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    झारखंड में इस जगह 100 करोड़ से बनेगा पहला ग्लास ब्रिज और हैंगिंग रेस्टोरेंट, 'बादलों' संग करेंगे दावत

    Updated: Fri, 02 Jan 2026 11:16 PM (IST)

    दलमा वन्यप्राणी आश्रयणी में 100 करोड़ रुपये की लागत से झारखंड का पहला ग्लास ब्रिज और हैंगिंग रेस्टोरेंट बनेगा। यह परियोजना दलमा को रोमांचक पर्यटन स्थल ...और पढ़ें

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    इस तरह बनेगा ग्लास ब्रिज। (जागरण)

    जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। शांत और हरी-भरी वादियों के लिए मशहूर दलमा वन्यप्राणी आश्रयणी अब केवल हाथियों का घर नहीं, बल्कि रोमांच के शौकीनों का नया ठिकाना बनने जा रही है।

    प्रकृति की खामोशी के बीच जल्द ही एडवेंचर की गूंज सुनाई देगी। नए साल में झारखंड के पर्यटन मानचित्र पर एक सुनहरा अध्याय जुड़ने वाला है।

    विभाग ने दलमा में 100 करोड़ रुपये की लागत से सूबे का पहला ग्लास ब्रिज और हैंगिंग रेस्टोरेंट बनाने की योजना तैयार की है। कल्पना कीजिए, पैरों के नीचे गहरी खाई, सिर के ऊपर नीला आसमान और चारों तरफ घना जंगल, इस रोमांचक अनुभव को हकीकत में बदलने की तैयारी पूरी हो चुकी है।

    दो पहाड़ों के बीच कांच का गलियारा : हवा में चलने का अहसास

    दलमा के डीएफओ सबा आलम अंसारी ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना की रूपरेखा साझा की। उन्होंने बताया कि यह ग्लास ब्रिज बिहार के राजगीर और चीन के प्रसिद्ध हांग्जो ब्रिज की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। यह पारदर्शी पुल दलमा के टॉप पर स्थित प्राचीन शिव मंदिर के पास बनेगा।

    करीब 200 फीट लंबा यह ब्रिज दो पहाड़ियों को जोड़ेगा, जिसके नीचे गहरी खाई होगी। जब पर्यटक इस पारदर्शी कांच पर कदम रखेंगे, तो उन्हें जमीन पर नहीं, बल्कि हवा में तैरने का अहसास होगा।

    यह संरचना इंजीनियरिंग और प्रकृति का एक अद्भुत संगम होगी, जहां से दलमा की नैसर्गिक सुंदरता का 360 डिग्री नजारा (विहंगम दृश्य) देखा जा सकेगा।

    बादलों के संग दावत : हैंगिंग रेस्टोरेंट का अनूठा अनुभव

    ग्लास ब्रिज के रोमांच के बाद पर्यटकों के लिए हैंगिंग रेस्टोरेंट यानी झूलता हुआ रेस्तरां आकर्षण का केंद्र होगा। यह झारखंड में अपनी तरह का पहला प्रयोग होगा। पहाड़ी की चोटी से सटे हुए स्ट्रक्चर पर इसे तैयार किया जाएगा। जमीन से करीब 35 से 100 फीट की ऊंचाई पर बने इस रेस्टोरेंट में बैठकर भोजन करना किसी रोमांचक फिल्म का हिस्सा बनने जैसा होगा।

    डीएफओ के मुताबिक, यह लक्जरी डाइनिंग और एडवेंचर का बेहतरीन मिश्रण होगा। पर्यटक यहां न केवल लजीज व्यंजनों का स्वाद लेंगे, बल्कि ऊंचाई से जंगल के मनोरम दृश्यों को भी अपनी यादों में कैद कर सकेंगे।

    सुकून के पल : जंगल की गोद में 30 नए नेस्ट

    रोमांच के साथ-साथ पर्यटकों के आराम का भी पूरा ख्याल रखा गया है। अक्सर पर्यटक दलमा में रात्रि विश्राम की चाह रखते हैं, लेकिन सुविधाओं की कमी आड़े आती थी। इस समस्या को दूर करने के लिए विभाग ने 30 नए और आधुनिक कॉटेज बनाने का फैसला किया है।

    इसके लिए 12 करोड़ रुपये की राशि अलग से स्वीकृत हो चुकी है। ये कॉटेज प्रकृति के अनुकूल बनाए जाएंगे, ताकि पर्यटक शहरी शोर-शराबे से दूर जंगल की शांति को महसूस कर सकें।

    स्थानीय जीवन में आएगा बदलाव, खुलेंगे रोजगार के द्वार

    यह परियोजना केवल पर्यटन को बढ़ावा देने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह स्थानीय अर्थव्यवस्था के लिए संजीवनी साबित होगी। डीएफओ सबा आलम अंसारी ने बताया कि जब पर्यटकों की आवाजाही बढ़ेगी, तो स्थानीय उत्पादों की मांग भी बढ़ेगी।

    वर्तमान में यहां के ग्रामीण दोना-पत्तल, महुआ का अचार और टी-शर्ट बेचकर आजीविका चलाते हैं। विश्व स्तरीय पर्यटन सुविधाएं विकसित होने से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और उनकी आमदनी में इजाफा होगा।

    नए साल में दलमा को एक अंतरराष्ट्रीय स्तर के पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने का लक्ष्य है। ग्लास ब्रिज और हैंगिंग रेस्टोरेंट का प्रस्ताव तैयार कर स्वीकृति के लिए मुख्यालय भेजा गया है। 100 करोड़ की इस परियोजना को मंजूरी मिलते ही धरातल पर उतारने का काम शुरू कर दिया जाएगा। हमारा प्रयास है कि पर्यटक यहां से एक अविस्मरणीय याद लेकर लौटें।

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    सबा आलम अंसारी, डीएफओ, दलमा वन्य प्राणी आश्रयणी