मंजिल एक फिर रास्ते क्यों अलग? लद्दाख के मुद्दे पर आमने-सामने आए सोनम वांगचुक और थुपसंग छेवांग, क्या है अगला कदम?
लद्दाख की चार मांगों को लेकर लेह अपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) केंद्र से बातचीत कर रहे हैं, लेकिन नेताओं में मतभेद सामने आए हैं।

लद्दाख के मुद्दे पर आमने-सामने आए सोनम वांगचुक और थुपसंग छेवांग।
HighLights
लद्दाख की चार मांगों पर केंद्र से चल रही बातचीत।
सोनम वांगचुक ने पदयात्रा का किया है ऐलान।
थुपसन छेवांग बातचीत से समाधान पर दे रहे जोर।
डिजिटल डेस्क, श्रीनगर। लद्दाख की चार मांगें इन दिनों सियासी गलियारे में गरमाई हुई हैं। लद्दाखियों अपनी मांगें पूरी करवाने के लिए केंद्र से लगातार अपील कर रहे हैं। लेह अपेक्स बॉडी (LAB) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) लद्दाख से दिल्ली तक बैठक कर रहे हैं। गृह मंत्रालय की उच्च स्तरीय कमेटी के साथ कई बार बैठक भी हुई है। लेकिन अभी तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है।
LAB और KDA दोनों मिलकर केंद्र से लद्दाख की चार प्रमुख मांगें पूरी करने के लिए अपील कर रहे हैं। लेकिन इस बीच नेताओं में मतभेद भी सामने आए हैं। LAB के सदस्य और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की राय से लद्दाख के पूर्व सांसद थुपसन छेवांग सहमत नहीं हैं। दोनों के विचार एक दूसरे के विपरीत हैं। हालांकि, दोनों की मांगें एक हैं, लेकिन विचार अलग दिखाई पड़ रहे हैं।
सोनम वांगचुक से क्यों सहमत नहीं छेवांग
दिल्ली में केंद्र की बैठक से निराशा मिलने पर सोनम वांगचुक ने अब लद्दाख में पदयात्रा का एलान किया है। वे 19 से 24 सितंबर तक 5 दिवसीय पदयात्रा निकालेंगे। वहीं, थुपसंग छेवांग ने सोनम वांगचुक के अगले कदम पर आपत्ति जताई है। उनका कहना है कि जब केंद्र के साथ बातचीत से मामला हल हो सकता है, तो आंदोलन की क्या जरूरत है?
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क्या है थुपसंग छेवांग की राय?
उन्होंने दिल्ली बैठक के बाद LAB और KDA की ओर से व्यक्त किए गए निराशा पर असहमति जताई और कहा कि वार्ता में हुई कई सकारात्मक चर्चाओं और सहमति के बिंदुओं को जनता के सामने नहीं रखा गया। उन्होंने कहा कि लद्दाख से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर सकारात्मक चर्चा हुई।
निर्वाचन क्षेत्रों और सांसदों की सीट बढ़ाने को लेकर भी प्रतिभागियों से सुझाव लिए गए हैं। उनके मुताबिक, बातचीत इस स्तर तक पहुंच चुकी है कि यूटी स्तर के प्रतिनिधि निकाय को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर स्पष्ट समझ बनी है।

उन्होंने दावा किया कि कई मुद्दों पर सहमति बनी है, जिसमें संविधान के अनुच्छेद 371 के तहत सुरक्षा उपायों की मांग भी शामिल है। छेवांग ने कहा कि लद्दाख को राज्य का दर्जा और संविधान की छठी अनुसूची का विस्तार जैसे मुद्दे व्यापक राजनीतिक विमर्श का हिस्सा बने हुए हैं।
मांग एक, रास्ता अलग
छेवांग ने LAB सदस्य सोनम वांगचुक की ओर से दोबारा आंदोलन शुरू करने की चेतावनी पर भी सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि जब एमएचए के साथ बातचीत के माध्यम से मामला आगे बढ़ रहा है तो फिर नए आंदोलन की जरूरत क्यों है? उन्होंने आंदोलन का रास्ता दोबारा अपनाने के बजाए बातचीत के जरिए हुई प्रगति को आगे बढ़ाने की अपील की है।
कौन हैं थुपसंग छेवांग
थुपसंग छेवांग लद्दाख से 2004 और 2014 में दो बार सांसद रहे हैं। 2014 में वह भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर सांसद चुने गए थे, लेकिन नवंबर 2018 में उन्होंने पार्टी और लोकसभा सीट दोनों से इस्तीफा दे दिया था। वे LAB के संस्थापक रहे हैं।
2019 में लद्दाख को केंद्र शासित प्रदेश बनाए जाने के बाद जब स्थानीय अधिकारों और जमीन-पर्यावरण की चिंताएं बढ़ीं, तो उन्होंने LAB के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी और इसके अध्यक्ष के रूप में आंदोलन का नेतृत्व किया था।
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क्या है लद्दाख की चार मांगें?
- लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा
- छठी अनुसूची में शामिल
- स्थानीय नौकरियों में सुरक्षा
- संसदीय सीटों में बढ़ोतरी
पिछले साल LAB से अलग हुए थे थुपसंग छेवांग
थुपसंग छेवांग ने LAB के अध्यक्ष पद से 6 जुलाई 2025 को अपना इस्तीफा दिया था। हालांकि, लद्दाख के वरिष्ठ नेता होने के नाते वे 9 सितंबर को दिल्ली में हुई बैठक में MHA के विशेष आमंत्रण पर शामिल हुए थे।
