जमशेदपुर, जासं। भारतीय क्रिकेट के पूर्व कप्तान महेंद्र सिंह धोनी अभी चेन्नई सुपर किंग्स के कप्तान हैं। माही के नाम से लोकप्रिय अब तक के सबसे महान क्रिकेटरों में से एक हैं। भारत के लिए वह भारतीय टीम के अब तक के सर्वश्रेष्ठ कप्तान हैं। उनकी कहानी कई लोगों के लिए प्रेरणादायक रही, लेकिन इसके अलावा भी बहुत कुछ है। कैप्टन कूल कई बार विवादों के केंद्र में रहे हैं। आइए नजर डालते हैं ऐसे ही कुछ विवादों पर।

स्पॉट फिक्सिंग कांड

आईपीएल का सबसे बड़ा मैच फिक्सिंग कांड 2013 में सामने आया था। उस समय यह भारत का सबसे बड़ा स्कैंडल था। उस समय धोनी भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान थे। हॉटस्टार पर प्रसारित एक डॉक्यूड्रामा में धोनी ने कहा कि 2013 मेरे जीवन का सबसे कठिन दौर था, मैं कभी भी उतना उदास नहीं था, जितना तब था।

हालांकि, स्कैंडल के वक्त धोनी ने कई महीनों तक इस बारे में कुछ नहीं बोला। उनकी चुप्पी की व्याख्या अलग-अलग तरीकों से की जा सकती है। यहां तक ​​कि कोर्ट की सुनवाई में भी उनसे काफी पूछताछ की गई।अभियोजन पक्ष के वकीलों में से एक ने उन पर ईमानदार नहीं होने तक का आरोप लगाया था।

रांची के दिउड़ी मंदिर में दी बकरे की बलि

दक्षिण अफ्रीका में टी-20 वर्ल्ड कप जीतने के बाद 10 मार्च 2008 को महेंद्र सिंह धोनी ने रांची के दिउड़ी मंदिर में एक बकरे की बलि दी थी। इसके बाद उन्हें कई पशु नियंत्रण समूहों के गुस्से का सामना करना पड़ा। पीपुल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (पेटा) ने उन्हें "जानवरों के प्रति क्रूरता’ के लिए एक पत्र जारी किया।

पत्र में उन्होंने लिखा कि "एक प्रतिभाशाली खिलाड़ी के रूप में, आप युवा लोगों के लिए एक आदर्श हैं। हमें उम्मीद है कि आप बच्चों पर अपने गंभीर प्रभाव पर विचार करेंगे और भविष्य में उन क्रूर कृत्यों से दूर रहेंगे, जिनकी नकल करने के लिए आपके युवा प्रशंसक प्रेरित हो सकते हैं’।

सहवाग के साथ विवाद की उड़ी थी बात

2007 में एमएस धोनी को भारतीय क्रिकेट टीम का कप्तान बनाया गया था। तभी से टीम के साथियों के बीच अनबन चल रही थी। वीरेंद्र सहवाग उप-कप्तान थे, और अफवाहें व्याप्त थीं कि उनके बीच विवाद हुआ था। हालांकि, धोनी ने अफवाहों को यह कहते हुए बंद कर दिया कि भारतीय मीडिया में मेरे और सहवाग के बीच दरार की हालिया रिपोर्ट झूठी और गैर-जिम्मेदार मीडिया रिपोर्टिंग के अलावा और कुछ नहीं है।

सचिन के बाद गांगुली व द्रविड़ हुए बाहर

धोनी ने टीम के लिए एक असामान्य "रोटेशन पॉलिसी' पेश की थी। धोनी ने कहा कि इस नीति से प्रत्येक सदस्य को फिट रहने और रन बनाने में मदद मिलेगी। हालांकि, धोनी ने यह भी कहा कि वह सचिन, सहवाग और गौतम गंभीर को एक ही टीम में नहीं रख सकते, क्योंकि वे मैदान पर धीमे हैं।

कुछ महीने बाद सचिन ने संन्यास ले लिया। खराब फॉर्म के कारण सहवाग और गंभीर को भी बाहर किया गया। इसके साथ ही, यह भी आरोप लगाया गया था कि गांगुली और द्रविड़ के वनडे टीम से बाहर होने के पीछे का कारण धोनी थे।

Edited By: Jitendra Singh