चतरा में जालसाजों का बड़ा नेटवर्क सक्रिय, डेढ़ साल में बनाए 15,835 जन्म प्रमाण पत्र
चतरा जिले के प्रतापपुर प्रखंड में सिर्फ डेढ़ साल में 15835 जन्म प्रमाण पत्र जारी किए गए जिनमें से अधिकांश फर्जी होने की आशंका है। प्रारंभिक जांच के अनुसार जालसाजों का एक गिरोह पंचायत सचिवों और कंप्यूटर ऑपरेटरों के साथ मिलकर यह फर्जीवाड़ा कर रहा था। उपायुक्त के आदेश पर प्राथमिकी दर्ज की गई है और मामले की गहन जांच जारी है।

जागरण संवाददाता, चतरा। जिले के प्रतापपुर प्रखंड के तीन पंचायत में डेढ़ साल के भीतर 15,835 जन्म प्रमाण पत्र निर्गत किए गए हैं। इसमें अधिकांश फर्जी होने की संभावना है।
चूंकि एक साल पांच महीनों में तीन पंचायतों में इतने सारे बच्चों का जन्म होना संभव नहीं है। प्रमाण पत्रों को निर्गत कराने के लिए जालसाजों का एक बड़ा नेटवर्क सक्रिय है। उनकी धमक झारखंड के विभिन्न जिलों के साथ-साथ दूसरे प्रदेशों तक है।
प्राथमिकी हुई दर्ज
स्थानीय एक जालसाज के सहयोग से पंचायत सचिवों और कंप्यूटर ऑपरेटरों को मिला कर पूरा खेल किया गया है। प्रारंभिक जांच में मामले की पुष्टि होने के बाद उपायुक्त रमेश घोलप के आदेश पर प्रखंड विकास पदाधिकारी ने स्थानीय जालसाज, पंचायत सचिवों और कंप्यूटर ऑपरेटरों के विरुद्ध प्राथमिकी दर्ज कराई है।
उपायुक्त ने बताया कि संगठित गिरोह की संलिप्तता से इंकार नहीं कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि अनुमंडल स्तर पर इस दौरान मात्र 96 जन्म प्रमाण पत्र निर्गत किए गए हैं। शेष प्रमाण पत्र पंचायत एवं प्रखंड स्तर पर निर्गत हुए हैं।
प्रखंड विकास पदाधिकारी की भूमिका संदिग्ध
रामपुर पंचायत में 6,357, जोगियारा में 5,047 और बभने पंचायत में 4,431 जन्म प्रमाण पत्र निर्गत किए गए। उन्होंने कहा कि प्रखंड विकास पदाधिकारी की भूमिका की भी जांच की जा रही है। उन्हें शोकाज किया गया है।
एक प्रश्न के उत्तर में डीसी ने कहा कि बांग्लादेशी या रोहिंग्या का कोई एंगल नहीं है। रांची, खूंटी, जमशेदपुर, गिरिडीह आदि जिलों के अधिकांश प्रमाण पत्र हैं। एक या दो मामला राजस्थान के कोटा का सामने आया है। फिर भी पूरे मामले की गहनता से जांच की जा रही है। रिपोर्ट के आधार पर दोषियों पर कार्रवाई होगी।
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