जमशेदपुर: छात्र की आत्महत्या से शिक्षा विभाग में हड़कंप
जमशेदपुर में एक छात्र ने आत्महत्या कर ली, जिससे अभिभावकों में शोक की लहर है। शिक्षा विभाग ने घटना की जांच शुरू कर दी है। यह मामला छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य और शिक्षा प्रणाली के दबाव जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर ध्यान आकर्षित करता है।

हादसे के बाद बिलखते परिजन व इनसेट में मृतक छात्र। ● जागरण
जासं, जमशेदपुर। कीताडीह स्थित सेंट जेवियर पब्लिक स्कूल के चौथी कक्षा में पढ़ने वाले 13 वर्षीय छात्र नवनीत कुमार की घर में हुई संदिग्ध मौत ने पूरे शहर को झकझोर दिया है। घटना ने न केवल परिजनों को सदमे में डाल दिया है, बल्कि शहर के अभिभावकों, स्कूल समुदाय और शिक्षा विभाग में भी गहरी चिंता पैदा कर दी है।
जमशेदपुर अभिभावक संघ के अध्यक्ष डॉ. उमेश ने कहा कि इतनी कम उम्र के बच्चे द्वारा ऐसा कदम उठाना किसी भी अभिभावक के लिए अकल्पनीय है। उन्होंने कहा कि हंसते-खेलते परिवार का इस तरह उजड़ जाना बेहद दुखद और सभी के लिए चिंतन का विषय है।
शिक्षा विभाग गंभीर, सोमवार से शुरू होगी औपचारिक जांच
जिला शिक्षा पदाधिकारी आशीष कुमार पांडे ने कहा कि यह अत्यंत दुःखद घटना है और बच्चों की मानसिक स्थिति को समझने की आवश्यकता है। विभाग अपने स्तर से मामले की जांच करेगा और यह समझने की कोशिश की जाएगी कि छात्र किस परिस्थिति से गुजर रहा था।
उन्होंने बताया कि सोमवार को परिजनों, स्कूल प्रबंधन, शिक्षकों और सहपाठियों से बातचीत कर घटना से जुड़े तथ्यों को समझा जाएगा। जिला शिक्षा अधीक्षक ने कहा कि ऐसे मामलों में संवेदनशीलता के साथ जांच जरूरी है ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोका जा सके।
वाइस प्रिंसिपल के सामने पेशी का हुआ था जिक्र
मृतक छात्र के पिता तुलसी कुमार, निवासी बागबेड़ा, ने थाना प्रभारी को आवेदन देकर निष्पक्ष जांच की मांग की है। आवेदन में उन्होंने बताया कि उनके बेटे को स्कूल में किसी चिंगम को लेकर हुए विवाद के बाद वाइस प्रिंसिपल के कार्यालय में पेश होना पड़ा था।
परिजनों का कहना है कि नवनीत के हाथ में चोट का निशान भी था, जिसकी जानकारी उसने अपनी बहन को दी थी। पिता का दावा है कि यह घटना बच्चे पर मानसिक दबाव का कारण बन सकती है, जिसकी जांच आवश्यक है।
अभिभावकों में बढ़ी चिंता, विशेषज्ञों का सुझाव
घटना के बाद शहर के अभिभावकों में यह चर्चा तेज हो गई है कि बच्चों की छोटी-छोटी परेशानियां भी कभी-कभी उनके लिए बेहद भारी हो सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों से नियमित रूप से संवाद, स्कूल की गतिविधियों पर नजर और उनके भावनात्मक बदलावों को गंभीरता से समझना जरूरी है।

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