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    Jamshedpur News: फी को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाएंगे निजी स्कूल, आरक्षित वर्ग के एडमिशन पर संकट,पांच वर्षो में कुल 10 करोड़ बकाया

    By Ch Rao Edited By: Kanchan Singh
    Updated: Fri, 02 Jan 2026 06:01 PM (IST)

    जमशेदपुर के निजी स्कूल एसोसिएशन ने आरक्षित वर्ग के बच्चों की फीस वृद्धि और बकाया राशि को लेकर सुप्रीम कोर्ट जाने का फैसला किया है। वे वर्तमान 425 रुपय ...और पढ़ें

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    एसोसिएशन आफ झारखंड अनएडेड प्राइवेट एजुकेशन इंस्टिट्यूशंस व निजी स्कूल प्रबंधन ने प्रेस वार्ता कर दी जानकारी।

    जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। निजी स्कूल एसोसिएशन की बैठक नर्भेराम हंसराज इंग्लिश स्कूल बिष्टुपुर में शुक्रवार को आयोजित की गई। बैठक में लिये गये निर्णय की जानकारी को लेकर प्रेस वार्ता भी एसोसिएशन आफ झारखंड अनएडेड प्राइवेट एजुकेशन इंस्टिट्यूशंस व निजी स्कूल प्रबंधन की ओर से की गई।

    इसमें मुख्य मुद्दा टाटा लीज एरिया के अंतर्गत कमजोर एवं अभिवंचित वर्ग (आरक्षित वर्ग) के बच्चों के नामांकन, बकाया फीस एवं फीस बढ़ोत्तरी का रहा।

    प्रेस वार्ता में इसकी जानकारी देते हुए एसोसिएशन के चेयरमैन नकुल कमानी व सचिव डा. श्रीकांत नायर, उपाध्यक्ष ज्ञान तनेजा, शरत चंद्रन, कोषाध्यक्ष आरके झुनझुनवाला, सदस्य शशि झटकिया, राजीव तलवार ने बताया कि निजी स्कूल अब आरक्षित वर्ग के बच्चों को निश्शुल्क पढ़ाने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं।

    सरकार द्वारा निर्धारित राशि भी उन्हें मान्य नहीं है। स्कूलों को कम से कम एक सम्मानजनक राशि चाहिए। आरक्षित वर्ग के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए 425 रुपये किसी भी तरह से जायज नहीं है।

    बकाया राशि एवं आरक्षित वर्ग के बच्चों के शुल्क में बढ़ोत्तरी की मांग को लेकर निजी स्कूल एसोसिएशन सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। कोर्ट के स्टे आर्डर मिलने के उपरांत नए शैक्षणिक सत्र में आरक्षित वर्ग के बच्चों का एडमिशन भी नहीं लेंगे।

    प्रेस वार्ता में यह भी स्पष्ट किया गया है कि अब निजी स्कूल आर्थिक नुकसान सहने की स्थिति में नहीं है। सरकार ने आरक्षित वर्ग के बच्चों की फीस नहीं देने का निर्णय लिया है। अगर मामले में कुछ हल नहीं निकला तो इसका बोझ 75 प्रतिशत अभिभावकों पर पड़ना तय है।

    इसका अर्थ यह हुआ कि निजी स्कूल ट्यूश्न फीस एवं अन्य फीस में कम से कम 20 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी करेंगे। एसोसिएशन के पदाधिकारियों का साफ कहना था कि जब आरक्षित वर्ग के बच्चों की फीस का 60 प्रतिशत अंश केंद्र व 40 प्रतिशत अंक राज्य सरकार देती है।

    ऐसे में राज्य सरकार सम्मानजनक राशि आरक्षित वर्ग के बच्चों को देने का निर्णय क्यों नहीं ले रही है, जबकि इसकी मांग एसोसिएशन दस वर्ष से कर रहा है।

    नियम पालन नहीं तो होगी दंडात्मक कार्रवाई

    जिला शिक्षा अधीक्षक आशीष कुमार पांडे ने निजी स्कूल एसोसिएशन के फैसले पर कहा कि निजी स्कूलों को सरकार के नियम कानून के हिसाब से चलना होगा। जहां तक कोर्ट जाने की बात वे स्वतंत्र हैं। हमें सरकार के निर्देशों का पालन करना है।

    टाटा लीज एरिया के स्कूल सरकार के अनुदान की श्रेणी में आते हैं। इस कारण आरक्षित वर्ग के बच्चों की फीस नहीं दी जा रही है। टाटा लीज एरिया के बाहर के स्कूलों में पढ़ रहे बच्चों की फीस नियमानुसार दी जा रही है।

    आरटीई के नियमों का पालन नहीं तो दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। फीस भी अपनी मर्जी से नहीं बढ़ा सकते, इसके लिए अनुमति लेनी होगी।