Trending

    Move to Jagran APP
    pixelcheck

    बोकारो में औद्योगिक विकास पर संकट: नेतृत्व और जमीन की कमी से निवेश ठप

    By Birendra Kumar Pandey Edited By: Mritunjay Pathak
    Updated: Sat, 03 Jan 2026 07:02 PM (IST)

    ‍‍Bokaro News: बोकारो जियाडा औद्योगिक विकास में गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। क्षेत्रीय निदेशक का पद मई से रिक्त है, जिससे निर्णय प्रक्रिया धीमी ...और पढ़ें

    News Article Hero Image

    बोकारो का बियाडा भवन और सेल का मुख्यद्वार। (फाइल फोटो)

    जासं, बोकारो। बोकारो औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण (बोकारो जियाडा) की स्थापना झारखंड औद्योगिक क्षेत्र विकास प्राधिकरण अधिनियम, 1974 के वैधानिक प्रावधानों के अंतर्गत की गई है। झारखंड सरकार द्वारा इसे अधिसूचना संख्या 339, दिनांक 02.03.2001 के माध्यम से अंगीकृत किया गया।

    जियाडा की मूल परिकल्पना राज्य में औद्योगिकीकरण को बढ़ावा देने, राज्य की औद्योगिक नीति के प्रति निवेशकों में जागरूकता उत्पन्न करने तथा उद्योगों के सतत और समावेशी विकास के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने की रही है। इसका उद्देश्य केवल औद्योगिक इकाइयों की स्थापना तक सीमित नहीं है, बल्कि निवेश को आकर्षित करने, रोजगार सृजन और क्षेत्रीय विकास को गति देने से भी जुड़ा हुआ है।

    वर्ष 2016 में बोकारो औद्योगिक क्षेत्र को औपचारिक रूप से जियाडा में समाहित कर दिया गया। इसके बाद बोकारो कार्यालय को जियाडा का क्षेत्रीय कार्यालय घोषित किया गया। भले ही प्रशासनिक ढांचे में यह परिवर्तन हुआ, लेकिन क्षेत्रीय कार्यालय का अस्तित्व और उसकी जिम्मेदारियां बनी रहीं। बोकारो जैसे औद्योगिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र के लिए यह कार्यालय निवेश और औद्योगिक विकास की दृष्टि से आज भी अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाने की क्षमता रखता है।

    हालांकि, वर्तमान समय में जियाडा के क्षेत्रीय कार्यालय की कार्यप्रणाली कई गंभीर चुनौतियों से जूझ रही है। मई माह से क्षेत्रीय निदेशक (आरडी) के पद पर किसी भी नियमित पदाधिकारी की नियुक्ति नहीं हो पाई है। इस पद का प्रभार फिलहाल वरुण रंजन के पास है।

    प्रभार व्यवस्था के तहत कार्य संचालन होने से निर्णय लेने की प्रक्रिया में देरी, अधिकारों के प्रयोग में अस्पष्टता और निवेशकों के साथ समन्वय की कमी जैसी समस्याएं सामने आ रही हैं। क्षेत्रीय निदेशक जैसा अहम पद लंबे समय से रिक्त रहने से कार्यालय की प्रभावशीलता पर प्रतिकूल असर पड़ा है।

    आज की स्थिति यह है कि जियाडा के क्षेत्रीय कार्यालय की अधिकांश शक्तियां व्यवहार में सीमित हो गई हैं। सबसे बड़ी समस्या भूमि उपलब्धता से जुड़ी है। पिछले लगभग दस वर्षों से किसी भी अंचल द्वारा औद्योगिक प्रयोजन के लिए भूमि उपलब्ध नहीं कराई गई है। भूमि आवंटन की प्रक्रिया ठप पड़ने के कारण नए उद्योग स्थापित नहीं हो पा रहे हैं और पहले से रुचि दिखाने वाले निवेशक भी पीछे हट रहे हैं।

    यह सर्वविदित तथ्य है कि बिना भूमि के औद्योगिक निवेश की कल्पना नहीं की जा सकती। जमीन के अभाव में न तो नई इकाइयां स्थापित हो पा रही हैं और न ही बड़े निवेश प्रस्ताव जमीन पर उतर पा रहे हैं। परिणामस्वरूप बोकारो क्षेत्र, जिसमें औद्योगिक विकास की अपार संभावनाएं हैं, निवेश के अवसरों से वंचित रह जा रहा है।

    यदि शीघ्र ही भूमि उपलब्धता, प्रशासनिक सशक्तिकरण और नियमित नेतृत्व की व्यवस्था नहीं की गई, तो जियाडा के मूल उद्देश्य—औद्योगिकीकरण, निवेश और रोजगार—प्रभावित होते रहेंगे।