डर पर जीत की मिसाल: कभी सांपों से सहम जाती थीं रजनी, आज 2500 बेजुबानों के लिए बनी हैं जीवनदाता
जमशेदपुर की रजनी लाहेल ने अपने डर पर विजय पाकर 2500 से अधिक सांपों को बचाया है। वह बेजुबान जीवों ...और पढ़ें

बेजुबान जीवों की जान बचाने के जुनून ने रजनी को सांपों का कुशल रेस्क्यूअर बना दिया है।
HighLights
बचपन के डर को हराकर बनीं कुशल रेस्क्यूअर।
60 किलो के अजगर का सफल रेस्क्यू सबसे बड़ी चुनौती।
मनोज सिंह, जमशेदपुर। मां दुर्गा शक्ति, साहस और करुणा की प्रतीक हैं। नवरात्र के इन पवित्र दिनों में जब हर तरफ शक्ति स्वरूपा देवी की आराधना हो रही है, तब लौहनगरी जमशेदपुर की रजनी लाहेल समाज के सामने अनूठी मिसाल पेश कर रही हैं।
बेजुबान जीवों की जान बचाने के उनके जुनून ने उन्हें सांपों का कुशल रेस्क्यूअर बना दिया है। कभी सांपों को देखकर सिहर उठने वाली रजनी आज पेशेवर अंदाज में उनका रेस्क्यू करती हैं।
उन्हें सुरक्षित प्राकृतिक आवास (जंगल) में छोड़कर नया जीवन दे रही हैं। अब तक वह 2500 से अधिक सांपों को सुरक्षित बचा चुकी हैं।
डर पर जीत, सेवा को बनाया जुनून
रजनी बताती हैं कि बचपन से ही उन्हें प्रकृति और बेजुबान जीवों से गहरा लगाव था। शुरुआत में सांपों को देखकर डर स्वाभाविक था, लेकिन धीरे-धीरे अनुभव बढ़ा और उनका आत्मविश्वास भी मजबूत होता गया।
अब सांपों को सुरक्षित पकड़ना और उन्हें उनके प्राकृतिक परिवेश तक पहुंचाना उनके जीवन का अहम हिस्सा बन चुका है। उनका उद्देश्य केवल सांपों की जान बचाना भर नहीं है, बल्कि लोगों के दिलों में इन जीवों के प्रति बैठे डर और भ्रांतियों को दूर करना भी है।
उनका मानना है कि अक्सर लोग सांप देखते ही घबरा जाते हैं और उसे मारने की कोशिश करने लगते हैं। ऐसा करने के बजाय हमेशा किसी प्रशिक्षित रेस्क्यूअर को सूचना देनी चाहिए, ताकि सांप और इंसान दोनों सुरक्षित रहें।
वह लोगों को लगातार जागरूक करती हैं कि हर सांप जहरीला या खतरनाक नहीं होता, लेकिन बिना विशेषज्ञ की मदद के किसी भी सांप को खुद पकड़ने या छेड़ने का जोखिम नहीं उठाना चाहिए।
60 किलो का अजगर रहा सबसे बड़ी चुनौती

रजनी के लिए हर रेस्क्यू अभियान अपने आप में एक नई परीक्षा और रोमांच लेकर आता है। उनके अब तक के सफर में सबसे बड़ी चुनौती करीब 60 किलो वजनी एक विशाल अजगर था, जिसे उन्होंने बालीगुमा पुल के पास से सफलतापूर्वक रेस्क्यू किया था।
इतने भारी-भरकम और ताकतवर अजगर को सुरक्षित काबू में करना बेहद कठिन कार्य था, लेकिन उनके धैर्य, सूझबूझ और अनुभव ने इस चुनौती को भी आसान बना दिया।
कई बार जब वह अकेले या बड़े सांपों के रेस्क्यू के लिए निकलती हैं, तो लोग आश्चर्यचकित रह जाते हैं, हालांकि परिवार और परिचितों का निरंतर प्रोत्साहन उन्हें हर कदम पर मजबूती देता है।
डर नहीं, जागरूकता है जरूरी
प्रकृति के संतुलन में हर जीव की अपनी एक महत्वपूर्ण भूमिका होती है। सांपों को क्रूरता से मारने के बजाय उन्हें सुरक्षित बचाना हमारी जिम्मेदारी है।
दुर्गापूजा के इस विशेष पर्व पर रजनी लाहेल की यह प्रेरणादायक कहानी साबित करती है कि सच्ची शक्ति केवल शारीरिक बल में नहीं, बल्कि हर छोटे-बड़े जीव के प्रति करुणा और कर्तव्य निभाने में निहित है।
