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    जेपी कारा में फॉरेंसिक टीम पर साक्ष्य जुटाने का जिम्मा; सक्रिय हुई टेक्निकल टीम, खंगाला जा रहा 24 घंटे का कॉल डंप

    Updated: Thu, 01 Jan 2026 05:47 AM (IST)

    जेपी कारा हजारीबाग से कैदी के फरार होने के बाद पुलिस और प्रशासन पर गंभीर सवाल उठे हैं। इस मामले की जांच के लिए विशेष टास्क फोर्स (एसटीएफ) का गठन किया ...और पढ़ें

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    संवाद सहयोगी, हजारीबाग। वर्ष के अंतिम दिन जेपी कारा हजारीबाग से सजायाफ्ता कैदी के फरार होने की घटना ने पुलिस और जिला प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। यह मामला अब महज एक फरारी की घटना न रहकर प्रशासन की प्रतिष्ठा से जुड़ गया है। घटना के उद्भेदन और दोषियों तक पहुंचने के लिए पुलिस ने जांच की रफ्तार तेज कर दी है।

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    मामले की गंभीरता को देखते हुए विशेष टास्क फोर्स (एसटीएफ) का गठन किया गया है, जिसमें अनुभवी अधिकारियों और कर्मियों को शामिल किया गया है। एसपी के निर्देश पर टेक्निकल टीम को पूरी तरह सक्रिय कर दिया गया है। टीम को फरारी से पूर्व और बाद के 24 घंटे का कॉल डंप निकालने का जिम्मा सौंपा गया है। जेल परिसर और आसपास सक्रिय रहे प्रत्येक मोबाइल नंबर की गहन जांच की जा रही है।

    पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि फरार कैदी किसी बाहरी संपर्क में तो नहीं था और क्या उसे भागने में किसी प्रकार की तकनीकी या मानवीय सहायता मिली। वहीं फॉरेंसिक टीम को जेल परिसर से साक्ष्य एकत्रित करने का दायित्व सौंपा गया है। टीम द्वारा बैरक, बाथरूम, दीवार, कटे हुए रॉड, गेट और संभावित रास्तों की बारीकी से जांच की जा रही है।

    घटनास्थल से मिले हर छोटे-बड़े सुराग को वैज्ञानिक तरीके से संकलित कर विश्लेषण किया जा रहा है, ताकि फरारी की पूरी कड़ी स्पष्ट हो सके। जानकारी के अनुसार, जांच और धरपकड़ के लिए पांच अलग-अलग टीमों का गठन किया गया है। ये टीमें संभावित ठिकानों, सीमावर्ती इलाकों और पूर्व आपराधिक नेटवर्क पर लगातार दबिश दे रही हैं।

    देर रात तक पुलिस पदाधिकारियों की टीमें विभिन्न दिशाओं में रवाना होती रहीं। पुलिस हर उस पहलू की जांच कर रही है, जो कैदी के भागने से लेकर रास्ता बनाने में सहायक रहा हो। इस दौरान जेपी कारा के कर्मियों की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। जेल कर्मचारियों की मिलीभगत की आशंका को लेकर पूछताछ और आंतरिक जांच शुरू कर दी गई है।

    बुधवार को जांच और सख्ती का असर जेल परिसर में साफ दिखाई दिया। जेपी कारा के सभी कर्मी अलर्ट मोड में नजर आए। सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई और जेल के आसपास अनावश्यक आवाजाही पर रोक लगाई गई। यहां तक कि पत्रकारों को भी परिसर के नजदीक भटकने से रोका गया। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि मामले का जल्द ही खुलासा किया जाएगा और दोषियों को किसी भी सूरत में बख्शा नहीं जाएगा।