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    आइएसएल पर रार, जेएफसी की हां, बाकी क्लबों ने शर्तों के साथ फंसाया पेंच, एआईएफएफ और क्लब आमने-सामने

    Updated: Thu, 01 Jan 2026 08:12 PM (IST)

    भारतीय फुटबॉल में आईएसएल 2025-26 सत्र को लेकर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है। डेडलाइन खत्म होने के बावजूद केवल जमशेदपुर एफसी ने बिना शर्त खेलने की सहमति दी ...और पढ़ें

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    जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। भारतीय फुटबॉल के लिए एक जनवरी 2026 का दिन बड़े मतभेद और अनिश्चितता का गवाह बन गया। अखिल भारतीय फुटबॉल महासंघ (एआईएफएफ) द्वारा इंडियन सुपर लीग (आईएसएल) 2025-26 सत्र को लेकर तय की गई डेडलाइन खत्म हो चुकी है, लेकिन तस्वीर अब भी साफ नहीं हो पाई है। 
     
    तय समयसीमा तक केवल टाटा स्टील के स्वामित्व वाले जमशेदपुर एफसी (जेएफसी) ने बिना किसी शर्त के लीग में भाग लेने की आधिकारिक सहमति दी है, जबकि देश के अन्य 13 क्लबों ने एआईएफएफ के सामने शर्तों और सवालों की लंबी सूची रख दी है। 
     
    जमशेदपुर एफसी ने भारतीय फुटबॉल के व्यापक हित में किसी भी प्रारूप में खेलने की प्रतिबद्धता जताते हुए सकारात्मक रुख अपनाया है। इसके उलट मोहन बागान, ईस्ट बंगाल, मुंबई सिटी एफसी, ओडिशा एफसी समेत अन्य 13 क्लबों ने संयुक्त रूप से एआईएफएफ को पत्र लिखकर स्पष्टता की मांग की है। 
     
    इन क्लबों का कहना है कि वे लीग खेलने के विरोध में नहीं हैं, लेकिन पहले यह बताया जाए कि आईएसएल का कमर्शियल पार्टनर कौन होगा और आयोजन से जुड़ा भारी खर्च कौन वहन करेगा। 
     
    इस विवाद की जड़ मास्टर राइट्स एग्रीमेंट (एमआरए) और वित्तीय ढांचे में फंसी अनिश्चितता है। अब तक फुटबॉल स्पोर्ट्स डेवलपमेंट लिमिटेड (एफएसडीएल) आईएसएल का आयोजक और व्यावसायिक भागीदार रहा है, जो प्रसारण, उत्पादन और संचालन का अधिकांश खर्च उठाता था। 
     
    एआईएफएफ और एफएसडीएल के बीच कानूनी विवाद और एमआरए के नवीनीकरण में देरी के कारण लीग की तैयारियां ठप पड़ी हैं। क्लबों को आशंका है कि यदि कोई कमर्शियल पार्टनर नहीं मिला तो प्रति क्लब करीब 2.5 करोड़ रुपये तक का आर्थिक बोझ उन पर डाल दिया जाएगा। 
     
    इस बीच गुरुवार से लागू हुए नेशनल स्पोर्ट्स गवर्नेंस एक्ट, 2025 ने क्लबों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है। नए कानून के तहत वित्तीय पारदर्शिता और दीर्घकालिक स्थिरता अनिवार्य है। 
     
    क्लब जानना चाहते हैं कि एआईएफएफ का रोडमैप इस कानून के अनुरूप कैसे होगा। क्लबों ने महासंघ द्वारा दिए गए 24 घंटे के अल्टीमेटम को भी अव्यावहारिक बताया है। 
     
    विवाद का असर एशियाई प्रतियोगिताओं पर भी पड़ सकता है। एएफसी चैंपियंस लीग समेत अन्य टूर्नामेंटों के लिए एक सीजन में न्यूनतम 24 मैच खेलना जरूरी है। 
     
    क्लबों ने मांग की है कि एआईएफएफ एएफसी से एक बार की छूट दिलाने की पहल करे, क्योंकि मौजूदा हालात में इतना मैच आयोजन संभव नहीं दिख रहा। फिलहाल जमशेदपुर एफसी को छोड़कर भारतीय क्लब फुटबॉल एकजुट होकर एआईएफएफ से स्पष्ट जवाब की प्रतीक्षा कर रहा है।
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