितंबर और 1 दिसंबर 2025 को राज्य सरकार को पत्र भेजा था। पत्र में उन्होंने बताया था कि कंपनी की मौजूदा लीज 31 दिसंबर 2025 को समाप्त हो रही है, इसलिए 1 जनवरी 2026 से इसका नवीनीकरण किया जाए।

    कंपनी की ओर से लीज डीड का ड्राफ्ट भी सौंपा गया था, जो फिलहाल उपायुक्त कार्यालय में लंबित है। लीज नवीनीकरण में देरी के बीच जिला प्रशासन ने टाटा लीज की जमीन पर अतिक्रमण को लेकर भी कड़े तेवर अपना लिए हैं।

    उपायुक्त कर्ण सत्यार्थी ने अतिक्रमण हटाओ अभियान के लिए सात अलग-अलग टीमों का गठन किया है, जिनमें क्रॉस-फंक्शनल टीमें भी शामिल हैं। यह टीमें शुक्रवार से शहर में अभियान चलाकर टाटा लीज की जमीन पर हुए अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई करेंगी।

    सरकारी आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2005 के बाद भी टाटा लीज की करीब 33 एकड़ जमीन पर अतिक्रमण हुआ है। इन इलाकों में 125 से अधिक बस्तियां बस चुकी हैं, जहां लाखों लोग निवास कर रहे हैं। प्रशासन का कहना है कि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई चरणबद्ध तरीके से की जाएगी।

    टाटा लीज का अब तक का सफर

    टाटा स्टील (तत्कालीन टिस्को) को आजादी से पहले ब्रिटिश शासन के दौरान जमीन लीज पर दी गई थी, जिसे बाद में बिहार भूमि सुधार अधिनियम, 1950 के तहत लाया गया।

    1 जनवरी 1956 को सरकार ने टाटा स्टील के साथ 12,708 एकड़ जमीन के लिए 30 वर्षों का लीज समझौता किया। यह समझौता 31 दिसंबर 1995 को समाप्त हो गया। इसके बाद 1995 से 2005 तक सरकार और कंपनी के बीच कोई वैध लीज समझौता नहीं था।

    20 अगस्त 2005 को टाटा लीज का नवीनीकरण किया गया, जिसे पिछली तारीख यानी 1 जनवरी 1996 से प्रभावी माना गया। यह समझौता 10,852 एकड़ जमीन के लिए अगले 30 वर्षों के लिए था। इस दौरान 1,856 एकड़ जमीन को लीज से बाहर कर दिया गया, क्योंकि उस पर अतिक्रमण हो चुका था।

    अब 31 दिसंबर 2025 को 2005 में हुआ लीज नवीनीकरण भी समाप्त हो चुका है और नया करार कई अड़चनों में फंसा हुआ है।