विज्ञापन हटाएंसिर्फ खबर पढ़ें

'लोहे की छड़ और बोरा ही सहारा', बस्ती के 'सर्प मित्र' 3 बार सर्पदंश झेलने के बाद भी निभा रहे जान बचाने का फर्ज

Published: Tue, 06 Oct 2026 11:35 PM (GMT+05:30)

बस्ती के सर्प मित्र हरे राम ने अपनी आर्थिक तंगी के बावजूद लगभग 2500 सांपों को पकड़कर सुरक्षित स्थानों पर ...और पढ़ें

यह तस्वीर एआई के द्वारा बनाई गई है।

यह तस्वीर एआई के द्वारा बनाई गई है।

HighLights

  1. बस्ती के हरे राम ने बचाए 2500 से अधिक सांप।

  2. आर्थिक तंगी के बावजूद दूसरों की जान बचाने का जुनून।

  3. तीन बार सर्पदंश झेलकर भी नहीं छोड़ा सर्प बचाव कार्य।

अरुण सिंह, बस्ती। दूसरों की जान बचाने का जुनून ऐसा कि अपनी मुफलिसी भी आड़े नहीं आती। नगर पंचायत बभनान के लक्ष्मीबाई वार्ड निवासी हरे राम की पहचान क्षेत्र में सर्प मित्र के रूप में है। करीब 20 किलोमीटर के दायरे में कहीं भी सांप निकलने की सूचना मिलते ही लोग उन्हें याद करते हैं। अब तक वह करीब 2500 सांप पकड़कर सुरक्षित स्थान पर छोड़ चुके हैं।

खुद आर्थिक तंगी से जूझ रहे हरे राम के पास सिर छिपाने के लिए पक्की छत तक नहीं है। 31 वर्ष पहले पत्नी की मृत्यु हो चुकी है। इसके बावजूद उन्होंने दो बच्चों की जिम्मेदारी भी संघर्षों के बीच निभाई है।

हरे राम बताते हैं कि वर्ष 2005 में एक पड़ोसी ने घर में निकले सांप को मारने के लिए उन्हें बुलाया था। सांप को देखकर उनके मन में उसे मारने के बजाय बचाने की भावना जागी। उन्होंने पहली बार सांप को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर छोड़ दिया। इसके बाद शुरू हुआ सिलसिला आज भी जारी है।

ठेले पर भुजा बेचने का काम भी होता है प्रभावित
हरे राम ने बताया कि सांप पकड़ने में काफी समय लग जाता है। इसका सीधा असर उनके ठेले पर भुजा बेचने के काम पर पड़ता है और उस दिन की कमाई भी प्रभावित होती है। इसके बावजूद वह इसकी चिंता नहीं करते। कहीं से भी सांप निकलने की सूचना मिलते ही वह तत्काल मौके पर पहुंच जाते हैं। उनका कहना है कि उस समय उनके लिए किसी परिवार को सांप के खतरे से बचाना ही प्राथमिकता होती है।

उन्होंने बताया कि अब तक वह करीब 2500 से अधिक सांप पकड़कर सुरक्षित स्थानों पर छोड़ चुके हैं। भुजा बेचकर परिवार चलाने वाले हरे राम की जिंदगी अभावों से भरी है, लेकिन दूसरों की सुरक्षा के लिए उनका जज्बा कम नहीं हुआ है। अपनी रोजी-रोटी प्रभावित होने और जोखिम उठाने के बावजूद वह क्षेत्र में सर्प मित्र की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

लोहे की राड और बोरा ही संसाधन
सांप पकड़ने के लिए हरे राम के पास कोई विशेष उपकरण नहीं है। उनके पास संसाधन के नाम पर सिर्फ एक लोहे की राड और बोरा है। इसी के सहारे वह वर्षों से सांपों को सुरक्षित पकड़ते आ रहे हैं। इस दौरान सांप पकड़ते समय तीन बार उन्हें सर्पदंश का सामना भी करना पड़ा है। इसके बावजूद उन्होंने सांप पकड़ना नहीं छोड़ा।

अब तक वह कोबरा, करैत, रसेल वाइपर, चीतर, फेटार समेत कई प्रजातियों के जहरीले सांप पकड़ चुके हैं। सांप निकलने की सूचना पर लोग भरोसे के साथ उन्हें बुलाते हैं। हरे राम का कहना है कि सांप को मारने के बजाय सुरक्षित तरीके से पकड़कर आबादी से दूर छोड़ना चाहिए।

यह भी पढ़ें- बस्ती में मनोरमा नदी पर 15 करोड़ की लागत से बनेगा , निर्माण के लिए 7.78 करोड़ जारी