सोनिया देवी बनीं रोल मॉडल, देवघर में हजारों महिलाओं को बनाया आत्मनिर्भर
देवघर के सारठ प्रखंड की सोनिया देवी ने बैंक सखी बनकर हजारों महिलाओं को सशक्त किया है। उन्होंने 5000 महिलाओं के सपनों को पंख दिए, स्वयं सहायता समूहों क ...और पढ़ें
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आराजोरी की सोनिया देवी। (जागरण)
कंचन सौरभ मिश्रा, देवघर। देश तेजी से बदल रहा है। इस बदलाव में देश की आधी आबादी की भूमिका अहम है। कभी घर के पर्दे में रहने वाली महिलाएं आज पुरुषों के कंधा से कंधा मिलकर देश, समाज व अपने परिवार को आगे बढ़ाने का काम कर रही है।
जिले के सारठ प्रखंड के छोटे से गांव आराजोरी की सोनिया देवी ने अपने काम से साबित कर दिया है कि प्रयास करने वालों की कभी हार नहीं होती। इंटर तक की पढ़ाई करने वाली सोनिया ने बैंक सखी बनकर प्रखंड व आसपास के क्षेत्र की पांच हजार महिलाओं के सपनों को पंख देने का काम किया है।
उसने पांच स्वयं सहायता समूह की महिलाओं का बैंक में खाता खुलवाया और करीब 450 समूह को बैंक के क्रेडिट लिंक से जोड़ा। आज इन समूह की महिलाएं घरेलू जिम्मेवारी उठाने के साथ ही आर्थिक हालत में तेजी से सुधार ला रही है।
सोनिया बनी रोल मॉडल
सोनिया अपने इलाके की महिलाओं के लिए रोल मॉडल बन चुकी है। लेकिन ये सफर आसान नहीं था। सोनिया ने इंटर की पढ़ाई पूरी की और 2010 में उसकी शादी हो गई। पति अधिक कमाई नहीं करते थे। घर की हालत ठीक नहीं थी। इस बीच दो पुत्र ने जन्म ले लिया।
बच्चों की चिंता में सोनिया ने पहले गांव में 2015 से 2017 के बीच ट्यूशन पढ़ाने का काम किया। इस बीच एक दिन गांव में सरकार की जेएसएलपीएस योजना की प्रचार गाड़ी के लिए लोग पहुंचे। सोनिया को अपने लिए एक मौका नजर आया।
2018 में उसने संतोषी मां आजीविका सखी मिशन का गठन किया। इससे 13 महिलाओं को जाेड़ा। धीरे-धीरे उसने 15 और समूह का गठन कर करीब 200 महिलाओं को इससे जोड़ा। सोनिया ने महिलाओं को समूह से होने वाले फायदे के बारे में बताया। उनका बैंक में खाता खुलवाया। सोनिया के कार्य से प्रभावित होकर बैंक ने उसे बैंक सखी बना दिया।
उसके बाद वह क्षेत्र की पांच हजार महिलाओं का मार्गदर्शक बन गयी। सोनिया ने खुद बैंक से लोन लेकर सारठ में स्टेशनरी का दुकान खोला है। वहीं समूह की कमाई से पति को भी कारपेंटर का दुकान कराया है। आज वह सालाना ढाई लाख से अधिक कमा रही है।
महिला को बनाया आत्मनिर्भर
सोनिया ने कई महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने का काम किया। बभनगामा की हेमलता देवी ने वर्ष 2019 में जूही आजीविका सखी मिशन का गठन किया। उन्होंने बाद में अपने गांव में 13 समूह का गठन कर 140 महिलाओं को जोड़ा। समूह के माध्यम से वर्ष 2021 में बैंक से 50 हजार कर्ज लेकर घर में लक्ष्मी पंसारी के नाम से दुकान खोला।
बाद में एक गिफ्ट कार्नर खोलकर पति को भी रोजगार दिया। एक बेटा को मेकेनिकल में डिप्लोमा तथा दूसरे को कंप्यूटर इंजीनियर बनाया। आज परिवार आर्थिक रूप से संपन्न व खुशहाल है। बभनगामा निवासी सोनी देवी ने प्रेरित होकर वर्ष 2020 में उमंग आजीविका सखी मिशन का गठन किया।
समूह के कार्य के प्रति उनकी तत्परता देख उन्हें एफआईसी (वित्तीय निवेश) का कार्य दिया गया। सोनी समूह की महिलाओं को समूह चलाने के तौर तरीके, किस तरह समूह चलना है, उनसे होने वाले फायदे, बैंक से मिलने वाले मुद्रा लोन आदि के बारे में जानकारी देने लगी।
इसी बीच सोनी ने समूह से 10 हजार ऋण लेकर सिलाई मशीन खरीदा तथा कपड़े की सिलाई काम शुरु किया। कुछ दिन के बाद बैंक से ऋण लेकर पति संतोष पोद्दार को सारठ में जेवर का दुकान खुलवाया। आज दोनों पति,पत्नी कमा रहे हैं और परिवार खुशहाल है।
वहीं, बुलबुल देवी ने जय मां दुर्गा आजीविका सखी मिशन बनाया। उसके बाद लगातार काम करते हुए 144 समूह का गठन कराया। जिसमें करीब 1750 महिलाएं जुड़ी है। समूह से जुड़कर तीन बच्चों को अच्छी शिक्षा दे रही हैं। बैंक से लोन लेकर पति को फर्नीचर का दुकान खुलवा कर रोजगार दिया। उसने समाज में खुद की पहचान बनाई।

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