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    पहचान चोरी कर साइबर ठगों ने डकारे 26 लाख, जमशेदपुर में सिद्धार्थ अपार्टमेंट के पते पर हुआ फर्जीवाड़ा

    Updated: Thu, 01 Jan 2026 03:15 PM (IST)

    झारखंड में साइबर ठगों ने पहचान चोरी कर 26 लाख रुपये का फर्जी लोन लिया। धनबाद के व्यवसायी चंद्रप्रकाश शर्मा के आधार-पैन कार्ड क्लोन कर जमशेदपुर के बिष् ...और पढ़ें

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    फाइल फोटो।

    जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। झारखंड में साइबर अपराधियों के हौसले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। अब ठगों ने सिर्फ बैंक खातों या ओटीपी तक सीमित न रहते हुए लोगों की पहचान ही चोरी करनी शुरू कर दी है। 
     
    ऐसा ही एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है, जिसमें धनबाद जिले के राजगंज निवासी व्यवसायी चंद्रप्रकाश शर्मा के दस्तावेजों का दुरुपयोग कर करीब 26 लाख रुपये का फर्जी लोन ले लिया गया।
     
    साइबर ठगों ने व्यवसायी के आधार कार्ड और पैन कार्ड को क्लोन कर उसमें अपनी तस्वीर लगा दी। इसके बाद जमशेदपुर के बिष्टुपुर स्थित सिद्धार्थ अपार्टमेंट को अपना पता दर्शाते हुए शहर की नामी-गिरामी फाइनेंस कंपनियों से वाहन और पर्सनल लोन मंजूर करा लिए गए। 
     
    हैरानी की बात यह है कि किसी भी वित्तीय संस्था ने भौतिक सत्यापन की प्रक्रिया को गंभीरता से नहीं अपनाया। जांच में सामने आया है कि जालसाजों ने चोला इन्वेस्टमेंट से 14.66 लाख रुपये का वाहन लोन, इंडोस्टार से 5.50 लाख रुपये का कमर्शियल वाहन लोन, पूनावाला फिनकार्प से 4.89 लाख रुपये का कार लोन और एलएंडटी फाइनेंस से 84 हजार रुपये का बाइक लोन लिया। 
     
    इसके अलावा सात अन्य वित्तीय संस्थानों से भी लोन लेने का प्रयास किया गया था। मामले का खुलासा तब हुआ, जब लोन की ईएमआई नहीं चुकाए जाने पर रिकवरी एजेंटों ने असली व्यवसायी चंद्रप्रकाश शर्मा को फोन करना शुरू किया। 
     
    लगातार कॉल आने पर पीड़ित ने अपना सिबिल स्कोर चेक कराया, तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। उनके नाम पर जमशेदपुर से कई वाहन और लोन दर्ज थे, जिनकी उन्हें कोई जानकारी नहीं थी। 
     
    इस घटना ने वित्तीय संस्थानों की सुरक्षा व्यवस्था और वेरिफिकेशन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। सवाल यह भी है कि फेस मैचिंग सॉफ्टवेयर, केवाईसी प्रक्रिया और पते के सत्यापन के दौरान इतनी बड़ी चूक कैसे हो गई। 
     
    क्या सिद्धार्थ अपार्टमेंट के गार्ड, पड़ोसियों या स्थानीय स्तर पर किसी से भी पुष्टि नहीं की गई? पीड़ित का कहना है कि फाइनेंस कंपनियों के टारगेट और कमीशन के दबाव में उनकी वर्षों की साख एक झटके में खराब हो गई। 
     
    फिलहाल पुलिस वाहन नंबरों, लोन दस्तावेजों और जमशेदपुर में दिए गए पते के आधार पर साइबर ठगों की तलाश में जुटी है।




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