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    Hazaribagh Police: झारखंड, बिहार और बंगाल की खाक छान रही पुलिस, जेल से फरार तीन बंदियों का नहीं मिला सुराग

    By Vikash Singh Edited By: Kanchan Singh
    Updated: Sun, 04 Jan 2026 03:56 AM (IST)

    हजारीबाग की जेपी कारा से चादर के सहारे फरार हुए तीन बंदियों का चार दिन बाद भी कोई सुराग नहीं मिला है। पुलिस की छह विशेष टीमें झारखंड, बिहार और पश्चिम ...और पढ़ें

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     जेपी कारा से फरार तीन बंदियों की तलाश में पुलिस को चार दिन बीत जाने के बाद भी कोई बड़ी सफलता नहीं मिली है।

    संवाद सूत्र,हजारीबाग जेपी कारा से चादर के सहारे फरार हुए तीन बंदियों की तलाश में पुलिस को चार दिन बीत जाने के बाद भी कोई बड़ी सफलता नहीं मिली है। फरार कैदियों की गिरफ्तारी के लिए गठित छह विशेष जांच दल (एसआईटी) लगातार छापेमारी कर रहे हैं, लेकिन अब तक पुलिस के हाथ खाली हैं। हालांकि सूत्रों का दावा है कि पुलिस अपराधियों के काफी करीब पहुंच चुकी है।

    सीसीटीवी फुटेज और कॉल डंप के सहारे जांच

    फरार कैदियों की तलाश में पुलिस सीसीटीवी फुटेज और मोबाइल कॉल डंप को आधार बनाकर कार्रवाई कर रही है। जेल से बाहर निकलने के बाद अपराधियों ने किस रास्ते का इस्तेमाल किया, किन-किन लोगों से संपर्क में रहे, इसे लेकर तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस ने कई संभावित ठिकानों को चिह्नित किया है। झारखंड के धनबाद समेत बिहार और पश्चिम बंगाल के कई इलाकों में लगातार छापेमारी की जा रही है।

    परिजनों से पूछताछ, पुराने नेटवर्क खंगाल रही पुलिस

    अब तक मिली जानकारी के अनुसार पुलिस ने फरार कैदियों के परिजनों को हिरासत में लेकर पूछताछ की है। खासकर देवा के पुराने आपराधिक इतिहास और उसके नेटवर्क को ध्यान में रखते हुए पुलिस उसके संपर्कों की गहन जांच कर रही है। सूत्रों का कहना है कि देवा के कुछ पुराने सहयोगी अब भी पुलिस के रडार पर हैं, जिनके जरिए फरार कैदियों तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है।

    हजारीबाग से पुराने संबंध की कड़ी

    जांच के दौरान यह बात भी सामने आई है कि देवा का हजारीबाग से पुराना संबंध रहा है। वह यहां कई माह तक रह चुका है। ऐसे में पुलिस इस आशंका पर भी काम कर रही है कि फरारी के बाद वह अपने साथियों के साथ हजारीबाग में ही कुछ समय तक छिपा रहा हो। शहर छोड़ने में उसकी मदद करने वाले युवक की भी तलाश तेज कर दी गई है।

    जेल प्रशासन पर भी गिरी गाज

    दूसरी ओर जेपी कारा प्रशासन की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। जेल के भीतर लगातार आंतरिक जांच और कार्रवाई की जा रही है। कई पूर्व जेलकर्मी और सुरक्षाकर्मी अब भी जांच के दायरे में हैं। जेल अधीक्षक सीपी सुमन पूरे मामले पर चुप्पी साधे हुए हैं। सुरक्षा के मद्देनजर जेल के प्रवेश द्वार पर सख्ती बढ़ा दी गई है और बाहरी लोगों के प्रवेश पर रोक लगा दी गई है।

    सुरक्षा व्यवस्था की खुली पोल

    चादर को रस्सी बनाकर और हेक्सा ब्लेड से जेल की खिड़की काटकर फरार हुए कैदियों ने जेपी कारा की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोल दी है। जेल में 64 से अधिक जवान तैनात हैं और हर माह करीब 10 लाख रुपये सुरक्षा पर खर्च होते हैं। इसके बावजूद तीन कैदियों का ऊंची दीवार फांदकर फरार हो जाना जेल सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।