झारखंड में पेसा नियमावली अधिसूचित, पूर्व पंचायती राज निदेशक निशा उरांव ने कह दी बड़ी बात
Jharkhand PESA Rulesः झारखंड सरकार ने बहुप्रतीक्षित पेसा नियमावली 2025 को अधिसूचित कर दिया है। यह नियमावली राज्य के पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में प्रभ ...और पढ़ें

मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन, वित्त मंत्री राधाकृष्ण किशोर और पूर्व पंचायती राज निदेशक निशा उरांव। (फाइल फोटो)
डिजिटल डेस्क, धनबाद। झारखंड सरकार के पंचायती राज विभाग ने बहुप्रतीक्षित पेसा नियमावली को अधिसूचित कर दिया है। विगत 23 दिसंबर को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में इस पर सहमति बनी थी, हालांकि दो मंत्रियों की ओर से कुछ बिंदुओं पर असहमति जताए जाने के बाद सरकार के शीर्ष स्तर पर दोबारा विचार किया गया।
मंत्रियों द्वारा सुझाए गए संशोधनों को स्वीकार करते हुए मुख्यमंत्री ने इस पर अपनी अंतिम सहमति दी, जिसके बाद मंत्रिमंडल निगरानी एवं समन्वय विभाग ने इसे पंचायती राज विभाग को भेजा और वहां से अधिसूचना जारी कर दी गई।
“पंचायत उपबंध (अनुसूचित क्षेत्रों पर विस्तार) झारखंड नियमावली, 2025” के अधिसूचित होते ही यह राज्य के सभी पांचवीं अनुसूची क्षेत्रों में प्रभावी हो गई है। झारखंड में ऐसे 13 जिले हैं, जबकि दो जिलों में इसका आंशिक प्रभाव पड़ेगा।
माना जा रहा है कि इस ऐतिहासिक फैसले से आदिवासी और जनजातीय समाज को अपने गांव, संसाधनों और विकास से जुड़े निर्णयों में सीधा और निर्णायक अधिकार मिला है। आने वाले दिनों में इसे लेकर राज्य की राजनीति भी तेज होने की संभावना है।
इस बीच भारतीय राजस्व सेवा की अधिकारी एवं पूर्व पंचायती राज निदेशक निशा उरांव ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि पेसा नियमावली जारी हो गई है, लेकिन यह जुलाई 2023 में उनके कार्यकाल के दौरान प्रकाशित प्रारूप और मार्च 2024 में विधि विभाग द्वारा अनुमोदित प्रारूप से अलग है।
उन्होंने कहा कि इसमें कई संशोधन किए गए हैं, जिनका वह विस्तृत विश्लेषण करेंगी। उल्लेखनीय है कि निशा उरांव झारखंड कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष और लोहरदगा विधायक रामेश्वर उरांव की पुत्री हैं।
जानकारी के अनुसार नई नियमावली में ग्राम सभा को शासन की सबसे मजबूत और सर्वोच्च इकाई के रूप में स्थापित किया गया है। प्रत्येक पारंपरिक ग्राम सभा की बैठक महीने में कम से कम एक बार अनिवार्य होगी।
बैठक की अध्यक्षता गांव की परंपरा के अनुसार मांझी, मुंडा, पाहन जैसे पारंपरिक ग्राम प्रधान या अनुसूचित जनजाति के किसी सदस्य द्वारा की जाएगी। बैठक के लिए एक-तिहाई सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य होगी, जिसमें कम से कम एक-तिहाई महिलाएं होंगी, जिससे महिला सहभागिता और नेतृत्व को बढ़ावा मिलेगा।
पेसा नियमावली 2025 के तहत ग्राम सभा की मंजूरी के बिना अब कोई भी सरकारी विभाग या संस्था गांव में किसी विकास योजना को लागू नहीं कर सकेगी। यहां तक कि पुलिस को भी कई मामलों में ग्राम सभा की अनुमति लेनी होगी। किसी भी गिरफ्तारी की सूचना सात दिनों के भीतर ग्राम सभा को देना अनिवार्य किया गया है।
विकास योजनाओं की रूपरेखा उपायुक्त स्तर पर गठित मल्टी-डिसिप्लिनरी टीम (एमडीटी) द्वारा ग्राम सभा से परामर्श कर तैयार की जाएगी। ग्राम सभा को इन योजनाओं पर 30 दिनों के भीतर निर्णय लेने का अधिकार होगा, अन्यथा योजना स्वतः स्वीकृत मानी जाएगी। ग्राम सभा को योजनाओं में संशोधन और शर्तें जोड़ने का भी अधिकार दिया गया है।
जल, जंगल और जमीन जैसे प्राकृतिक संसाधनों के प्रबंधन का अधिकार अब ग्राम सभा के पास होगा। इसके लिए ग्राम सभा कोष का गठन किया जाएगा, जिसमें अन्न, श्रम, वस्तु और नगद कोष शामिल होंगे। इनका संचालन तीन सदस्यों द्वारा किया जाएगा, जिनमें एक महिला सदस्य का होना अनिवार्य होगा।
इसके अलावा ग्राम सभा को परंपरागत न्याय और शांति व्यवस्था से जुड़े अधिकार भी दिए गए हैं। भूमि विवाद, पारिवारिक मामलों और छोटे आपराधिक प्रकरणों में ग्राम सभा अधिकतम दो हजार रुपये तक का आर्थिक दंड लगा सकेगी, जिसके खिलाफ अपील का प्रावधान भी रहेगा।
यदि कोई सरकारी नियम जनजातीय परंपराओं के विरुद्ध हो, तो ग्राम सभा उसके खिलाफ प्रस्ताव पारित कर सकेगी और राज्य सरकार उस पर विचार के लिए उच्चस्तरीय समिति गठित करेगी।
झारखंड में पेसा नियमावली आज जारी हो गई है ।
— Nesha Oraon 🇮🇳 (@OraonNesha) January 2, 2026
जुलाई 2023 में मेरे कार्यकाल में प्रकाशित प्रारूप तथा मार्च 2024 में विधि विभाग द्वारा अनुमोदित प्रारुप से यह अलग है - इसमें कई संशोधन हुए हैं ।
इसका मैं विस्तार से विश्लेषण करूंगी ।
राज्य सरकार ने झारखंड में पेसा कानून हेतु नियमावली को भी लागू कर दिया है, जिससे अब ग्रामसभा और ग्राम पंचायतों के माध्यम से ग्रामीणों को उनके अधिकार प्राप्त होंगे। यह कानून हमारे जल, जंगल और जमीन की सुरक्षा का आधार है। इसके माध्यम से ग्रामीण अपने संसाधनों पर स्वयं निर्णय ले सकेंगे… pic.twitter.com/3vQLRpsFrF
— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) January 1, 2026

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