हजारीबाग में 100 मुखिया और पूर्व मुखिया पर सर्टिफिकेट केस दर्ज, वसूली जाएगी 1 करोड़ से अधिक की राशि
हजारीबाग में स्वच्छ भारत मिशन योजना में गड़बड़ी के चलते 100 से अधिक मुखिया और पूर्व मुखिया पर सर्टिफिकेट केस दर्ज किया गया है। उनसे एक करोड़ से अधिक की राशि वसूली जाएगी। कोरोना काल में सामुदायिक शौचालय निर्माण में अनियमितता पाई गई जिसके बाद पेयजल स्वच्छता विभाग ने यह कार्रवाई की है। कई नोटिस के बाद भी उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं दिए गए।

विकास कुमार, हजारीबाग। कोरोना काल के दौरान केंद्र सरकार की ओर से चलाई गई स्वच्छ भारत मिशन की योजनाओं में भारी गड़बड़ी सामने आई है।
इस योजना के करीब पांच साल बाद पेयजल स्वच्छता विभाग की नींद टूटी है और अब इन पंचायत प्रतिनिधियों पर कार्रवाई की कवायद की जा रही है।
दर्ज हुआ सर्टिफिकेट केस
इसके तहत ही जिले के 100 के करीब मुखिया और पूर्व मुखिया पर अप्रैल माह में सर्टिफिकेट केस दर्ज किया गया है। साथ ही इन सभी को एक करोड़ से अधिक की राशि वसूलने को लेकर नोटिस थमा दिया गया है। बताया जाता है कि यह राशि और भी बढ़ सकती है।
यह पूरा मामला 2019-20 का है। भारत सरकार ने कोरोना काल में हजारीबाग, गिरिडीह और गोड्डा जिले में एक्सट्रा बजटरी रिसोर्स के तरह 200-200 सामुदायिक शौचालय बनाने का लक्ष्य दिया था।
इसके लिए चार-चार करोड़ की राशि जिलों को स्वीकृत की गई थी। हजारीबाग में करीब 200 पंचायतों में शौचालय बनाने के लिए राशि भेजी गई।
लेकिन, आवंटित राशि निकाल लिए जाने के बाद इन सभी पंचायत प्रतिनिधियों से शौचालय निर्माण संबंधित उपयोगिता प्रमाण पत्र मांगा गया तो इन्होंने हाथ खड़े कर दिए।
कई बार भेजा गया नोटिस
बताया जाता है कि वर्ष 2024 में कई बार विभाग से इन्हें नोटिस भेजा गया। लेकिन, कुछ प्रतिनिधियों को छोड़कर अन्य किसी ने उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं दिया। वहीं, विभाग ने जब छानबीन की तो कहीं शौचालय आधे अधूरे बने मिले तो कहीं एक ईंट भी जुड़ी नहीं मिली।
इसके बाद ही डपोक, केदारूत, दरिया, कुसुंभा, तेजपुर, आंगो, रोमी, डूमर, लुपुंग समेत 100 के करीब पूर्व व वर्तमान पंचायत प्रतिनिधियों पर कार्रवाई की गई है। जानकारी के मुताबिक हजारीबाग की तरह ही गिरिडीह और गोड्डा जिले में भी यही खेल हुआ है।
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