मयूराक्षी नदी हादसे से 2016 की याद हुई ताजा, सिंचाई विभाग की लापरवाही फिर आई सामने
दुमका में मयूराक्षी नदी फिर जानलेवा साबित हुई है। जामा थाना क्षेत्र के पिपरा गांव के निकट से होकर गुजरने वाली मयूराक्षी नदी में चार किशोर के डूबने से हुई मौत की घटना से लोग हतप्रभ हैं।मृतक कृष्णा आर्यन और कृष गहरे दोस्त थे। मनसा पूजा के दिन प्रसाद खाने आये थे। ग्रामीणों ने सिंचाई विभाग की लापरवाही पर सवाल उठाए क्योंकि नदी पर सुरक्षा के इंतजाम नहीं थे।

राजीव, दुमका। दुमका की लाइफलाइन कही जाने वाली मयूराक्षी एक बार फिर से जानलेवा साबित हुई है। जामा थाना क्षेत्र के पिपरा गांव के निकट से होकर गुजरने वाली मयूराक्षी नदी में चार किशोर के डूबने से हुई मौत की घटना से लोग हतप्रभ हैं।
मृत किशोर कृष्णा सिंह, आर्यन ठाकुर, आर्यन आनंद ठाकुर और कृष कुमार पक्के दोस्त थे। शुक्रवार की दोपहर मयूराक्षी तट पर कृष कुमार के पिता उमाकांत ठाकुर रोते हुए कहा कि 17 अगस्त को उनके घर में मनसा पूजा थी।
उस दिन कृष के तीनों दोस्त आर्यन, आर्यन आनंद ठाकुर और कृष्णा सिंह प्रसाद खाने आए थे। चारों की प्रगाढ़ दोस्ती थी। उमाकांत ने कहा कि गुरुवार को वह घर पर नहीं थे। बिहार के पबई में रिश्तेदार के घर श्राद्ध कर्म में गए थे। पुत्र के डूबने की सूचना मिलने पर सीधे यहीं आए हैं।
इधर कृष की मां कंचन देवी लातेहार से यहां पहुंची थीं। चाचा प्रमोद ठाकुर, नानी सावित्री देवी, मौसी गुंजन देवी साहिबगंज से पहुंची थी। वहीं रसिकपुर में रहने वाले डॉ. कलानंद ठाकुर इस घटना से पूरी तरह टूट गए हैं।
उनकी पत्नी की तबीयत बिगड़ गई है और उन्हें इलाज के लिए दुर्गापुर ले जाया गया है। उनका पुत्र आर्यन ठाकुर एएन कालेज का छात्र था। घटनास्थल पर मौजूद आर्यन के दादा ने आक्रोशित लहजे में कहा कि प्रशासनिक लापरवाही के कारण यहां ऐसी घटनाएं हो रही है।
प्रशासन ने अगर यहां खतरे का निशान व बोर्ड लगाया होता तो शायद यह घटना नहीं होती। इधर, आर्यन आनंद ठाकुर जो गोड्डा के डांडो गांव का रहने वाला था वह यहां किसी लाज में रहकर पढ़ाई करता था। उसके पिता मिथिलेश ठाकुर मंबुई के किसी कंपनी में काम करते हैं।
आर्यन की मां का निधन हो चुका है। इस घटना में मृत बक्शीबांध नयापाड़ा का रहने वाला कृष्णा सिंह का शव पानी में तैरता हुआ सबसे पहले सुबह आठ बजे ही मिल गया था। उसके शव को निकाल कर दुमका भेज दिया गया था।
इसके बाद दोपहर एक बजे तक कमारदुधानी के सात गोताखोरों ने ट्यूब के सहारे तीन किशोरों के शव को ढूंढते रहे लेकिन शव नहीं मिला। इसके बाद प्रशासनिक पहल पर मसानजोर से विजय सिंह का नाव व गोताखोरों की टीम यहां पहुंची। फिर दोनों दलों ने शव की तलाश शुरू की और ढ़ाई बजे तक तीनों शव को बरामद कर लिया गया।
इस दौरान सुबह से ही किशोरों के स्वजन के अलावा आसपास के ग्रामीण बड़ी संख्या में तट के किनारे जमे थे। जैसे ही तीनों शव बाहर निकला पूरा माहौल गमगीन हो गया।
सिंचाई विभाग की परियोजना में कहीं कोई बोर्ड नहीं, सुरक्षा पर भी सवाल
दुमका शहर से महज पांच किलोमीटर की दूरी पर स्थित हरिपुर पंचायत भवन से कुछ दूर कच्ची राह पर आगे बढ़ने पर हरिपुर-बांदो डंगाल है।
यह इलाका काफी रमणीक है। मयूराक्षी नदी यहीं से होकर गुजरती है। नदी के दूसरे छोर पर घना जंगल है। नदी तट के इस पार का इलाका दुमका के मुफस्सिल थाना क्षेत्र में पड़ता है जबकि दूसरे छोर पर पिपरा गांव को जोड़ता है। पिपरा जामा थाना क्षेत्र का हिस्सा है।
यह इलाका इतना रमणीक है आसपास के ग्रामीण ही नहीं बल्कि दुमका शहर के लोग भी बड़ी संख्या में समय-समय पर घूमने जाते हैं। यह स्थल एक पिकनिक स्पाट के रूप में विकसित हो गया है।
खासकर नववर्ष के मौके पर बड़ी संख्या में लोगों का जुटान होता है। हरिपुर-बांदो में ही आसपास के ग्रामीणों के भारी विरोध के बाद भी सिंचाई विभाग की ओर से यहां तकरीबन 16 करोड़ रुपये की लागत से एक बीयर का निर्माण कराया गया है। योजना स्थल पर न तो कोई बोर्ड लगाया गया है और नहीं खतरे की ऐसी कोई सूचना पट्ट है जिसे पढ़ कर लोग सावधानी बरतें।
