दस रुपये का पोस्टल ऑर्डर आउट ऑफ मार्केट, डेढ महीने से भटक रहे लोग
सबसे अधिक मांग 10 रूपये के पोस्टल ऑर्डर की रहती है। किसी भी डाकघर में यह नहीं मिल रहा है। युवाओं को नौकरी से संबंधित आवेदन में परेशानी का सामना करना प ...और पढ़ें

धनबाद, जेएनएन। डाकघर में पिछले डेढ़ माह से पोस्टल आर्डर नहीं मिल रहे हैं। इसके लिए लोग भटक रहे हैं। लोग काउंटर पर लाइन लगते हैं लेकिन काउंटर खुलने पर पता चलता है कि 10 रूपये का पोस्टल आर्डर नहीं हैं। इसके बाद लोग मायूस होकर लौट जाते हैं तो कई 20 रूपये का पोस्टल ऑर्डर लेते हैं। पोस्ट ऑफिस रोज आने जाने वाले लोग एक दूसरे से कहते हैं भाई जब 10 रूपये का पोस्टल ऑर्डर मिले तो फोन कर बता देना।
जिले में पोस्टल आर्डर की रोजाना खपत लगभग एक लाख रुपये से अधिक की है। इसका इस्तेमाल भारतीय मुद्रा के रूप में होता है। सबसे अधिक मांग 10 रूपये के पोस्टल ऑर्डर की रहती है, लेकिन किसी भी डाकघर में यह नहीं मिल रहा है। इसके अभाव में आरटीआइ कार्यकर्ताओं, युवाओं को रेलवे व अन्य विभागों में नौकरी से संबंधित आवेदन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं डाकघर में केवल 20 व 50 रूपये के पोस्टल ऑर्डर मिल रहे हैं जिसकी जरूरत अमूमन कम ही लोगों को होती है। मुख्य डाकघर समेत अन्य उपडाकघरों में लोगों को पोस्टल आर्डर के लिए रोज भटकते देखा जा सकता है।
बंद हो गई है पोस्टल आर्डर छपाईः विभागीय सुत्रों की माने तो पोस्टल आर्डर की छपाई टेंडर के माध्यम से होती है। ऐसा कहा जा रहा है कि छपाई में विलंब होने या टेंडर खत्म होने के चलते पोस्टल आर्डर नहीं आ पा रहे हैं। जिले के करीब तीन दर्जन डाकघरों में डेढ़ महीने से 10 रूपये के पोस्टल आर्डर की किल्लत है लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों को इससे कोई फर्क नहीं पड़ रहा है।
10 रूपये का पोस्टल ऑर्डर पिछले डेढ महीने से नहीं आ रहा है। इसकी लगातार मांग की जा रही है। बावजूद इसके अभी तक 10 रूपये का पोस्टल ऑर्डर विभाग को प्राप्त नहीं हो पा रहा है।
-एके रजक, वरीय डाकपाल, धनबाद
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