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    जलाशय से निकला "पानी का दानव", जाल डाला मछली के लिए, निकल आया रहस्यमय कछुआ! कैमरे में कैद हुआ रोमांच

    Updated: Mon, 05 Jan 2026 08:57 PM (IST)

    पश्चिम मेदिनीपुर के दासपुर प्रखंड में एक मछुआरे के जाल में मछली की जगह लगभग 50 किलोग्राम का विशाल कछुआ फंस गया। जाल फटने के बाद मछुआरे ने वन विभाग को ...और पढ़ें

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    पश्चिम मेदिनीपुर जिले के कोल्टिकरी इलाके में जलाशय में निकला विशाल कछुआ।

    जागरण संवाददाता, खड़गपुर। पश्चिम मेदिनीपुर जिले के दासपुर प्रखंड अंतर्गत कोल्टिकरी इलाके में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब एक मछुआरे के जाल में मछली की जगह लगभग 50 किलोग्राम वजनी विशालकाय कछुआ फंस गया। रोज की तरह मछली पकड़ने निकले मछुआरे को क्या पता था कि उस दिन उसका सामना पानी के भीतर छिपे एक ‘जलकाय’ से होने वाला है। 

    प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मछुआरे ने जैसे ही जाल डाला, उसे अचानक असामान्य रूप से तेज खिंचाव महसूस हुआ। पहले तो उसे लगा कि जाल में भारी मात्रा में मछली फंस गई है, लेकिन कुछ ही पलों में हालात बदल गए। 

    मछली पकड़ने का जाल फट गया 

    पानी की सतह पर हलचल बढ़ी और देखते ही देखते एक विशाल कछुआ जाल में फंसा नजर आया। भारी वजन और छटपटाहट के कारण मछली पकड़ने का जाल फट गया, जिससे मछुआरे के चेहरे पर हैरानी के साथ चिंता भी साफ झलकने लगी।
     
    हालांकि मछुआरे ने सूझबूझ दिखाते हुए कोई जोखिम भरा कदम नहीं उठाया। उसने तुरंत वन विभाग को इसकी सूचना दी और कछुए को सुरक्षित रखने का प्रयास किया।  

    जांच में जुटा वन विभाग  

    कुछ ही देर में वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची और कछुए को सावधानीपूर्वक अपने कब्जे में ले लिया। वन विभाग के अधिकारियों ने बताया कि कछुए की प्रजाति, उम्र और स्वास्थ्य की जांच की जा रही है। 
     
    प्रारंभिक तौर पर कछुआ स्वस्थ प्रतीत हो रहा है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सभी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद कछुए को उसके प्राकृतिक आवास में सुरक्षित रूप से छोड़ दिया जाएगा, ताकि उसे किसी प्रकार की क्षति न पहुंचे। 

    मछुआरों से विशेष अपील 

    इस घटना के बाद वन विभाग ने इलाके के मछुआरों से अपील की है कि यदि भविष्य में इस तरह का दुर्लभ या बड़ा जलीय जीव उनके जाल में फंस जाए, तो घबराएं नहीं और न ही खुद से कोई कठोर कदम उठाएं। तुरंत वन विभाग को सूचना दें, ताकि वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके। 

    इस अनोखी घटना ने पूरे इलाके में वन्यजीव संरक्षण और जैव विविधता को लेकर नई बहस छेड़ दी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि जलाशयों में ऐसे दुर्लभ जीवों की मौजूदगी इस बात का संकेत है कि प्राकृतिक संतुलन अब भी कायम है, जिसे बचाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है।