यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Sep 08, 2024 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।
केंद्रीय मंत्री बोले- झारखंड में चिराग तले अंधेरा; कोयला खदानों के लिए जमीन देना नहीं चाहती CM सोरेन की सरकार
Jharkhand Politics केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन सरकार पर साधा ...और पढ़ें

HighLights
- केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने सरकार पर साधा निशाना
- कहा- हेमंत सोरेन सरकार के दिन हुए पूरे, भाजपा करेगी झारखंड का विकास
आशीष अंबष्ठ, धनबाद। Jharkhand Politics: केंद्रीय कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने कहा है कि राज्य सरकार नहीं चाहती है कि कोयला परियोजना का विस्तार हो।
झारखंड में कोल इंडिया की बीसीसीएल, सीसीएल, ईसीएल आदि की इकाइयां हैं। यहां कई मेगा प्रोजेक्ट पर काम होना है।
इन परियोजनाओं के विस्तारीकरण के लिए जमीन की आवश्यकता है, परंतु राज्य सरकार सहयोग नहीं कर रही है। उसने जमीन का मामला फंसा कर रखा है।
विधि व्यवस्था को लेकर भी जो सहयोग मिलना चाहिए, वह नहीं मिल रहा है। वह रविवार को दैनिक जागरण से बात कर रहे थे।

हेमंत सरकार पर साधा निशाना
इस बीच उन्होंने झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार पर जमकर निशाना साधा और कहा कि प्रदेश की गठबंधन की सरकार को जनता समझ गई है। अब केवल औपचारिकता ही बाकी है।
हेमंत सरकार के दिन पूरे हो गए है। जनता इस सरकार को उखाड़ फेंकेगी। हेमंत सरकार जनता को बरगला रही है। ऐसे में इस सरकार से जनता का मोहभंग हो चुका है।
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दुबे का दावा- चुनाव में सूपड़ा साफ हो जाएगा
उन्होंने दावा किया कि हेमंत सोरेन के साथ उनकी सहयोगी पार्टी की सरकार का आसन्न चुनाव में सूपड़ा साफ हो जाएगा और भाजपा की सरकार बनेगी। फिर जमीन समेत राज्य की सारी समस्याओं का निदान भाजपा की सरकार करेगी।
दुबे ने कहा कि कोल इंडिया पूरे देश को बिजली सप्लाई करती है, लेकिन यह विडंबना है कि झारखंड में 'चिराग तले अंधेरा' जैसी स्थिति है।

झारखंड सरकार की ओर से बिजली नहीं खरीदी जा रही है, जिसके कारण राज्य में बिजली की समस्या बनी हुई है। मंत्री ने कहा कि झारखंड में बिजली कटौती सामान्य बात हो गई है।
बिजली की बढ़ रही जरूरत : दुबे
उन्होंने दावा किया कि कोल इंडिया के आपरेशन वाले जिलों का विकास जारी रहेगा, राज्य सरकारों को भी मानिटरिंग पर ध्यान देना होगा।

उन्होंने कहा कि देश एक हजार मिलियन टन कोयला उत्पादन की दिशा में काम कर रहा है। इसके लिए हर स्तर पर कोल इंडिया काम कर रही है।
विकास को लेकर बिजली की जरूरत बढ़ रही है। इस जरूरत को पूरा करने के लिए झारखंड में काफी संभावना है, क्योंकि यहां कोयला है। इसे पूरा करने लिए कई प्रोजेक्ट पर काम किया जा रहा है।
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