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    Dengue Fever: बरसात थमने के बाद डेंगू के तेजी से फैलने का बढ़ा खतरा, बचाव और सतर्कता ही है इसका सबसे बड़ा उपाय

    बरसात के मौसम में संताल परगना समेत दुमका में डेंगू ने दस्तक दे दी है। दुमका में अब तक डेंगू के तीन मरीज चिह्नित हुए हैं जिनका इलाज दुमका के फूलोझानो मेडिकल कालेज व अस्पताल में कराया जा रहा है। सिविल सर्जन डा.बच्चा प्रसाद सिंह ने कहा कि जिले में डेंगू से बचाव के लिए तमाम तरह के एहतियाती कदम उठाने का निर्देश दिया गया है।

    By Rohit Kumar MandalEdited By: Mohit TripathiUpdated: Sun, 13 Aug 2023 10:19 PM (IST)
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    Dengue Fever: बरसात थमने के बाद डेंगू के तेजी से फैलने का बढ़ा खतरा। जागरण

    जागरण संवाददाता दुमका। Dengue Fever: बरसात के मौसम में संताल परगना समेत दुमका में डेंगू ने दस्तक दे दी है। दुमका में अब तक डेंगू के तीन मरीज चिह्नित हुए हैं, जिनका इलाज दुमका के फूलोझानो मेडिकल कालेज व अस्पताल में कराया जा रहा है।

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    सिविल सर्जन डॉ. बच्चा प्रसाद सिंह ने कहा कि तीनों मरीज दुमका सदर प्रखंड क्षेत्र के हैं। तीनों की स्थिति अंडर कंट्रोल है। कहीं कोई घबड़ाने जैसी स्थिति नहीं है। उन्होंने कहा कि जिले में डेंगू से बचाव के लिए तमाम तरह के एहतियाती कदम उठाने का निर्देश दिया गया है। विभागीय स्तर पर छिड़काव भी कराया जा रहा है।

    दुमका शहरी क्षेत्र के सभी 21 वार्डों में जागरूकता अभियान चलाया गया है। राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तहत अभियान के प्रभारी डा.एएम सोरेन ने तीन सदस्यीय कमेटी गठित कर इस अभियान को चलवाने की पहल की है।

    क्या है डेंगू और इसके लक्षण

    डेंगू एडीज मच्छर के काटने से होने वाली बीमारी है। डेंगू होने पर तेज बुखार, सिरदर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द होने लगता है। डेंगू में शरीर की प्लेटलेट्स तेजी से गिरने लगती है।

    इसमें मरीज को तुरंत अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत होती है, वरना समय पर इलाज नहीं मिलने के कारण मरीज की जान भी जा सकती है। डेंगू के लक्षणों को पहचान कर ही इसका इलाज किया जा सकता है।

    डेंगू के लक्षण इंफेक्शन के लगभग चार या छह दिन बाद दिखते हैं। अगर आपको तेज बुखार, सिर दर्द, आंखों में दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, थकान, जी मिचलाना, उल्टी होना और त्वचा पर लाल निशान जैसे लक्षण दिखाई देते हैं, तो तुरंत चिकित्सकों से संपर्क करें। इस तरीके के मामले में लापरवाही बरतना भारी पड़ सकता है।

    गंभीर स्थिति पर ध्यान रखना जरूरी

    फूलोझानो मेडिकल कॉलेज व अस्पताल के मेडिकल ऑफिसर डॉ. कुणाल पांडेय कहते हैं कि डेंगू के गंभीर मामलों में डीएचएफ यानि की डेंगू हेमोरेजिक फीवर होने का खतरा बढ़ जाता है। इस स्थिति में रक्त वाहिकाएं क्षतिग्रस्त हो जाती हैं और प्लेटलेट्स गिरने लगती है।

    ऐसी स्थिति में मरीज को पेट दर्द, लगातार उल्टी होना, मसूड़ों या नाक से खून आना, टायलेट या उल्टी में खून आना, सांस लेने में दिक्कत, थकान महसूस करना और चिड़चिड़ापन या बेचैनी होना संभव है।

    डॉ. कुणाल के मुताबिक, डेंगू से पीड़ित मरीज को ज्यादा पानी पीना चाहिए। अत्यधिक गंभीर मामलों में मरीज को इलेक्ट्रोलाइट सप्लीमेंट देने चाहिए।

    कुछ मामलों में ब्लड प्रेशर मानिटरिंग और ब्लड ट्रांस्फ्यूजन के जरिए भी इलाज किया जाता है। मरीज को खुद से किसी भी तरह की दवा नहीं लेनी चाहिए।

    जागरूकता ही डेंगू से बचाव का कारगर हथियार

    डेंगू से बचने के लिए मच्छरदानी का इस्तेमाल सबसे अहम है। घर के दरवाजे और खिड़कियों को शाम होने से पहले बदं कर दिया जाना चाहिए। शरीर को पूरी तरह से कवर करने वाले कपड़ा पहनना चाहिए।

    आसपास पानी इकट्ठा नही हो इसका खास ध्यान रखना चाहिए। कूलर का पानी बदलते रहना चाहिए। पानी को ढक कर रखना चाहिए। बाहरी पक्षी या पालतू जानवरों के पानी को नियमित रुप से बदलना चाहिए।