धनबाद, मृत्युंजय पाठक। भाजपा के तेज-तर्रार प्रवक्ताओं में शुमार संबित पात्रा ने एक झटके में धनबाद लोकसभा क्षेत्र के पार्टी के तमाम छोटे-बड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं को अपने साथ भावनात्मक रूप से जोड़ लिया है। शनिवार को खचाखच भरे धनबाद के न्यू टाउन हॉल में पात्रा ने संबोधन की शुरुआत करते हुए जब कहा कि वह अपने घर आए हैं तो सब भौंचक रह गए। हॉल में सन्नाटा पसर गया। बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि बोकारो में मेरा बचपन बीता है। तब धनबाद जिले में ही बोकारो था। यह मेरी जन्मभूमि है। यहां की मिट्टी को नमन करता हूं तो तालियों की गड़गड़ाहट से हॉल गूंज उठा। पात्रा ने हाथ जोड़कर विनम्र भाव से अभिवादन स्वीकार करते हुए कहा-आज मेरे विशेष दिन है।

हर वर्ग के मतदाताओं को साध रही भाजपा: माइक्रो मैनेजमेंट के तहत मिशन- 2019 को सफल बनाने के लिए लोकसभा चुनाव की घोषणा से पहले भाजपा हर वर्ग को साधने में जुटी है। इसी कड़ी में शनिवार को भाजपा की ओर से उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल का प्रबुद्ध सम्मेलन किया गया। इसमें धनबाद, गिरिडीह और कोडरमा लोकसभा क्षेत्र के प्रतिनिधि उपस्थित थे। ये लोकसभा क्षेत्र धनबाद, बोकारो, गिरिडीह और कोडरमा जिले के तहत आते हैं। प्रबुुद्धजनों से संवाद करने के लिए भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा दिल्ली से धनबाद भेजे गए थे। उन्होंने अपने दमदार तर्कों से सम्मेलन के दाैरान बुद्धिजीवियों को बांधे रखा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खासियत और केंद्र सरकार की उपलब्धियां गिनाईं। राफेल से लेकर नोटबंदी, जीएसटी, ट्रिपल तलाक, स्वच्छ भारत मिशन और कालाधन पर लगातार विपक्ष, खासकर कांग्रेस की तरफ से उठाए जाने वाले सवालों के जवाब दिए। सीधे कहें तो उत्तरी छोटानागपुर प्रमंडल के चारों जिलों से आए बुद्धिजीवियों के बीच भाजपा और मोदी सरकार के प्रति माहाैल बनाने में पात्रा सफल रहे।

यह भी पढ़ें: राफेल विवाद में संबित पात्रा का राहुल गांधी पर बड़ा हमला, कहा-दलाली खाकर यूरो फाइटर की लड़ रहे लड़ाई

बोकारो जन्मभूमि, प्रारंभिक शिक्षा-दीक्षा चिन्मय विद्यालय मेंः डॉ संबित पात्रा का जन्म 13 दिसंबर 1974 को झारखंड के बोकारो में हुआ। तब बोकारो, धनबाद जिले के अधीन था। पात्रा की प्रारंभिक और माध्यमिक शिक्षा बोकारो के चिन्मय विद्यालय में हुई। उनके पिता बोकारो स्टील प्लांट में काम करते थे। पात्रा ने 1997 में वीएसएस मेडिकल कॉलेज बुर्ला संबलपुर विश्वविद्यालय से एमबीबीएस किया है। पेशे से सर्जन पात्रा ने 2002 में एससीबी मेडिकल कॉलेज कटक, उत्कल विश्वविद्यालय से जनरल सर्जरी में मास्टर ऑफ सर्जरी (एमएस) किया है। 2003 में संघ लोक सेवा आयोग द्वारा आयोजित संयुक्त चिकित्सा सेवा में योग्यता प्राप्त कर चिकित्सा अधिकारी के रूप में हिंदू राव अस्पताल में बताैर सर्जन तैनाती पाई। चिकित्सक की नाैकरी के साथ-साथ एनजीओ बनाकर गरीबों और दलितों की सेवा शुरू की। हिंदू राव अस्पताल अस्पताल से इस्तीफा देकर 2012 में कश्मीरी गेट से भाजपा के टिकट पर नगर निगम का चुनाव लड़ा, लेकिन हार गए। इसके बाद भी हार नहीं मानी। भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली को अपना राजनीतिक गुरु बनाकर राजनीति शुरू की। परिणाम सामने है।

पीएन सिंह को बताया पिता तुल्य, विरंची नारायण को अपना विधायकः डॉ. पात्रा ने कार्यक्रम के दाैरान सबको साधने की कोशिश की। उन्होंने मंचासीन धनबाद के सांसद पीएन सिंह को पिता तुल्य बताया तो बोकारो के विधायक विरंची नारायण को अपना विधायक। कहा, बोकारो मेरी जन्मभूमि है तो विरंची नारायण मेरे विधायक हुए। यह सुन सांसद पीएन सिंह और विधायक विरंची नारायण फूले नहीं समा रहे थे। कार्यकर्ताओं ने तालियों की गड़गड़ाहट से जोरदार स्वागत करने में कोई कंजूसी नहीं की।

[फोटो: संबित पात्रा धनबाद के बाद बोकारो के रास्‍ते रांची गए। इस दौरान उन्‍होंने बोकारो में नयामोड़ पर रुककर चाय पी और अपने बचपन के दिनों के याद कर खूब खिलखिलाए भी।]

उछला टिकट के दावेदारों में नामः डॉ. पात्रा का संबोधन शुरू होने से पहले ज्यादातर लोग नहीं जानते थे कि उनका धनबाद और बोकारो से जन्मभूमि का नाता है, लेकिन जैसे ही उन्होंने अपना परिचय दिया, नेताओं और कार्यकर्ताओं के मन में एक नया सवाल उठने लगा, क्या पात्रा धनबाद से लोकसभा चुनाव लड़ेंगे? यह इसलिए, क्‍याकि पात्रा की जन्मभूमि बोकारो भी धनबाद लोकसभा क्षेत्र के अधीन ही है। उनके दाैरे के बाद भाजपा की राजनीति में धनबाद लोकसभा क्षेत्र से जिन लोगों के चुनाव लड़ने की चर्चा होती है, उनमें एक नाम अब संबित पात्रा का भी शुमार हो गया है। हालांकि इस बाबत पात्रा ने टिप्पणी करने से इंकार कर दिया। वे दिल्ली जाने के लिए रांची से प्लेन पकड़ने की जल्दबाजी में मीडिया से बगैर बात किए निकल गए। 

Edited By: Deepak Pandey