Deoghar News: भोले बाबा के दर्शन करने देवघर पहुंची सारा अली खान, आज होगा भव्य तिलकोत्सव का आयोजन
बॉलीवुड एक्ट्रेस सारा अली खान रविवार को देर शाम देवघर स्थित बाबा मंदिर में भोले बाबा का आशीर्वाद लेने पहुंची। लोग उन्हें पहचान न पाए इसलिए उन्होंने मास्क लगाया हुआ था। मंदिर पहुंचने पर उन्हें पहले प्रशासनिक भवन ले जाया गया इसके बाद पुरोहित के द्वारा संकल्प कराया गया। गर्भगृह को कुछ देर के लिए खाली कराया गया जिसके बाद उन्होंने पूजा की।

संवाद सूत्र, देवघर। बॉलीवुड की मशहूर फिल्म अभिनेत्री सारा अली खान रविवार देर शाम को बाबा बैद्यनाथ मंदिर में भोले बाबा का आशीर्वाद लेने के लिए पहुंची। श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए रविवार को मंदिर का पट पूजा के लिए आम दिनों की अपेक्षा ज्यादा देर तक खुला हुआ था। इस दौरान अचानक सारा अली खान सुरक्षा घेरे में बाबा मंदिर पहुंची।
मास्क पहनकर पहुंची सारा
लोग उन्हें पहचान नहीं पाएं इस कारण सारा अली खान ने अपने चेहरे पर मास्क पहना हुआ था। मंदिर पहुंचने पर उन्हें पहले प्रशासनिक भवन ले जाया गया। वहां उनका पुरोहित के द्वारा संकल्प कराया गया।
बाबा मंदिर मंडल खंड में मास्क लगाकर खड़ी सारा अली खान, साथ में मौजूद रहे उपायुक्त विशाल सागर।
इसके बाद सारा अली खान को फील पाया के रास्ते मंझला खंड ले जाया गया। इसके बाद गर्भगृह को खाली कराकर उन्हें बाबा भोले की पूजा अर्चना कराई गई।
उपायुक्त सहित कई अधिकारी रहे मौजूद
बाबा बैद्यनाथ की पूजा अर्चना करती सारा अली खान।
सारा अली खान को कड़ी सुरक्षा के बीच मंदिर से बाहर ले जाया गया। इस दौरान उपायुक्त विशाल सागर, रमेश परिहस्त व अन्य लोग मौजूद थे।
बाबा मंदिर मंझला खंड में सारा अली खान से बातचीत करते उपायुक्त विशाल सागर।
सारा अली खान को इतने गुप्त तरीके से मंदिर में लाकर पूजा कराया गया कि बहुत कम ही लोगों को इस बारे में पता चल पाया। उनके मंदिर से चले जाने के बाद लोगों को जानकारी हुई कि वह पूजा करने मंदिर आई थी।
इंटरनेट मीडिया पर वायरल हुआ वीडियो
हालांकि, कुछ लोगों ने बाद में उनके मंदिर आने से जुड़ा वीडियो इंटरनेट मीडिया पर जारी किया। जानकारी हो कि सारा अली खान वालीवूड अभिनेता सैफ अली खान व अभिनेत्री अमृता सिंह की बेटी हैं।
बाबा को आज चढ़ेगा तिलक, मिथिलांचल से आए तिलकहरुवे
बसंत पंचमी पर देश भर में विद्या की देवी मां सरस्वती की पूजा-अर्चना की जाती है, लेकिन देवघर स्थित विश्व प्रसिद्ध बाबा बैद्यनाथ मंदिर में बसंत पंचमी के दिन को बाबा बैद्यनाथ के तिलकोत्सव के रूप में भी मनाया जाता है।
तिलक की इस रस्म को अदा करने के लिए मिथिलांचल से बड़ी संख्या में श्रद्धालु अलग तरह का कांवड़ लेकर बाबा धाम पहुंचते हैं।
बसंत पंचमी के दिन बाबा को तिलक चढ़ाकर, अबीर-गुलाल लगा एक-दूसरे को बधाई देते हैं। साथ ही महाशिवरात्रि के अवसर पर शिव विवाह में शामिल होने का संकल्प लेकर वापस लौट जाते हैं।
प्रत्येक वर्ष की भांति इस वर्ष भी कई टोलियों में आए मिथिलावासी शहर के कई जगहों पर अपना डेरा जमाए हुए हैं।
बाबा नगरी मिथिलावासियों से पट चुकी है। रविवार को बाबा मंदिर से शिवगंगा के इलाके में कहीं भी पैर रखने तक की जगह नहीं थी। हर तरफ राम सीता-राम के भजन सुनाई पड़ रहे हैं। सोमवार को बाबा का तिलक करने के पश्चात यह सभी भक्त देवघर से प्रस्थान करेंगे।
रविवार को मंदिर का कपाट बंद होने तक 65 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने की पूजा-अर्चना
बसंत पंचमी मेला को लेकर जिला प्रशासन ने सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। भक्तों को कतारबद्ध तरीके से जलार्पण कराने के लिए क्यू कांप्लेक्स, शिवराम झा चौक, जलसार रोड तक कतार की व्यवस्था की गई है।
शीघ्र दर्शनम् के लिए पाठक धर्मशाला सुविधा केंद्र से होते हुए पेड़ा गली से लेकर नाथबादी तक व्यवस्था की गई है। सोमवार को शीघ्रदर्शनम के कूपन का रेट 300 रुपया से बढ़कर 600 रुपये किया गया है।
बाबा को चढ़ेगा अबीर-गुलाल, मालपुआ का लगेगा विशेष भोग
सोमवार को तिलकोत्सव पर बाबा बैद्यनाथ की विशेष पूजा होगी। इस अवसर पर बाबा को अबीर-गुलाल चढ़ाया जाएगा। उन्हें मालपुआ का विशेष भोग लगाया जाएगा।
बसंत पंचमी से बाबा वैद्यनाथ व मां पार्वती को फाल्गुन पूर्णिमा तक अबीर गुलाल-चढ़ाया जाएगा। सोमवार की सुबह प्रातः कालीन पूजा के समय बाबा को अबीर के साथ ही आम का मंजर भी अर्पित किया जाएगा।
शाम साढ़े छह बजे तिलकोत्सव शुरू होगा। इस अवसर पर लक्ष्मी नारायण मंदिर के प्रांगण में आचार्य श्रीनाथ पंडित, पुजारी व मंदिर उपचारक की उपस्थिति में पंचोपचार विधि से पूजा-अर्चना होगी। इस पूजा में बाबा व माता पार्वती के निमित्त आम्र मंजर, अबीर, पान, पंचमेवा, फल आदि चढ़ाया जाएगा।
मिथिलावासी माता पार्वती को मानते हैं अपनी पुत्री
मान्यता है कि तिलकोत्सव मनाने की यह परंपरा करीब 600 वर्षों से चली आ रही है। मिथिलावासी माता पार्वती को अपनी बेटी मानते हैं। इसलिए मिथिलावासी कन्या पक्ष की तरफ से आकर तिलकोत्सव मनाते हैं।
तिलकोत्सव के बाद भक्त एक दूसरे को गुलाल और अबीर लगा बधाइयां देकर खुशियां बंटाते हैं और माता पार्वती के मायके यानी मिथलांचल वापस लौट जाते हैं।
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