4 बड़ी मांगें और केंद्र की मजबूरी... क्या चाहता है लद्दाख? सोनम वांगचुक के अनशन से दिल्ली बैठक तक की पूरी इनसाइड स्टोरी
लद्दाख अपनी पहचान और स्वायत्तता के लिए केंद्र सरकार से पूर्ण राज्य का दर्जा, विधानसभा और संविधान की छठी अनुसूची ...और पढ़ें

लद्दाख की केंद्र से चार प्रमुख मांगें?
HighLights
लद्दाख पूर्ण राज्य का दर्जा और विधानसभा की मांग कर रहा है।
संविधान की छठी अनुसूची लागू करने की भी प्रमुख मांग है।
स्थानीय युवाओं के लिए सरकारी नौकरियों में स्थायी आरक्षण चाहते हैं।
डिजिटल डेस्क, श्रीनगर। लद्दाख का मुद्दा इन दिनों राष्ट्रीय राजनीति में गरमाया हुआ है। लद्दाख अपनी मांगें पूरी करने के लिए लगातार केंद्र सरकार से अपील कर रहा है। इसको लेकर केंद्र सरकार से कई बार बैठक भी हुई है। आखिर केंद्र से लद्दाख क्या चाहता है? लद्दाख का मुद्दा क्या है? दिल्ली में किस मुद्दे पर बैठक हो रही है?
लद्दाख का पूरा मामला 2019 से शुरू हुआ। जब जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया गया और लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश (UT) बनाया गया। लद्दाख जब केंद्र शासित प्रदेश बना तो लोगों ने खूब स्वागत किया था, लेकिन बाद में अपनी पहचान और स्वायत्तता को लेकर लोगों की चिंता बढ़ गई।
लद्दाख की 4 प्रमुख मांगें
पूर्ण राज्य का दर्जा और विधानसभा की मांग
लद्दाख में दो ग्रुप है लेह एपेक्स बॉडी (Leh Apex Body) और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (Kargil Democratic Alliance )। दोनों ग्रुप मिलकर लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा देने की मांग कर रहे हैं। इसके अलावा लद्दाख में जनता द्वारा चुनी गई सरकार और विधानसभा की भी मांग की जा रही है।
छठी अनुसूची
संविधान की छठी अनुसूची के तहत लद्दाख को स्वायत्त जनजातीय क्षेत्र का दर्जा दिया जाए। इससे स्थानीय परिषदों को जमीन, जंगल और संस्कृति की सुरक्षा के लिए खुद कानून बनाने का अधिकार मिलेगा।
नौकरियों में सुरक्षा
लद्दाख के युवाओं के लिए सरकारी नौकरियों में स्थायी आरक्षण की व्यवस्था की जाए। जिससे युवाओं को नौकरी में दिक्कत ना हो। स्थानीय युवाओं को आसानी से रोजगार मिल सके।
सांसद सीटों में बढ़ोतरी
लद्दाख के भौगोलिक क्षेत्र को देखते हुए सांसदों की सीटों में बढ़ोतरी की मांग की गई है। लोकसभा में 2 सीटें और राज्यसभा में एक सीट देने की मांग की जा रही है।
क्या है लद्दाख का मुख्य मुद्दा?
2019 में लद्दाख को बिना विधानसभा वाला केंद्र शासित प्रदेश बनाया गया। स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासन और नीतियों पर उनका कोई नियंत्रण नहीं है। सारे फैसले उपराज्यपाल और नौकरशाही के हाथों में आ गए हैं। साथ ही स्थानीय निवासियों को डर है कि बाहरी उद्योग और जमीन की खरीद-बिक्री से वहां के पर्यावरण, संस्कृति और संसाधनों को नुकसान पहुंचेगा।
दिल्ली में क्यों हो रही है बैठक?
लद्दाख के मुद्दों के स्थायी समाधान के लिए गृह मंत्रालय (MHA) ने उच्च स्तरीय समिति गठित की है। लेह एपेक्स बॉडी और कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस के बीच दिल्ली में बैठक हुई है। केंद्र सरकार लद्दाख को अनुच्छेद 371 (Article 371) जैसी विशेष व्यवस्था या एक शक्तिशाली निकाय देने के विकल्प प्रस्तुत कर रही है, जबकि लद्दाख के प्रतिनिधि छठी अनुसूची और विधानसभा की मांग पर कायम हैं।
सोनम वांगचुक की भूमिका
सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् सोनम वांगचुक लगातार इस मुद्दे को उठा रहे हैं। इसके लिए उन्होंने अनशन भी किया है। सोनम वांगचुक के विरोध प्रदर्शन व अनशन के बाद दोनों पक्षों के बीच संवाद प्रक्रिया को पटरी पर लाने के उद्देश्य से दिल्ली में कई दौर की बैठक भी हुई है।
यह मुद्दा केवल नेताओं तक सीमित नहीं है, इसमें छात्र, बौद्ध, मुस्लिम और स्थानीय समुदाय एकजुट होकर आंदोलन कर रहे हैं। लेह (बौद्ध बहुल) और कारगिल (मुस्लिम बहुल) ऐतिहासिक रूप से कई मुद्दों पर अलग राय रखते थे, लेकिन इस मुद्दे पर दोनों गुट एक साथ केंद्र के सामने अपनी मांगों पर समान राय रख रहे हैं।
क्या है सरकार की मजबूरी?
केंद्र सरकार का मानना है कि छठी अनुसूची लागू करने या राज्य का दर्जा देने से विकास कार्य बाधित हो सकते हैं। सरकार इसके बजाय अनुच्छेद 371 के तहत सुरक्षा या स्थानीय परिषदों को अधिक वित्तीय अधिकार देने की बात करती है।
