जीवन जीने की कला सिखाते हमारे लोकगीत
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संवाद सहयोगी, तालगड़िया : झारखंड की महान सांस्कृतिक व प्रकृति पूजा का महापर्व करमा शनिवार को मनाया गया। बहनें दिनभर उपवास कर अपने करम आखड़ा में जावा नृत्य करती रहीं। शाम को करम अखाड़ा में करम डाल की पूजा के लिए सात प्रकार के पुष्प चुनने गई। चास व चंदनकियारी प्रखंड के विभिन्न गावों में जावा डाली के साथ करम आखड़ा में करम डाल की पूजा की गई। मांदर की थाप पर करम गीतों के साथ महिलाओं व बच्चो नें जमकर नृत्य किया।
कोरोना काल के कारण बहनों ने अलग अलग टोली बनाकर करम अखाड़ा बनाया एवं करम डाल की पूजा की। बहनें अपने भाइयों के लिए मंगलकामना करते हुए सुख, समृद्धि, खुशहाली के लिए कामना की एवं प्रकृति के संवर्धन संरक्षण का संकल्प लिया।
पुपुनकी गांव में सादे समारोह में करम आखड़ा का आयोजन हुआ। यहां ग्राम बिकास समिति के अध्यक्ष पुपुनकी पंचायत के मुखिया शिवलाल केवट ने कहा कि झारखंड के मूलवासी आदिवासी ने सांस्कृतिक जीवन में सामूहिक रूप से जीवनशैली का विकास किया है। इसमें सबकी सहभागिता प्रमुख मानी जाती है। इस संस्कृति में आखड़ा की परिपाटी रही है जहां झारखंड के लोग ढोल, नगाड़ों और मांदर की थाप पर मातृभाषा के प्रति सम्मान प्रकट करते हैं। यहां के लोकगीतों में जीवन की असीम संभावना और जीने की कला का बखान है। झारखंड का सांस्कृतिक पर्व करम जावा भाई बहनों के अटूट प्रेम को दर्शाता है। सावन के महीने में मूसलाधार फुहारों में खेतों में लहलहाते फसलों को देखकर खुश होती है और बहनें अपने भाइयों की सलामती, लंबी उम्र की कामना करते हुए करम पर्व करती है। प्रकाश नायक, अख्तर अंसारी, पंचानन रजवार सहित दर्जनों लोग उपस्थित हुए।

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