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    Godda News: गोड्डा के लोगों की हो गई बल्ले-बल्ले! हेमंत सरकार ने पर्यटन और रोजगार को लेकर दे दी बड़ी खुशखबरी

    Updated: Mon, 14 Apr 2025 11:09 PM (IST)

    Jharkhand News झारखंड के मंत्री संजय प्रसाद यादव ने कहा कि बसंतराय तालाब जल्द ही पर्यटन स्थल बनेगा और बिसुआ मेला को राजकीय दर्जा मिलेगा। तालाब का सौंदर्यीकरण किया जाएगा जिससे रोजगार और पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। हर साल 14 अप्रैल को लाखों श्रद्धालु यहां स्नान करते हैं। आदर्श सेवक समाज ने तालाब पर अतिक्रमण की जांच की मांग की है।

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    प्रस्तुति के लिए इस्तेमाल की गई तस्वीर

    बसंतराय (गोड्डा)। वह दिन अब दूर नहीं जब ऐतिहासिक बसंतराय तालाब के किनारे लगने वाला बिसुआ मेला को राजकीय मेला घोषित किया जाएगा।

    इस मेला को भी दुल्हन की तरह सजाया संवारा जाएगा। उपरोक्त बातें झारखंड सरकार के मंत्री संजय प्रसाद यादव ने मेले के उद्घाटन के बाद अपने संबोधन में कही।

    बताया कि तालाब के सौंदर्यीकरण के तहत चारों ओर सड़क, झरना, बोटिंग, झूला जैसे संसाधन लगेंगे। इससे रोजगार के साथ साथ पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।

    हर वर्ष 14 अप्रैल को लाखों की संख्या में श्रद्धालु यहां आते है और तालाब में स्नान करते है। बसंतराय प्रखंड मुख्यालय स्थित 52 बीघा के क्षेत्रफल में फैले बसंतराय तालाब के चारों ओर हर वर्ष भव्य बिसुआ मेला लगता है जो चैत्र मास की अंतिम ओर बैसाख की पहली तारीख से शुरू होता है।

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    इसमें साफाहोड समुदाय के लोग आस्था की डुबकी लगाते है। आराध्य सूर्य भगवान की उपासना की तत्पश्चात जल लेकर अपने पूजा स्थल तक गए और अपने इष्ट देवता की पूजा अर्चना की उनके गुरु के द्वारा दीक्षा भी देते है।

    इससे मांस मदिरा का सेवन नहीं करना नहीं है और सतमार्ग पर चलने का संकल्प लेते हैं। दो दिनों तक पूरे नियम निष्ठा के साथ ये सभी रहते हैं।

    यहां पाकुड़, दुमका, बिहार से आए कई साफ़होड़ श्रद्धालुओं ने बताया कि इस तालाब में वेलोग बीते 25 वर्षों से आ रहे है और स्नान करते हैं। ऐसा भी हुआ है कि स्नान के बाद चर्म रोगी से भी मुक्ति मिलती है।

    समारोह में उपायुक्त जिशान कमर, एसडीओ बैद्यनाथ उरांव, बीडीओ श्रीमान मरांडी, प्रमुख अंजर अहमद, जिप सदस्य एहतशामूल हक सहित हजारों की संख्या में स्थानीय लोग मौजूद थे।

    ऐतिहासिक धरोहर को संजोए सरकार : आदर्श सेवक

    उधर, आदर्श सेवक समाज के अरुण कुमार मिश्रा ने कहा कि मौजूदा समय में ऐतिहासिक बसंतराय तालाब दुर्दशा का शिकार है।

    तालाब से कभी जलकुंभी निकालने तो कभी घाट निर्माण तो कभी मास्क लाइट लगाने आदि कार्य में सरकारी राशि की पूर्व में जमकर बंटरबांट हुई है।

    आस्था के धरोहर को सजाने संवारने के नाम पर अबतक करोड़ों रुपये खर्च किए गए। इसकी गहराई से जांच होनी चाहिए।

    अब तो तालाब की जमीन का अतिक्रमण वहां सरकारी अस्पताल बनाया जा रहा है। अतिक्रमण के चलते यह ऐतिहासिक धरोहर अपना अस्तित्व बचाने के लिए कराह रहा है।

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