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    Tata Steel: हेमंत सरकार के खिलाफ टाटा स्टील की बड़ी जीत, हाईकोर्ट ने दिया 1.23 करोड़ का GST रिफंड का आदेश

    Updated: Wed, 09 Apr 2025 08:50 AM (IST)

    झारखंड हाईकोर्ट ने टाटा स्टील को 1.23 करोड़ रुपये का रिफंड देने का आदेश दिया है। यह राशि कंपनी द्वारा कोयले की खरीद पर चुकाए गए मुआवजा उपकर पर इनपुट टैक्स क्रेडिट के रूप में थी। कोर्ट ने राज्य सरकार के रिफंड खारिज करने के आधारों को विधिसम्मत नहीं माना और कंपनी को निर्धारित ब्याज देने का निर्देश दिया है। कोर्ट ने सरकार का फैसला पलट दिया है ¹।

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    टाटा स्टील को हाईकोर्ट से राहत (जागरण)

    जागरण संवाददाता, जमशेदपुर। Jharkhand News: झारखंड हाईकोर्ट ने टाटा स्टील को जीएसटी कानून के तहत 1.23 करोड़ रुपये का रिफंड दिए जाने का आदेश जारी किया है। यह राशि कंपनी द्वारा कोयले की खरीद पर चुकाए गए मुआवजा उपकर (कंपनसेशन सेस) पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आइटीसी) के रूप में थी।

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    कोर्ट ने पाया कि राज्य सरकार ने रिफंड खारिज करने के जो आधार प्रस्तुत किए, वे विधिसम्मत नहीं बल्कि ‘बाह्य और असंगत’ थे। साथ ही, कोर्ट ने कंपनी को सीजीएसटी अधिनियम की धारा 56 के अंतर्गत निर्धारित ब्याज भी देने का निर्देश दिया है।

    कोर्ट ने सरकार का फैसला पलटा

    मुख्य न्यायाधीश एमएस रामचंद्र राव और जस्टिस दीपक रोशन की खंडपीठ ने राज्य सरकार के फैसले को पलटते हुए कहा कि रिफंड रोकने के लिए दिए गए पांचों आधार कानूनन टिकाऊ नहीं हैं। कोर्ट ने इसे अनुचित और गैर-कानूनी करार दिया। पहला आधार था कि निर्यात के 180 दिनों के भीतर भुगतान का सबूत नहीं दिया गया।

    कोर्ट ने क्या कहा?

    कोर्ट ने स्पष्ट किया कि यह नियम केवल सेवाओं के निर्यात पर लागू होता है, वस्तुओं पर नहीं। टाटा स्टील ने माल के निर्यात के लिए शिपिंग बिल और चालान का मिलान पहले ही जमा कर दिया था।  दूसरा, सरकार ने कहा कि चालान के 90 दिनों के भीतर निर्यात का सबूत नहीं मिला, लेकिन कोर्ट ने पाया कि कंपनी के दस्तावेजों में निर्यात सामान्य मैनिफेस्ट (ईजीएम) की जानकारी मौजूद है, जो 90 दिनों के भीतर निर्यात की पुष्टि करता है।

    2023 के सरकारी परिपत्र का हवाला देते हुए कोर्ट ने कहा कि अगर माल वास्तव में निर्यात हुआ है, तो समय सीमा से परे भी रिफंड मिल सकता है।  तीसरे आधार में गैर-मुकदमेबाजी की घोषणा मांगी गई थी, जिसे कोर्ट ने खारिज करते हुए कहा कि कानून में ऐसी कोई शर्त नहीं है।

    फिर भी, टाटा ने विभाग के नोटिस के जवाब में यह घोषणा दी थी। चौथा, सरकार ने उपकर अधिनियम की धारा 11(2) के तहत वचनपत्र की मांग की थी। कोर्ट ने इसे भी खारिज किया, क्योंकि टाटा स्टील ने बिना टैक्स चुकाए निर्यात किया था, इसलिए उपकर का समायोजन का सवाल ही नहीं उठता। आखिरी आधार में 2019 के परिपत्र के पैरा 43(सी) के तहत बयान मांगा गया था।

    कोर्ट ने कहा कि यह नियम क्रेडिट वापसी के मामलों पर लागू होता है, जो यहां नहीं था। कोर्ट ने निष्कर्ष दिया कि राज्य सरकार का रिफंड रोकने का आदेश कानून के खिलाफ है। टाटा स्टील को यह राशि केंद्रीय जीएसटी अधिनियम की धारा 56 के तहत तय ब्याज के साथ लौटाने का निर्देश दिया गया।

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