अभी बारिश के दौरान इस बीयर का आठ स्पील-वे गेट खुला हुआ था। बीयर के बेड के ठीक नीचे तकरीबन 20 फीट से अधिक गहराई है और पानी का तेज बहाव भी। ऐसे में गुरुवार की शाम चारों लड़के स्नान के लिए जैसे ही नदी में उतरे पानी की गहराई में समा कर डूब गए।
वहीं, मयूराक्षी के दोनों तटों को जोड़ने के लिए बनाया गया पुल और स्पील-वे गेट की सुरक्षा को लेकर भी कोई पुख्ता इंतजाम नहीं है। गांव के लोग इसी पुल से होकर आना-जाना करते हैं जो खतरनाक व जानलेवा है। इस घटना के बाद यहां की सुरक्षा को लेकर एक बार फिर से सवाल उठाया जा रहा है।
प्रशासनिक चूक व लापरवाही बताई जा रही है। मृतक लड़कों के स्वजन ही नहीं आमलोगों में भी इसको लेकर भारी आक्रोश है।
बीयर निर्माण के दौरान ग्रामीणों ने किया था जमकर विरोध
जामा प्रखंड के पंचायत टेंगधोवा के बांदो गांव के ग्रामीणों ने बांदो और हरिपुर में बनने वाले बीयर सह चेकडैम निर्माण कराए जाने का जमकर विरोध किया था। आठ अगस्त 2002 में ग्रामीणों ने यह एलान कर दिया था कि प्रशासन जितना भी प्रयास कर ले लेकिन यहां पर किसी भी सूरत में चेकडैम नहीं बनने दिया जाएगा।
ग्रामीणों का कहना था कि डैम बनने से यहां का जलस्तर ऊंचा होने की संभावना है जिससे आस-पास की खेती योग्य जमीन जलमग्न हो जाएगी। पानी का स्तर बढ़ जाने से मवेशियों को चारा की कमी हो जाएगी। नदी में पानी बढ़ जाने से दुमका जाने में ग्रामीणों को परेशानी होगी।
ग्रामीणों ने सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया था कि बहुत जल्द ही ग्राम सभा कर प्रशासन,विधायक और मुख्यमंत्री को लिखित अवगत कराएंगे कि ग्रामीण डैम नहीं चाहते हैं। प्रधान अरुण पुजहर ने तब आरोप लगाया था कि डैम बनाने से पहले ग्रामीणों से बात कर उनकी राय जानने का प्रयास तक नहीं किया गया।
इसलिए किसी भी सूरत में डैम बनने नहीं दिया जाएगा। हालांकि बाद में ग्रामीणों को समझा-बुझा कर यहां बीयर सह चेकडैम का निर्माण करा दिया गया लेकिन सिंचाई विभाग ने इसकी सुरक्षा मानकों को लेकर कोई ठोस व्यवस्था नहीं की।
गुरुवार की घटना के बाद एक बार फिर इसे आसपास के ग्रामीणों के अलावा दुमका के लोगों ने इस पर गंभीर सवाल उठाए हैं।
वर्ष 2016 में छह स्कूली बच्चे नहाने के क्रम में डूबे गए थे
वर्ष 2026 में भी यहां छह स्कूल बच्चे नहाने के क्रम में डूब गए थे। इसमें पांच बच्चे का शव बरामद हुआ था। एक बच्चा जिसका शव बरामद नहीं हो सका है वह दुमका जिला के परिषद के उपाध्यक्ष सुधीर मंडल का पुत्र था।
इसके बाद भी समय-समय पर इस इलाके में डूबने मौत की खबरें आती रहती थीं। यहां के ग्रामीण बताते हैं कि एक दशक में यहां तकरीबन एक दर्जन से अधिक लोगों की मौत डूबने से हुई है।
एनडीआरएफ की टीम के आने का आस देखते रह गए लोग, स्थानीय गोताखोरों ने निकाला शव
घटना की सूचना मिलने के बाद प्रशासनिक स्तर पर रेस्क्यू के लिए देवघर एवं पटना की एनडीआरएफ की टीम को सूचना देकर आने का आग्रह किया था लेकिन दोपहर तक लोग टकटकी लगाकर टीम के आने का आस देखते रह गए पर टीम नहीं आई।
जामा थाना प्रभारी अजीत कुमार ने कमारदुधानी के सात सदस्यीय गोताखोरों की टीम को रेस्क्यू के लिए नदी में उतारा था जो टायर के ट्यूब के सहारे सुबह से दोपहर तक शव को ढूंढने में लगे रहे।
इस दल में चौकीदार सुमन मिर्धा, भैरव भंडारी, पंकज मिर्धा, खटीक, श्रीजल सोरेन, संतोष भंडारी शामिल थे। जबकि तकरीबन डेढ़ बजे मसानजोर में बोटिंग लाइसेंसधारी विजय सिंह अपनी नाव व गोताखोरों की टीम को लेकर यहां पहुंचे।
इसके बाद दोनों टीमों ने मिलकर शव ढूंढना शुरु किया और तकरीबन एक घंटे के अंदर शवों को पानी के अंदर से निकालने में सफलता पा ली।
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