सीबीएसई स्कूलों के छात्रों के लिए राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय में ज्ञान का डिजिटल खजाना, अब देशभर के छात्र जुड़ेंगे
National e-Libraryः सीबीएसई ने संबद्ध स्कूलों को राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय से छात्रों को जोड़ने का निर्देश दिया है। यह पहल शिक्षा मंत्रालय द्वारा शुरू की ...और पढ़ें

सीबीएसई ने सभी स्कूलों को राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय से पंजीयन कराने का दिया निर्देश। (प्रतीकात्मक फोटो)
आशीष सिंह, धनबाद। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) से संबद्ध स्कूलों के विद्यार्थियों को डिजिटल पढ़ाई से जोड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया गया है। शिक्षा मंत्रालय के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग की ओर से शुरू किए गए राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय से अब देशभर के छात्र जुड़ेंगे। इस ई-पुस्तकालय में 23 भाषाओं में 5,500 से अधिक गैर-शैक्षणिक पुस्तकें उपलब्ध कराई गई हैं।
सीबीएसई ने अपने सभी संबद्ध विद्यालयों को इस डिजिटल मंच पर पंजीयन कराने और अधिक से अधिक छात्रों को जोड़ने का निर्देश जारी किया है। बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि प्रत्येक विद्यालय को यह रिपोर्ट देनी होगी कि उनके यहां कितने विद्यार्थियों ने राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय का पंजीयन किया और उसका उपयोग कर रहे हैं। यह पहल छात्रों में पढ़ने की आदत विकसित करने और उन्हें आजीवन सीखने की ओर प्रेरित करने के उद्देश्य से की गई है।
उम्र के अनुसार चार चरणों में पुस्तकें
राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय को विद्यार्थियों की आयु और समझ के स्तर के अनुसार चार श्रेणियों में व्यवस्थित किया गया है। इनमें तीन से आठ वर्ष, आठ से 11 वर्ष, 11 से 14 वर्ष तथा 14 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के छात्रों के लिए अलग-अलग पुस्तकें उपलब्ध हैं।
यह संरचना राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप तैयार की गई है, जिससे हर आयु वर्ग के छात्र अपनी रुचि और स्तर के अनुसार पुस्तकों का चयन कर सकें। वर्तमान में इस ई-पुस्तकालय में देश के 200 से अधिक प्रकाशकों की 5,500 से अधिक विषय और गैर-शैक्षणिक पुस्तकें शामिल हैं। छात्र यहां साहित्य, जीवनी, विज्ञान, पर्यावरण, संस्कृति, प्रेरक कथाएं और सामान्य ज्ञान से जुड़ी सामग्री आसानी से पढ़ सकते हैं।
वेब, एंड्रायड और आईओएस पर उपलब्ध
सीबीएसई के अनुसार राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय वेब, एंड्रायड और आइओएस तीनों प्लेटफार्म पर उपलब्ध है। इससे छात्र कहीं भी और कभी भी पढ़ाई कर सकते हैं। इस डिजिटल पुस्तकालय को राष्ट्रीय पुस्तक ट्रस्ट द्वारा विकसित किया गया है। विद्यालयों को निर्देश दिया गया है कि वे अपने यहां संचार प्रौद्योगिकी और स्मार्ट क्लासरूम जैसी सुविधाएं सुनिश्चित करें, ताकि छात्र इस प्लेटफार्म का अधिकतम लाभ उठा सकें।
राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय का मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों में डिजिटल पढ़ाई और पठन-संस्कृति को बढ़ावा देना है। शिक्षक भी इस एप को डाउनलोड करें और स्वयं इससे परिचित हों, ताकि वे विद्यार्थियों को नियमित रूप से पढ़ने के लिए प्रेरित कर सकें। राष्ट्रीय ई-पुस्तकालय के माध्यम से छात्रों और शिक्षकों में पढ़ने के प्रति रुचि और लगाव बढ़ेगा तथा डिजिटल युग में ज्ञान तक उनकी पहुंच और भी आसान होगी।- मदन कुमार सिंह, डिप्टी सिटी कोआर्डिनेटर सीबीएसई

कमेंट्स
सभी कमेंट्स (0)
बातचीत में शामिल हों
कृपया धैर्य रखें।