कथारा : ददई व राजेन्द्र-संजीवा गुट के बाद अब श्रमिक संगठन इंटक का एक अन्य गुट भी सामने आया है। इस नये इंटक के झारखंड प्रदेश अध्यक्ष रामेश्वर सिंह फौजी का स्वागत सोमवार को कथारा में हुआ। उनके साथ नवगठित इंटक के राष्ट्रीय सचिव डॉ. संतोष कुमार ने संवाददाता सम्मेलन कर स्वयं को असली इंटक का पदाधिकारी बताते हुए कहा कि इंटक एक महासंघ है।

नियमानुसार महासंघ स्तर के श्रमिक संगठनों को मान्यता मिलती है। इसका कहीं रजिस्ट्रेशन नहीं किया जाता है। संजीवा रेड्डी के नेतृत्व में चलने वाला संगठन वर्ष 07 में पंजीकृत किया गया है। उन्होंने कहा कि महासंघ की स्थापना के लिए पांच उद्योग व कम से कम पांच राज्यों में 5 लाख से अधिक सदस्यता संख्या होनी चाहिए। तब जाकर भारत सरकार के श्रम मंत्रालय द्वारा उसे मान्यता प्रदान की जाती है।

उन्होंने कहा कि 3 मई 1947 को राष्ट्रीय मजदूर कांग्रेस 'इंटक' की स्थापना सरदार वल्लभ भाई पटेल के नेतृत्व में हुई थी तब संगठन की सदस्यता संख्या एक करोड़ से ज्यादा थी। यह संगठन पूरी तरह कांग्रेस पार्टी का अंग था। बिन्देश्वरी दुबे के कार्यकाल तक संगठन ठीक से संचालित होता रहा, लेकिन संजीवा रेड्डी के नेतृत्व में जाते ही संगठन की सदस्यता घटकर वर्तमान में 39 लाख पहुंच गयी है। जिसे देखते हुए 17-18 जनवरी 2012 को हैदराबाद में इंटक की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक हुई जिसमें 22 राज्यों के 5 हजार से ज्यादा सदस्यों ने भाग लिया। साथ ही इंटक से संबद्घ 720 श्रमिक संगठन के प्रतिनिधि शामिल हुए। सर्वसम्मति से पदाधिकारियों का चुनाव हुआ। जिसके तहत राष्ट्रीय अध्यक्ष अशोक चौधरी, वरिष्ठ उपाध्यक्ष सह आंध्र प्रदेश के अध्यक्ष एम. जितेंद्र, राष्ट्रीय महासचिव केके तिवारी, युवा इंटक के राष्ट्रीय अध्यक्ष व महाराष्ट्र के अध्यक्ष राकेश शेट्टी व राष्ट्रीय सचिव डॉ. संतोष कुमार को बनाने सहित अन्य पदाधिकारियों का चयन किया गया। उसके बाद कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी, प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह एवं श्रम मंत्री को पदाधिकारियों की सूची सौंपी गई।

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